स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करना हर प्रधानमंत्री के लिए एक गौरवशाली क्षण होता है। इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कई अहम मुद्दों को छुआ, लेकिन उनका भाषण खत्म होने के बाद राजनीतिक गलियारों में एक अलग ही बहस छिड़ गई है। पीएम मोदी के भाषण के दौरान एक पल ऐसा आया जब वे थोड़े असहज दिखे और उन्हें अपने कागजों की मदद लेनी पड़ी। बस फिर क्या था, इस वाकये को और उनके 'दिमागी नक्सल' वाले बयान को लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है।
टेलीप्रॉम्प्टर और भाषण में ठहराव पर विपक्ष का तंज
घटना उस समय की है जब पीएम मोदी साल 2014 से केंद्र में बीजेपी के आने के बाद देश की बायोइकोनॉमी में हुई प्रगति का जिक्र कर रहे थे। इसी दौरान वे अचानक थोड़े लड़खड़ाए और उन्हें अपने पास रखे नोट्स देखने पड़े। सोशल मीडिया पर इस वीडियो क्लिप के वायरल होते ही विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए तंज कसते हुए लिखा, “महामानव बिना टेलीप्रॉम्प्टर के।” वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस क्लिप को साझा किया और पीएम मोदी को “अंडर-कॉन्फिडेंट, नर्वस और shaky (घबराए हुए) प्रधानमंत्री” करार दिया।
महज़ 75 मिनट का रहा भाषणदिलचस्प बात यह है कि इस बार पीएम मोदी का स्वतंत्रता दिवस का भाषण पिछले चार सालों में सबसे छोटा रहा, जो करीब 75 मिनट तक चला। हालांकि, इस भाषण में उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, नक्सलवाद, एमएसएमई, उच्च शिक्षा और कोचिंग संस्थानों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को छुआ था। इसके विपरीत, साल 2023 में पीएम मोदी ने लगभग 90 मिनट तक देश को संबोधित किया था।
'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर भड़की कांग्रेस
विपक्ष का गुस्सा सिर्फ भाषण के दौरान हुई मामूली गड़बड़ी पर ही नहीं फूटा, बल्कि प्रधानमंत्री के उस बयान पर भी कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने 'दिमागी नक्सल' (Ideological Naxals) का जिक्र किया था।
लाल किले से अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा था कि जहां एक ओर सशस्त्र माओवादी हिंसा 'दम तोड़ रही है', वहीं दूसरी ओर कुछ संस्थानों में वैचारिक नक्सलवादी मानसिकता अभी भी बनी हुई है। उन्होंने देशवासियों और अधिकारियों से अपील की कि वे ऐसे तत्वों की पहचान करें और उन्हें अलग-थलग करें, क्योंकि इस तरह की ताकतें युवाओं को अराजकता की ओर धकेल सकती हैं“दो या तीन साल पहले उन्होंने (पीएम मोदी) अपने राजनीतिक विरोधियों को 'शहरी नक्सल' कहा था; उस समय संसद में सवाल उठा था कि 'शहरी नक्सल' की परिभाषा क्या है? गृह मंत्री ने जवाब दिया था कि ऐसा कुछ नहीं है और न ही इसकी कोई परिभाषा है। आज प्रधानमंत्री लाल किले से अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए 'मानसिक नक्सल' (वैचारिक नक्सल) शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं।” - जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस शब्दावली को महज राजनीतिक बयानबाजी करार दिया और बीजेपी सरकार के पुराने 'अर्बन नक्सल' वाले बयानों से इसकी तुलना की। रमेश ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वे पहले आलोचकों पर सवाल उठाते हैं और बाद में उन्हीं की मांगों को अपना लेते हैं। उन्होंने कहा कि एक समय जिस जातिगत जनगणना के विचार को 'शहरी नक्सल सोच' कहकर खारिज किया गया था, उसी सरकार ने बाद में इसकी घोषणा की।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर भी गरमाई सियासत
बहस सिर्फ यहीं नहीं रुकी। कांग्रेस ने पीएम मोदी द्वारा महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) पर दिए गए बयानों को लेकर भी तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में 'बेईमान पिच' तैयार कर रही है, जबकि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लागू करने में जानबूझकर देरी की गई।
जयराम रमेश ने कहा कि संसद ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से महिला आरक्षण कानून पास किया था, लेकिन मोदी सरकार की दोहरी नीति ने यह सुनिश्चित किया कि यह 2024 के आम चुनावों में लागू न हो सके। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी की मजबूत नींव रखी थी।
निष्कर्ष
स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर जहां देश को एकजुट होना चाहिए, वहीं इस तरह के सियासी बयान और विपक्ष की तीखी प्रतिक्रियाएं यह दिखाती हैं कि आने वाले दिनों में राजनीतिक पारा और चढ़ने वाला है। एक तरफ जहां सरकार अपनी उपलब्धियों को गिनाने में जुटी है, वहीं विपक्ष हर एक बिंदु पर पैनी नजर बनाए हुए है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: पीएम मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में 'दिमागी नक्सल' किसे कहा?
A: पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि कुछ संस्थानों में अभी भी वैचारिक नक्सलवादी मानसिकता जीवित है, जो युवाओं को अराजकता की ओर धकेल सकती है। उन्होंने इन्हें 'दिमागी नक्सल' कहकर लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
Q2: विपक्ष ने पीएम मोदी के भाषण पर क्या आपत्ति जताई?
A: विपक्षी नेताओं (विशेषकर कांग्रेस और 'आप') ने भाषण के दौरान पीएम मोदी के अटकने और नोट्स देखने को लेकर तंज कसा। साथ ही, 'दिमागी नक्सल' और महिला आरक्षण के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।
Q3: इस साल का स्वतंत्रता दिवस भाषण कितना लंबा था?
A: इस वर्ष पीएम मोदी का स्वतंत्रता दिवस का भाषण लगभग 75 मिनट का था, जो पिछले चार वर्षों में सबसे छोटा भाषण रहा।।