गणेशोत्सव की शुरुआत के साथ ही महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। शहर के घनी आबादी वाले इलाके भुलेश्वर में भगवान गणेश की एक भारी-भरकम प्रतिमा अचानक गिर गई, जिसकी चपेट में आने से दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस अप्रत्याशित हादसे ने उत्सव की खुशियों को पलभर में मातम में बदल दिया है और सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुआ यह भयानक हादसा? प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना मुंबई के व्यस्त और ऐतिहासिक बाजार क्षेत्र भुलेश्वर में उस समय घटी जब बप्पा का आगमन जुलूस बहुत धूमधाम से आगे बढ़ रहा था। ढोल-ताशों की गड़गड़ाहट और 'गणपति बाप्पा मोरया' के जयकारों के बीच भक्त झूम रहे थे। प्रतिमा को लाने के लिए एक बड़े वाहन का इस्तेमाल किया जा रहा था और साथ में भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रतिमा का वजन बहुत अधिक था और उसे ले जाने के दौरान सड़क पर बने किसी गड्ढे या संतुलन बिगड़ने के कारण वह अचानक एक तरफ झुक गई। जब तक लोग संभलते और कुछ समझ पाते, तब तक वह विशालकाय मूर्ति सड़क पर मौजूद लोगों पर आ गिरी। अचानक हुए इस हादसे से वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। चीख-पुकार के बीच स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी।
प्रशासन और अस्पताल की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। राहत एवं बचाव दल ने मलबे और मूर्ति के हिस्सों को हटाकर उसके नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने दो लोगों को मृत घोषित कर दिया।
घायलों में से कुछ की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है, जिनका इलाज आईसीयू में चल रहा है। डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मौत (Accidental Death) का मामला दर्ज कर लिया है और यह जांच की जा रही है कि क्या आयोजकों द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी या फिर यातायात नियमों का उल्लंघन हुआ था।
त्योहारों के दौरान सुरक्षा क्यों है सबसे बड़ा सवाल?
मुंबई में गणेशोत्सव का पर्व किसी महाकुंभ से कम नहीं होता। हर साल लाखों लोग सड़कों पर उतरते हैं और बप्पा का स्वागत करते हैं। ऐसे में इस तरह के हादसे हर साल प्रशासन और आयोजकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं:
- भारी मूर्तियों का परिवहन: आजकल लोग अपनी आस्था और भव्यता दिखाने के चक्कर में बेहद ऊंची और भारी मूर्तियां बनवा रहे हैं, जिन्हें संभालना मुश्किल होता है।
- सड़कों की खराब स्थिति: मुंबई की सड़कों पर गड्ढे और स्पीड ब्रेकर भारी वाहनों के संतुलन को बिगाड़ सकते हैं।
- भीड़ प्रबंधन: जुलूस के दौरान सुरक्षा घेरा (Barricading) और नियंत्रित भीड़ का न होना हादसों को दावत देता है।
नेता और प्रशासन ने जताया शोक
इस हृदयविदारक घटना पर महाराष्ट्र के कई बड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। साथ ही, आयोजकों से अपील की गई है कि वे आने वाले दिनों में और अधिक सावधानी बरतें ताकि किसी अन्य परिवार को इस तरह का असहनीय दर्द न सहना पड़े।
