प्रशासनिक गलियारों में अपनी सख्त कार्यशैली और बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग द्वारा हाल ही में की गई एक बड़ी कार्रवाई के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश जारी किया है। अदालत के इस फैसले से जहां एक ओर प्रशासनिक महकमों में हलचल तेज हो गई है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित पक्षों को बड़ी राहत मिलती नजर आ रही है।
क्या है पूरा मामला और क्यों गरमाया विवाद?
पूरा मामला मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के परिसर में संचालित होने वाले खाद्य प्रतिष्ठानों से जुड़ा हुआ है। कुछ समय पहले एफडीए (FDA) ने कमिश्नर तुकाराम मुंढे के नेतृत्व और निर्देशों के तहत मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के परिसर में स्थित विभिन्न कैंटीन और फूड स्टॉल्स पर अचानक छापेमारी और निरीक्षण किया था। इस औचक निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई प्रतिष्ठान नियमों की अनदेखी कर रहे हैं और स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं।
इस निरीक्षण के बाद एफडीए ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन तमाम पांचों खाद्य प्रतिष्ठानों के एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए थे। लाइसेंस रद्द होने या निलंबित होने के कारण इन परिसरों में खाने-पीने की चीजों की बिक्री ठप हो गई थी, जिससे वहां से जुड़े कारोबारियों और प्रबंधकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट का हस्तक्षेप और नया निर्देश
एफडीए की इस सख्त कार्रवाई के खिलाफ संबंधित पक्षों ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया, उसने इस मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
हाईकोर्ट ने एफडीए को निर्देश दिया है कि वे मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के उन पांचों खाद्य प्रतिष्ठानों की फिर से नए सिरे से जांच (Re-inspection) करें। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि अधिकारी दोबारा मौके पर जाकर सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों का आकलन करें कि क्या वहां सुधार की गुंजाइश है या नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
जांच पूरी होने तक चाय-कॉफी बेचने की मिली छूट
अदालत ने व्यापारियों और दुकानदारों को राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण अंतरिम राहत भी प्रदान की है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक एफडीए इन सभी पांचों प्रतिष्ठानों की दोबारा जांच पूरी नहीं कर लेता, तब तक इन परिसरों में चाय और कॉफी जैसे पेय पदार्थों की बिक्री करने की पूरी छूट रहेगी।
हालांकि, यह छूट सीमित है और पूरी तरह से खाद्य सुरक्षा के मानकों के अधीन है, लेकिन इससे कैंटीन संचालकों और वहां काम करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि वे पूरी तरह से ठप पड़े अपने कारोबार को आंशिक रूप से ही सही, लेकिन शुरू कर सकेंगे।
तुकाराम मुंढे की कार्यशैली और प्रशासनिक सख्ती
तुकाराम मुंढे अपनी ईमानदारी और नियमों के प्रति सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जब से एफडीए की कमान संभाली है, तब से राज्यभर में मिलावटखोरों और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई देखने को मिल रही है।
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन जैसी प्रतिष्ठित जगह पर की गई यह कार्रवाई भी उसी सख्ती का हिस्सा थी। जानकारों का मानना है कि इस मामले में हाईकोर्ट का यह आदेश प्रशासनिक पारदर्शिता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए आया है, ताकि किसी भी कारोबारी का व्यवसाय बिना पुख्ता और अंतिम निष्कर्ष के पूरी तरह से प्रभावित न हो।
आगे क्या होगा?
अब सबकी निगाहें एफडीए की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या एफडीए की टीम दोबारा जांच में इन प्रतिष्ठानों को क्लीन चिट देगी या फिर उनके लाइसेंस बहाली पर रोक बरकरार रहेगी? यह तो आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा जब एफडीए अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करेगा। तब तक चाय और कॉफी के चुस्की के साथ ही एमसीए परिसर के इन स्टॉल्स का भविष्य तय होना बाकी है।
