"यह लड़ाई सिर्फ ज़मीन की नहीं, बल्कि हमारी नस्ल और फसल दोनों को बचाने की है। अपनी खेती किसी कीमत पर नहीं देंगे, भले ही जान ही क्यों न देनी पड़े!"
पूर्वांचल के कृषि प्रधान जिले चंदौली में इन दिनों कुछ यही हुंकार सुनाई दे रही है। विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के प्रस्तावित रूट को लेकर किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले शुरू हुई 'किसान क्रांति खेती बचाओ रथ यात्रा' गांव-गांव पहुंचकर विरोध की अलख जगा रही है।
गांव-गांव पहुंच रही क्रांति यात्रा, मिल रहा भारी समर्थन
सोमवार को परेवा गांव से शुरू हुई यह यात्रा अपने दूसरे दिन दर्जनों गांवों में पहुंची। रथयात्रा ने बरठी, चारी, चिरइगांव, महूजी, रामपुर, बरहनी, लक्ष्मणपुर, बकौड़ी और ओयड़चक जैसे गांवों का भ्रमण किया। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन किसानों की जमीनें इस प्रोजेक्ट में अधिग्रहीत नहीं भी हो रही हैं, वे भी एक्सप्रेसवे के विरोध में खुलकर सामने आ रहे हैं।
"विंध्य एक्सप्रेसवे चंदौली के किसानों को अपनी ही धरती पर भूमिहीन बनाने की एक बड़ी साजिश है। इस जिले की बहुसंख्यक आबादी की आजीविका केवल और केवल खेती पर टिकी है। अगर खेत ही छीन लिए जाएंगे तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अंधेरे में डूब जाएगा।"
- मणिदेव चतुर्वेदी, संयोजक, संयुक्त किसान मोर्चा
10 अगस्त को बिछिया में होगी 'महापंचायत'
आंदोलन को और धार देने के लिए किसान मोर्चे ने एक बड़ा ऐलान किया है। आने वाली 10 अगस्त को बिछिया स्थित धरना स्थल पर 'किसान क्रांति पंचायत' का आयोजन किया जाएगा।
इस महापंचायत में केवल किसान ही नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी आमंत्रित किया गया है ताकि सरकार पर चौतरफा दबाव बनाया जा सके।
आंदोलन में प्रमुख रूप से डटे किसान नेता:
- मणिदेव चतुर्वेदी (संयोजक)
- अशोक सिंह व श्रवण मौर्या
- सुमंत सिंह अन्ना व राम नारायण यादव
- अंगद मौर्या, बाबू लाल यादव व जितेंद्र सिंह
- राम प्यारे, परमहंस यादव और नरेंद्र सिंह
चंदौली के किसानों का स्पष्ट संदेश है कि वे विकास के नाम पर अपनी उपजाऊ कृषि भूमि का विनाश बर्दाश्त नहीं करेंगे। अब सभी की निगाहें 10 अगस्त को होने वाली किसान महापंचायत पर टिकी हैं, जहां से इस आंदोलन की आगे की रणनीति तय होगी।