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गाजा के तंबुओं में जानलेवा गर्मी का कहर, पानी और बिजली के बिना जिंदगी बेहाल

गाजा के तंबुओं में जानलेवा गर्मी का कहर, पानी और बिजली के बिना जिंदगी बेहाल

गाजा की तपती दोपहरी में तंबुओं के भीतर जिंदगी किसी सजा से कम नहीं रह गई है। आसमान से बरसती आग और दूसरी तरफ युद्ध के विस्थापन का दर्द—यह गाजा के उन लाखों विस्थापितों की रोजाना की दास्तां है, जो बेघर होने के बाद अब भीषण गर्मी के नए और खतरनाक संकट से जूझ रहे हैं। तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने तंबुओं में रहने वाले परिवारों के लिए सांस लेना तक दूभर कर दिया है।

तंबुओं में बदला मौसम का मिजाज, जानलेवा साबित हो रही है गर्मी

गाजा के विभिन्न इलाकों में तंबू गाड़कर रह रहे लोग इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, तो दूसरी तरफ चिलचिलाती धूप ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। तंबू, जो केवल प्लास्टिक और कपड़ों के सहारे खड़े हैं, सूरज की किरणों पड़ते ही भट्टी की तरह तप जाते हैं। इसके भीतर रहना, खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।

"गर्मी इतनी ज्यादा है कि इसे सहन करना नामुमकिन है। हम बच्चों को नहलाने के लिए थोड़ा सा पानी बचाते हैं और तंबू को ठंडा करने के लिए उस पर पानी छिड़कते हैं। हवा के लिए हम गत्ते के टुकड़ों को हिलाकर पंखा करने की कोशिश करते हैं। हमारी जिंदगी अब इसी संघर्ष में सिमट कर रह गई है।" - मोहम्मद अबू औदा, विस्थापित निवासी (बेत हानून)

बिजली और पानी की भारी किल्लत ने बढ़ाई मुश्किलें

इस भीषण गर्मी में सबसे बड़ी समस्या बिजली और पानी की है। बिजली की भारी कमी के कारण कूलर या एसी तो दूर, पंखे चलाना भी एक सपना बन गया है। जो लोग किसी तरह सोलर पैनल या छोटी बैटरी का इस्तेमाल कर रहे थे, उनकी बैटरियां भी अब लंबे समय के उपयोग के बाद जवाब दे चुकी हैं। पानी की बूंद-बूंद के लिए लोगों को मीलों दूर लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है। ऐसे में गर्मी से राहत पाने के पारंपरिक उपाय भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।

स्थानीय कारोबार और रिपेयरिंग दुकानों का हाल

स्थानीय बाजारों और दुकानदारों की स्थिति भी इस संकट से अछوتی नहीं है। गाजा में एक इलेक्ट्रिकल अप्लायंसेज की दुकान चलाने वाले अब्दुल रहमान आबेद बताते हैं कि इस गर्मियों के सीजन में उनका कारोबार लगभग ठप है।

"लोग आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। जिन लोगों के पास पुराने पंखे हैं, वे किसी तरह उन्हें ठीक करवा रहे हैं ताकि गर्मी के इन दिनों में थोड़ा बहुत गुजारा हो सके। लेकिन विडंबना यह है कि चलाने के लिए न तो बिजली है और न ही बैटरियों में अब कोई चार्ज बचा है," आबेद ने दर्द बयां करते हुए कहा।

ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट: लगातार बढ़ रहा है संघर्ष

मध्य गाजा के डेर अल-बालाह से रिपोर्टिंग करते हुए पत्रकार मोआथ अल-कहलौत बताते हैं कि गर्मी यहां के लोगों के लिए कोई मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि हर दिन लड़ी जाने वाली एक और नई जंग बन चुकी है। बमबारी और तबाही के साए में जी रहे इन इंसानों के लिए मौसम की यह मार उनके जीवन को और अधिक नारकीय बना रही है।

अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और मानवीय सहायता एजेंसियों के सामने यह एक बड़ी चुनौती है कि इस चिलचिलाती धूप और गर्मी के बीच विस्थापितों को किस तरह राहत पहुंचाई जाए। जब तक बिजली और पानी की नियमित सप्लाई बहाल नहीं होती, तब तक गाजा के तंबुओं में रहने वाले इन बेकसूरों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं लेंगी।


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ममता पाठक

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Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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