चंदौली में स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल: फर्जी अस्पताल और झोलाछाप डॉक्टर का पर्दाफाश
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां बिना किसी वैध डिग्री और प्रशासनिक मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे एक अवैध अस्पताल के कथित डॉक्टर की लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया। धानापुर क्षेत्र में लंबे समय से नियमों को ठेंगा दिखाकर चल रहे इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ, जब एक महिला की जान ऑपरेशन टेबल पर चली गई।
स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी कथित डॉक्टर इंद्रजीत प्रजापति को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस घटना ने एक बार फिर से ग्रामीण इलाकों में सक्रिय झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम के काले कारोबार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो मासूम लोगों की जिंदगी से सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।
ऑपरेशन के दौरान कटी गलत नस, मिनटों में उजड़ गई मांग
घटना की पटकथा बीते 19 सितंबर को लिखी गई थी, जब लखईपुर गांव की रहने वाली सुमन नाम की महिला स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए धानापुर स्थित कथित 'इंदिरा हॉस्पिटल' पहुंची थी। परिजनों को क्या पता था कि जिस अस्पताल में वे अपनी बेटी या पत्नी की सेहत सुधारने की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, वहां मौत उनका इंतजार कर रही है।
परिजनों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, अस्पताल के तथाकथित संचालक और खुद को डॉक्टर बताने वाले इंद्रजीत प्रजापति ने बिना किसी विशेषज्ञता के महिला का ऑपरेशन करना शुरू कर दिया। आरोप है कि सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों की घोर लापरवाही के चलते सुमन की शरीर की एक मुख्य नस कट गई। इस गंभीर त्रुटि के कारण मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। हालत इतनी गंभीर हो गई कि सुमन की किडनी तक को भारी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई। अस्पताल प्रबंधन स्थिति को संभाल नहीं पाया और आखिरकार इलाज के नाम पर चल रहे इस ड्रामे के बीच उसी रात सुमन की सांसें थम गईं।
सुबह थाने पहुंचा कोहराम और न्याय की गुहार
अस्पताल के भीतर हुई इस दर्दनाक मौत के बाद मृतका के घर में कोहराम मच गया। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक सामान्य दिनचर्या चल रही थी, वहां अब चीख-पुकार और मातम पसरा हुआ था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। न्याय की उम्मीद और गुस्से से भरे परिजन अगले दिन सुबह सीधे धानापुर थाने पहुंचे और शव को थाने के सामने रखकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
मृतका के पिता की ओर से दी गई लिखित तहरीर ने इस पूरे मामले की परतें खोल दीं। उन्होंने अस्पताल संचालक पर सीधे तौर पर हत्या और धोखाधड़ी के आरोप लगाए। मामले की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन हरकत में आया और तुरंत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को मामले की जांच के लिए पत्र लिखा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी की जांच रिपोर्ट बनी निर्णायक
प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की गहराई से जांच की गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा गठित जांच टीम ने जब 'इंदिरा हॉस्पिटल' के दस्तावेजों और उसकी कार्यप्रणाली की पड़ताल की, तो होश उड़ाने वाले खुलासे हुए। जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि यह पूरा अस्पताल बिना किसी वैध पंजीकरण, बिना मानक उपकरणों और सबसे बड़ी बात कि बिना किसी मेडिकल डिग्री के चलाया जा रहा था।
सीएमओ की इस आधिकारिक जांच रिपोर्ट के मिलने के बाद पुलिस के हाथ पुख्ता सबूत लग गए। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी इंद्रजीत प्रजापति की धरपकड़ के लिए जाल बिछाया और उसे गिरफ्तार कर लिया।
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली
यह अकेली ऐसी घटना नहीं है जो ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती हो। देश के दूर-दराज के इलाकों में आज भी कई ऐसे तथाकथित क्लीनिक और अस्पताल चल रहे हैं, जिनके पास न तो सरकार की मान्यता है और न ही डॉक्टर के पास एमबीबीएस या अन्य कोई वैध मेडिकल डिग्री। ये लोग भोले-भाले ग्रामीणों को सस्ते इलाज और जल्दी ठीक करने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाते हैं।
- बिना मानक के संचालन: अधिकांश ऐसे अवैध अस्पतालों में आईसीयू, ऑक्सीजन सपोर्ट या इमरजेंसी की कोई सुविधा नहीं होती।
- झोलाछाप डॉक्टरों का आतंक: बिना डिग्री के लोग खुद को सर्जन या फिजिशियन बताकर ऑपरेशन जैसे गंभीर कदम उठा लेते हैं।
- प्रशासनिक सुस्ती: कई बार स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के कारण ये अवैध क्लीनिक लंबे समय तक फलते-फूलते रहते हैं।
प्रशासन की चेतावनी: बख्शे नहीं जाएंगे अवैध अस्पताल
चंदौली की इस घटना के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर नींद से जागा है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में जितने भी अवैध अस्पताल या क्लीनिक बिना मानकों के संचालित हो रहे हैं, उनके खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस मामले में पुलिस का यह भी कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध धंधे में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
सुमन की मौत ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि स्वास्थ्य के नाम पर चल रहे इस अवैध खेल पर लगाम लगाना कितना जरूरी हो गया है। एक परिवार ने अपनी लाडली को हमेशा के लिए खो दिया है, और अब समाज यही उम्मीद कर रहा है कि इस मामले में कोर्ट से आरोपी को ऐसी सजा मिले जो भविष्य में किसी अन्य झोलाछाप को ऐसी हरकत करने से रोक सके।