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फर्जी मार्कशीट से ग्रामीण डाक सेवक की नौकरी पाने वालों पर CBI का शिकंजा, मुरैना से 4 गिरफ्तार

फर्जी मार्कशीट से ग्रामीण डाक सेवक की नौकरी पाने वालों पर CBI का शिकंजा, मुरैना से 4 गिरफ्तार

सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए लोग किस हद तक जा सकते हैं, इसका एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने फर्जी हाईस्कूल अंकसूचियों (Marksheets) के सहारे ग्रामीण डाक सेवक (GDS) के पद पर नौकरी हथियाने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से चार युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

बिहार बोर्ड से सत्यापन के बाद खुला फर्जीवाड़े का राज

प्राप्त जानकारी के अनुसार, डाक विभाग की आंतरिक शिकायत और दस्तावेजों की गहन छानबीन के बाद यह पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को उनके संबंधित शिक्षा बोर्डों में सत्यापन के लिए भेजा गया था। जब बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड के पास इन दस्तावेजों को भेजा गया, तो वहां से चौंकाने वाला सच सामने आया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जिन अंकसूचियों के आधार पर इन युवकों ने नौकरी पाई है, वे उनके रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हैं यानी पूरी तरह से फर्जी हैं।

दस्तावेजों के फर्जी पाए जाने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई की जबलपुर यूनिट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिकंजा कसा। सीबीआई निरीक्षक आकाश पांडेय के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने मुरैना में दबिश देकर चार मुख्य आरोपियों को धर दबोचा। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मानवेंद्र सिंह सिकरवार, रमाकांत शर्मा, सौरभ शर्मा और प्रदीप खरे के रूप में हुई है।

देश के कई राज्यों में फैला है फर्जी मार्कशीट का यह काला कारोबार

जांच का दायरा जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इस फर्जीवाड़े की परतें उधड़ती जा रही हैं। सीबीआई के शुरुआती अनुसन्धान में यह बात सामने आई है कि यह कोई छिटपुट मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक अंतर-राज्यीय (Inter-state) गिरोह सक्रिय है। यह गिरोह देश के विभिन्न शिक्षा बोर्डों जैसे बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, मध्य प्रदेश राज्य ओपन बोर्ड, जम्मू-कश्मीर स्टेट ओपन और झारखंड एकेडमिक काउंसिल के नाम से मिलती-जुलती और पूरी तरह से हूबहू दिखने वाली फर्जी अंकसूचियां तैयार करता था और इन्हें बेरोजगार युवाओं को भारी-भरकम दामों में बेचता था।

एजेंसी अब इस बात की तह तक जाने का प्रयास कर रही है कि यह गिरोह आखिर अपनी प्रिंटिंग और संचलन का यह अवैध नेटवर्क कहां से चला रहा था। इन जाली दस्तावेजों को तैयार करने वाले मास्टरमाइंड कौन हैं और अभ्यर्थियों तक इन्हें पहुंचाने में कौन-कौन लोग सीधे तौर पर शामिल रहे हैं, इसकी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

अब तक आठ आरोपियों की संलिप्तता आई सामने, सभी बर्खास्त

इस पूरे भ्रष्टाचार प्रकरण में केवल मुरैना के चार युवक ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के अन्य जिलों के युवा भी शामिल हैं। जांच के मुताबिक, कुल आठ ऐसे अभ्यर्थियों की पहचान की गई है जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के बल पर नौकरी हासिल की थी। मुरैना के अलावा इस सूची में टीकमगढ़, देवास और सागर जिले के अभ्यर्थी भी संलिप्त पाए गए हैं।

डाक विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पर रखे गए सभी आठों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

किसकी अंकसूची किस बोर्ड की और कब तक रही सेवा?

डाक विभाग द्वारा जारी आधिकारिक रिकॉर्ड और सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, पकड़े गए और बर्खास्त किए गए कर्मचारियों का पूरा विवरण इस प्रकार है:

  • मानवेंद्र सिंह सिकरवार (मुरैना): बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड की फर्जी मार्कशीट (सेवा अवधि: 5 नवंबर 2024 से 18 जुलाई 2025)
  • रमाकांत शर्मा (मुरैना): बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड की फर्जी मार्कशीट (सेवा अवधि: 21 सितंबर 2024 से 17 सितंबर 2025)
  • प्रदीप खरे (मुरैना): बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड की फर्जी मार्कशीट (सेवा अवधि: 7 सितंबर 2024 से 18 जुलाई 2025)
  • सौरभ शर्मा (मुरैना): बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड की फर्जी मार्कशीट (सेवा अवधि: 19 सितंबर 2024 से 24 जुलाई 2025)
  • नयन कुमार (मुरैना): बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड की फर्जी मार्कशीट (सेवा अवधि: 17 मई 2025 से 8 अप्रैल 2026)
  • बद्री प्रसाद यादव (टीकमगढ़): मप्र राज्य ओपन बोर्ड की फर्जी मार्कशीट (सेवा अवधि: 19 मई 2023 से 22 दिसंबर 2023)
  • देवेंद्र सिंह चौहान (देवास): जम्मू-कश्मीर स्टेट ओपन बोर्ड की फर्जी मार्कशीट (सेवा अवधि: 30 सितंबर 2024 से 18 जुलाई 2025)
  • राजा बाबू अहिरवार (सागर): जम्मू-कश्मीर स्टेट ओपन बोर्ड की फर्जी मार्कशीट (सेवा अवधि: 6 सितंबर 2024 से 23 जुलाई 2025)

जबलपुर और कटनी के अलग-अलग डाकघरों में थी पोस्टिंग

हैरानी की बात यह है कि इन सभी आठों अभ्यर्थियों ने ग्रामीण डाक सेवक (GDS) की भर्ती के दौरान जनवरी 2024 और जुलाई 2024 के ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी दसवीं कक्षा की सेल्फ-अटेस्टेड (स्वयं सत्यापित) अंकसूचियां अपलोड की थीं। चयन होने के बाद इन सभी को जबलपुर संभाग के अंतर्गत नियुक्त किया गया था और बाद में इनकी पोस्टिंग जबलपुर तथा कटनी जिलों के ग्रामीण इलाकों के विभिन्न डाकघरों में कर दी गई थी।

इनकी तैनाती ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे डाकघरों में थी ताकि किसी को लंबे समय तक शक न हो। मानवेंद्र सिंह को कुंडम में, राजा बाबू और सौरभ शर्मा को पाटन में, प्रदीप खरे को कुड़ारी उमरिया-बरेला में, नयन कुमार को रामखिरिया-शहपुरा में, बद्री प्रसाद को संसारपुर में, देवेंद्र सिंह को उमरिया पान में और रमाकांत शर्मा को मोहतरा के डाकघर में तैनात किया गया था।

आगे की कानूनी कार्रवाई

सीबीआई ने गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों से गहन पूछताछ शुरू कर दी है। एजेंसी का मानना है कि इस रैकेट के तार देश के कई अन्य हिस्सों से भी जुड़े हो सकते हैं क्योंकि अलग-अलग राज्यों के ओपन और बोर्ड्स की मार्कशीट का इस्तेमाल किया गया है। जल्द ही सभी आरोपियों को स्थानीय सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां सीबीआई उनकी रिमांड की मांग कर सकती है ताकि इस गिरोह के बाकी सदस्यों को भी जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

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रोशनी गुप्ता

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