नासिक के दत्तनगर में दूषित भूजल और स्वास्थ्य समस्याओं पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने महाराष्ट्र सरकार व MPCB से दो सप्ताह में मांगी रिपोर्ट।
नासिक के अंबड औद्योगिक क्षेत्र से सटे दत्तनगर में दूषित भूजल और स्वास्थ्य पर मंडराते खतरे के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान मीडिया रिपोर्ट्स और एक औपचारिक शिकायत के आधार पर लिया है। शिकायतकर्ता गौरव पाटील, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के छात्र हैं, ने आयोग को सौंपी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि अंबड औद्योगिक क्षेत्र की कुछ फैक्टरियों से निकलने वाले रासायनिक कचरे और अपशिष्ट का बिना उचित शोधन (ट्रीटमेंट) के अनुचित तरीके से निस्तारण किया जा रहा है, जिससे रिहायशी इलाकों का भूजल जहरीला हो चुका है।
स्वास्थ्य और आर्थिक संकट का सामना कर रहे स्थानीय नागरिक
दत्तनगर और आसपास के इलाकों में बोरवेल के पानी का उपयोग करने वाले स्थानीय नागरिकों को गंभीर त्वचा रोगों, पेट दर्द और अन्य शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि दूषित जलापूर्ति के कारण उपजे स्वास्थ्य संकट से बचने के लिए लोगों को शुद्ध पेयजल बाजार से खरीदना पड़ रहा है, जिस पर प्रत्येक परिवार को हर महीने लगभग 5,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा बीमारियों के इलाज पर होने वाला खर्च आम परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ रहा है।
स्कूलों और गर्भवती महिलाओं पर मंडराता संकट
मीडिया में आई खबरों का हवाला देते हुए आयोग ने संकेत दिया है कि यदि ये तथ्य सत्य पाए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर नागरिकों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। सामने आई रिपोर्टों में यहां तक कहा गया है कि बढ़ते स्वास्थ्य खतरों के चलते कई विद्यार्थियों का स्कूल जाना प्रभावित हुआ है तथा महिलाओं को गर्भधारण टालने तक की सलाह दी जा रही है। हालांकि, इन सभी स्वास्थ्य समस्याओं और भूजल प्रदूषण के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि संबंधित सरकारी विभागों और विशेषज्ञ जांच रिपोर्ट के आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मुआवजे, मुफ्त इलाज और सख्त कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने आयोग से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक मुआवजा दिया जाए, दूषित भूजल की वैज्ञानिक जांच कराई जाए और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए। इसके साथ ही क्षेत्र में निर्बाध रूप से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने, विशेष चिकित्सा शिविर लगाने तथा प्रभावितों को मुफ्त दवाइयां व उपचार मुहैया कराने की गुहार लगाई गई है।
स्थानीय नागरिकों द्वारा इससे पहले भी महाराष्ट्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और नासिक महानगरपालिका को ज्ञापन सौंपे जाने की बात कही गई है। अब NHRC के इस कड़े निर्देश के बाद राज्य सरकार और संबंधित प्रदूषण नियंत्रण निकायों की रिपोर्ट से यह साफ हो सकेगा कि अब तक इस दिशा में क्या प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं और पीड़ित नागरिकों को राहत देने के लिए आगे क्या योजना है।