नवादा में दुर्गा पूजा के समापन पर बरनवाल महिला समिति ने सिंदूर की होली खेली। महिलाओं ने मां दुर्गा को भावभीनी विदाई दी और सुख-समृद्धि की कामना की।
पारंपरिक रीति-रिवाजों और उत्साह के बीच नवादा में संपन्न हुआ सिंदूर खेला का आयोजन, बड़ी संख्या में महिलाओं ने लिया हिस्सा
बिहार के नवादा जिले में दुर्गा पूजा के समापन के अवसर पर पारंपरिक उल्लास और धार्मिक आस्था का अनूठा नजारा देखने को मिला। विजया दशमी के पावन पर्व पर बरनवाल महिला समिति की ओर से विशेष 'सिंदूर की होली' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान में समाज की बड़ी संख्या में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और मां दुर्गा को अश्रुपूर्ण नेत्रों और उमंग के साथ भावभीनी विदाई दी। पूरे आयोजन के दौरान परिसर में भक्ति, आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का माहौल बना रहा।
समिति की अध्यक्ष की देखरेख में हुआ आयोजन
यह पारंपरिक आयोजन बरनवाल सेवा समिति की अध्यक्ष माधुरी बरनवाल की देखरेख में संपन्न हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति की अन्य प्रमुख सदस्यों का भी विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर रेखा रानी सहित समाज की कई गणमान्य महिलाएं उपस्थित रहीं। सभी ने मिलकर सनातन संस्कृति की परंपराओं का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन किया। आयोजकों का कहना है कि इस तरह के सामूहिक आयोजनों से समाज की महिलाओं को एक मंच पर आने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का अवसर मिलता है।
आरती के बाद एक-दूसरे को लगाया सिंदूर
कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत मां दुर्गा की आरती और विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई। महिलाओं ने सबसे पहले मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया और उनका आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात सुहाग की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर इस पारंपरिक रस्म को निभाया। सिंदूर खेला के इस दौर में महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता था। हर चेहरे पर मां को विदा करने का हल्का विरह और अगले साल उनके फिर से आने की उम्मीद साफ झलक रही थी।
सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि बरनवाल महिला समिति पिछले कई वर्षों से इस परंपरा को निभाती आ रही है। उनका मानना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकजुटता का एक सशक्त माध्यम है। आधुनिकता की दौड़ में नई पीढ़ी अपनी संस्कृति से दूर न हो, इसके लिए ऐसे आयोजनों का विशेष महत्व है। इससे आने वाली पीढ़ियों को अपने रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने और समझने का अवसर मिलता है।
प्रसाद वितरण के साथ संपन्न हुआ अनुष्ठान
सिंदूर खेला और मां दुर्गा की विदाई की रस्म पूरी होने के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। महिलाओं और अन्य गणमान्य लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस प्रकार नवादा में आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक परंपरा का एक सुंदर संगम साबित हुआ, जहां सभी ने मिलकर देवी दुर्गा को विदा किया।