महाराष्ट्र की प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे का एक सख्त फैसला चर्चा के केंद्र में है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त के रूप में अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाने वाले तुकाराम मुंढे ने राज्य में खुले खाद्य तेल की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश दिया था। इस आदेश के सामने आते ही सियासी हलकों और व्यापारी वर्ग में हलचल मच गई। मामला इतना गरमाया कि राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर लंबी चर्चा हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुद दखल देना पड़ा।
मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए एफडीए प्रमुख तुकाराम मुंढे ने यह कदम उठाया था, लेकिन सरकार के भीतर से ही इस फैसले के खिलाफ स्वर उठने लगे। मंत्रियों की आपत्तियों के बाद अब मुख्यमंत्री ने खुले तेल की बिक्री पर पूरी पाबंदी लगाने के बजाय एक विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। आइए जानते हैं कि इस पूरे विवाद के पीछे की असल वजह क्या है और सरकार ने इस पर क्या नया रुख अपनाया है।
मिलावट रोकने के लिए उठाया गया था कड़ा कदम
राज्य में खाद्य पदार्थों में हो रही मिलावट और स्वच्छता के नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के खिलाफ एफडीए इन दिनों एक्शन मोड में है। इसी व्यापक अभियान के तहत खाद्य तेल की गुणवत्ता सुधारने और आम जनता को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खुले तेल की बिक्री पर रोक लगाने का बड़ा फैसला लिया गया था।
एफडीए के इस नियम के तहत यदि कोई भी विक्रेता नियमों का उल्लंघन करते पाया जाता है, तो उस पर 10 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया था। बात यहीं खत्म नहीं होती, यदि मिलावटी तेल के सेवन से मानव स्वास्थ्य को कोई गंभीर खतरा पैदा होता है, तो दोषी के लिए 7 साल तक की जेल की सजा का भी कड़ा प्रावधान रखा गया था।
व्यापारियों और छोटे दुकानदारों की बढ़ी थी चिंता
जैसे ही खुले खाद्य तेल की बिक्री पर रोक का यह फरमान सामने आया, वैसे ही राज्यभर के तेल व्यापारियों और छोटे किराना दुकानदारों में नाराजगी फैल गई। व्यापारियों का तर्क था कि इस फैसले से उनका रोजमर्रा का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही, इसका सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब वर्ग के उपभोक्ताओं पर पड़ रहा था।
बाजार में मिलने वाला ब्रांडेड पैक्ड खाद्य तेल काफी महंगा होता है, जबकि खुला तेल कम कीमत पर आसानी से उपलब्ध हो जाता है। ऐसे में पाबंदी लगने से कम आय वाले परिवारों का बजट बिगड़ना लाजिमी था।
मंत्रिमंडल की बैठक में गूंजा गरीबों की थाली का मुद्दा
सोमवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया। सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने खुले तेल की बिक्री पर रोक का मामला जोर-शोर से उठाया। उनके साथ-साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य मंत्रियों ने भी इस फैसले पर गहरी चिंता जताते हुए पुनर्विचार करने की मांग की।
मंत्रियों का कहना था कि मिलावट के खिलाफ एफडीए की कार्रवाई अपनी जगह बिल्कुल सही है, लेकिन खुले तेल की बिक्री पर अचानक पूरी तरह रोक लगा देना ग्रामीण इलाकों और झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले गरीबों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन गया है।
"रोज कमाकर खाने वाले मजदूर वर्ग के लिए एक साथ एक लीटर या उससे अधिक कीमत का पैक्ड तेल खरीदना असंभव है। झुग्गी और ग्रामीण इलाकों में लोग अपनी जरूरत के हिसाब से 10 से 20 रुपये का खुला तेल खरीदते हैं।" - मंत्रिमंडल बैठक में उठे प्रमुख तर्क
छोटे पैक की कमी और एसओपी की मांग
बैठक में यह व्यावहारिक समस्या भी रखी गई कि बड़ी कंपनियों के 100 या 250 ग्राम वाले सीलबंद पैकेट हर छोटी दुकान या दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में आसानी से उपलब्ध नहीं होते। यदि अचानक खुला तेल मिलना बंद हो जाए, तो गरीब आदमी क्या करेगा?
मंत्रियों ने साफ किया कि वे मिलावट के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य एक ऐसा मध्यम मार्ग निकालना है जिससे शुद्धता भी बनी रहे और पारंपरिक तरीके से छोटा-छोटा कारोबार करने वाले दुकानदार भुखमरी के कगार पर न पहुंचें।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का दखल और नए निर्देश
तमाम मंत्रियों की आपत्तियों और मैदानी हकीकत को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत स्थिति को संभाला। उन्होंने एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे को निर्देश दिया कि खुले खाद्य तेल की बिक्री पर एकतरफा और पूरी पाबंदी लगाने के बजाय एक विशेष एसओपी (SOP) तैयार की जाए।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि सरकार की प्राथमिकता आम जनता को सुरक्षित और शुद्ध तेल मुहैया कराना है, लेकिन इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि:
- पारंपरिक रूप से यह कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों का रोजगार न छिने।
- खुला तेल खरीदने वाले गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग के ग्राहकों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो।
- मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए जांच और कार्रवाई का सिलसिला बिना रुके जारी रहे।
