महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले से वित्तीय धोखाधड़ी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां बैंक कर्मचारियों के सुरक्षित गैज्युईटी (Gratuity) कोष की भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल कर एक जिनिंग एंड प्रेसिंग मिल को कौड़ियों के भाव खरीदने का बड़ा मामला उजागर हुआ है। इस पूरे षड्यंत्र में बाजार मूल्य से कई गुना कम कीमत पर संपत्ति का सौदा करने और कर्मचारियों के हक़ के पैसे का गलत इस्तेमाल करने के आरोप में चार प्रमुख लोगों के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। इस घटना के सामने आने के बाद से बैंकिंग और सहकारिता जगत में हड़कंप मच गया है।
कहाँ और कैसे सामने आया पूरा मामला?
यह पूरा मामला छत्रपति संभाजीनगर जिले की फुलंब्री तहसील के अंतर्गत आने वाले डोंगरगांव कवाड इलाके से जुड़ा हुआ है। यहाँ गट नंबर 367 में लगभग 2 हेक्टेयर और 43 वर्गमीटर जमीन पर 'गाडेकर जिनिंग एंड प्रेसिंग' नाम से मिल स्थित है। इस संपत्ति की मालकिन एक सेवानिवृत्त प्राध्यापिका जयश्री विष्णु गाडेकर हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस संपत्ति पर कैनरा बैंक का लगभग 1 करोड़ 90 लाख रुपए का कर्ज बकाया था। कर्ज चुकाने और अपनी संपत्ति को व्यवस्थित करने के सिलसिले में गाडेकर परिवार की बातचीत आदर्श बैंक से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों से हुई थी। यहीं से इस बड़े वित्तीय खेल की शुरुआत होती है, जिसकी परतें अब पुलिस की शुरुआती जांच में उधड़ने लगी हैं।
7 करोड़ की संपत्ति का सौदा मात्र 2.11 करोड़ में
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद हैरान करने वाले हैं। आधिकारिक दस्तावेजों और शिकायत के मुताबिक, डोंगरगांव कवाड स्थित इस जमीन और जिनिंग का कुल मूल्यांकन करीब 6 करोड़ 56 लाख 43 हजार रुपए आंकी गई थी। गाडेकर परिवार का दावा था कि इस संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य और सौदा लगभग 7 करोड़ रुपए के आसपास तय हुआ था।
लेकिन आरोप है कि आदर्श बैंक से जुड़े अंबादास मानकापे और उनके पुत्र संदीप मानकापे ने कैनरा बैंक के तत्कालीन अधिकारियों के साथ मिलकर इस पूरी प्रक्रिया में बड़ा खेल कर दिया। जिनिंग पर बकाया कर्ज की आड़ में सांठगांठ की गई और जिस संपत्ति की कीमत बाजार में 7 करोड़ रुपए आंकी जा रही थी, उसे महज 2 करोड़ 11 लाख 10 हजार 1 रुपए में ही खरीद लिया गया। इसके बाद तुरंत बिक्री प्रमाणपत्र (Sale Certificate) हासिल करके जिनिंग का कब्जा भी ले लिया गया।
कर्मचारियों के गैज्युईटी कोष का हुआ गलत इस्तेमाल
इस पूरे सौदे का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इसके लिए पैसों का इंतजाम कहां से किया गया। जब संपत्ति की मालकिन जयश्री गाडेकर ने अपने स्तर पर इस पूरी खरीद-फरोख्त की छानबीन की, तो एक सनसनीखेज सच सामने आया।
आरोप है कि इस जिनिंग की खरीद और मुंबई में इसके स्टांप शुल्क (Stamp Duty) के भुगतान के लिए किसी वैध निजी फंड का इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि 'आदर्श महिला नागरी सहकारी बैंक' के कर्मचारियों के समूह के लिए बनाए गए 'गैज्युईटी कोष' (Gratuity Fund) के बैंक खाते से पैसे निकाले गए। कर्मचारियों के भविष्य और सुरक्षा के लिए जमा किए गए इस संरक्षित फंड का निजी संपत्ति खरीदने में धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया, जो सीधे तौर पर वित्तीय नियमों का घोर उल्लंघन और विश्वासघात है।
इन चार लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
मामले की गंभीरता को देखते हुए सेवानिवृत्त प्राध्यापिका जयश्री विष्णु गाडेकर ने स्थानीय जिन्सी पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की प्राथमिक जांच के बाद चार नामजद लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया है। जिन लोगों पर शिकंजा कसा गया है, उनमें:
- संदीप मानकापे पाटिल
- अंबादास मानकापे
- आदर्श बैंक के प्रबंधक (मैनेजर)
- कैनरा बैंक के तत्कालीन प्रबंधक (मैनेजर)
शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन सभी की आपसी मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर सरकारी और संस्थागत नियमों को ताक पर रखना संभव नहीं था।
आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कर रही है गहराई से जांच
मामले की नजाकत को देखते हुए इसकी जांच अब साधारण थाने से हटाकर जिले की विशेष आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing - EOW) को सौंप दी गई है। आर्थिक अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक अशोक भंडारे इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं।
जांच अधिकारियों का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि गैज्युईटी कोष से आखिर कितनी सटीक रकम निकाली गई, बैंक अधिकारियों ने किस नियम के तहत इस तरह के संदिग्ध दस्तावेजों को मंजूरी दी, और क्या इस घोटाले में कुछ और लोग भी पर्दे के पीछे से शामिल हैं। पुलिस जल्द ही इस मामले में संलिप्त अन्य लोगों से भी पूछताछ कर सकती है और गिरफ्तारियों का सिलसिला भी शुरू हो सकता है।
सहकारिता क्षेत्र में मचा हड़कंप
इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद से छत्रपति संभाजीनगर और आसपास के इलाकों के सहकारी बैंकों में हड़कंप मच गया है। आम नागरिकों और बैंक कर्मचारियों का कहना है कि अगर कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए रखे जाने वाले फंड का इस तरह से दुरुपयोग होने लगेगा, तो वित्तीय संस्थाओं पर से आम आदमी का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक जिनिंग की खरीद का नहीं, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था की मिलीभगत से किए गए एक बड़े सुनियोजित आर्थिक अपराध का है। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने पर कई और सनसनीखेज खुलासे होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।