भारत की बेटियां अब सिर्फ गगन ही नहीं चूम रहीं, बल्कि देश की सबसे दुर्गम और रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमाओं पर नेतृत्व की कमान भी संभाल रही हैं। भारतीय सेना और सीमा सड़क संगठन (BRO) जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों में महिला अधिकारियों को महत्वपूर्ण फील्ड कमांड मिलना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है।
पश्चिमी सीमा पर इतिहास रचती कर्नल स्फूर्ति कुलकर्णी
सीमा सड़क संगठन के 'प्रोजेक्ट चेतक' के तहत कर्नल स्फूर्ति कुलकर्णी ने 45 टास्क फोर्स की कमान संभालकर एक अभूतपूर्व इतिहास रचा है। वह भारत की पश्चिमी सीमा पर रणनीतिक सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी टास्क फोर्स का नेतृत्व करने वाली देश की पहली महिला अधिकारी बनी हैं।
इसी क्रम में कर्नल शिखा भदौरिया को भी बेहद संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में रणनीतिक कनेक्टिविटी बनाए रखने वाली फील्ड यूनिटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कठिन हालात, भारी जिम्मेदारी और अटूट फैसला
इन अधिकारियों के नेतृत्व में काम करने वाली इकाइयां केवल सड़कें या पुल नहीं बनातीं, बल्कि वे सेना के जवानों, हथियारों और स्थानीय नागरिकों के लिए जीवनरेखा तैयार करती हैं। शून्य से नीचे का तापमान, माइनस में जाता ऑक्सीजन लेवल और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बीच काम करना कोई साधारण बात नहीं है।
- सामरिक कनेक्टिविटी: सीमावर्ती इलाकों में सड़कें और पुल युद्ध की स्थिति में सेना की तुरंत तैनाती के लिए सबसे अहम होते हैं।
- योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता: भारतीय सैन्य व्यवस्था में अब लिंग नहीं, बल्कि योग्यता, निर्णय क्षमता और अनुशासन ही नेतृत्व का आधार बन रहे हैं।
"आज देश गर्व से कह सकता है कि हमारी बेटियां किसी भी मायने में पीछे नहीं हैं। यह बदलाव सिर्फ पदोन्नति नहीं, बल्कि भारतीय सेना की सोच और संस्थागत विश्वास का नया दौर है।"
सिर्फ संख्या बढ़ाना नहीं, संस्थागत सहयोग भी है जरूरी
एक पूर्व सैनिक के नजरिए से देखें तो यह उपलब्धि केवल तालियां बजाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सच्चे महिला सशक्तिकरण के लिए कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल, निष्पक्ष पदोन्नति नीति और समान पेशेवर अवसर लगातार सुनिश्चित करने होंगे। जब संस्थागत स्तर पर मजबूत सहयोग मिलेगा, तभी यह बदलाव स्थायी और अधिक प्रभावकारी बनेगा।
आत्मनिर्भर और सक्षम भारत की नई आहट
आज भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और आधी आबादी की यह भागीदारी राष्ट्र निर्माण को नई ऊर्जा दे रही है। सीमा सुरक्षा से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट तक में बेटियों का यह बढ़ता कदम साबित करता है कि जब अवसर और भरोसा मिलता है, तो देश की बेटियां हर चुनौती को इतिहास में बदल देती हैं।