पटना के मसौढ़ी स्थित गांधी मैदान में विजयादशमी के अवसर पर आयोजित रावण दहन कार्यक्रम के बाद अचानक अफरा-तफरी मच गई। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद घर लौटने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ निकासी द्वार पर जमा हो गई, जिससे वहां भगदड़ जैसे हालात बन गए। इस दौरान हुई धक्का-मुक्की में चार महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है। घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
निकासी द्वार पर उमड़ी भारी भीड़ और मची अफरा-तफरी
दशहरा पर्व के पावन अवसर पर मसौढ़ी के गांधी मैदान में रावण वध देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। रावण दहन का कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने के बाद जब दर्शक अपने घरों की ओर लौटने लगे, तो मैदान के बाहर निकलने वाले रास्तों पर अचानक दबाव बढ़ गया। एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के बाहर निकलने का प्रयास करने के कारण मुख्य निकासी द्वार पर भारी भीड़ जमा हो गई।
भीड़ के इस भारी दबाव और आपसी धक्का-मुक्की के बीच कुछ महिलाएं अपना संतुलन खोकर जमीन पर गिर पड़ीं। इस हादसे में कुल चार महिलाएं जख्मी हो गईं। इनमें से एक महिला की स्थिति बेहद गंभीर बताई जा रही है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक घायलों की आधिकारिक पहचान और उनके अस्पतालों में चल रहे इलाज के संबंध में विस्तृत विवरण सामने नहीं आ सका है। इस अचानक हुई दुर्घटना से कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रशासनिक सक्रियता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मी हरकत में आए। पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित करने और घायलों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया। इस घटना के बाद सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा मानकों और भीड़ नियंत्रण के तरीकों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
गांधी मैदान जैसे बड़े सार्वजनिक स्थलों पर होने वाले आयोजनों में अमूमन भारी भीड़ जुटती है। कार्यक्रम समाप्ति के बाद लोगों की सुरक्षित निकासी के लिए पर्याप्त निकास मार्गों, बैरिकेडिंग और पुलिस बल की तैनाती की आवश्यकता होती है। मसौढ़ी की इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या आयोजन समिति और स्थानीय प्रशासन ने भीड़ के सुगम आवागमन के लिए कोई ठोस कार्ययोजना बनाई थी या नहीं। फिलहाल आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट होना बाकी है कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई और क्या किसी स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही तय की गई है।