छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राज्य के बहुचर्चित 570 करोड़ रुपए के कोल लेवी घोटाले मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) अब अपनी अंतिम चार्जशीट (Final Charge Sheet) दाखिल करने की तैयारी पूरी कर चुका है। इस प्रक्रिया के तहत मामले से जुड़े प्रमुख आरोपी और जनप्रतिनिधि सीधे रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश हुए हैं, जिससे राज्य की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है।
विशेष अदालत में पेश हुए प्रमुख चेहरे
अक्टूबर 2026 के इस ताजा घटनाक्रम के अनुसार, छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी स्कैम में कांग्रेस के विधायक और अन्य नामजद आरोपी कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करने के लिए रायपुर की विशेष अदालत में पहुंचे। इनमें प्रमुख रूप से विधायक देवेंद्र यादव और पूर्व विधायक चंद्रदेव राय सहित कुल 9 आरोपी शामिल हैं। अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और इस हाई-प्रोफाइल पेशी को देखने के लिए राजनीतिक हलकों के साथ-साथ आम जनता की भी भारी भीड़ नजर आई।
जांच एजेंसी EOW पिछले कई महीनों से इस विशाल घोटाले के वित्तीय लेन-देन, सिंडिकेट के सरगनाओं और अवैध वसूली के तमाम सुरागों को जोड़ने में जुटी थी। अब जबकि मामले की अंतिम चार्जशीट कोर्ट में पेश होने की दहलीज पर है, तो आरोपियों का अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना इस बात का संकेत है कि कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है और सुनवाई का नया दौर जल्द ही शुरू होने वाला है।
क्या है 570 करोड़ का कोल लेवी घोटाला?
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ में ट्रांसपोर्ट होने वाले प्रति टन कोयले पर अवैध रूप से 25 रुपए प्रति टन की लेवी (अवैध वसूली) से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के शुरुआती खुलासों के मुताबिक, राज्य में एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय था, जिसमें कथित तौर पर ब्यूरोक्रेट्स, बड़े कारोबारी और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोग शामिल थे। इस अवैध वसूली के जरिए अकूत संपत्ति जुटाई गई, जिसका इस्तेमाल विभिन्न माध्यमों से काले धन को सफेद करने (Money Laundering) और चुनावी फंडिंग में किए जाने के आरोप हैं।
- अवैध लेवी वसूली: कोयला परिवहन पर प्रति टन तयशुदा अवैध वसूली।
- सिंडिकेट की भूमिका: अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों की मिलीभगत से नेटवर्क चलाना।
- वित्तीय अनियमितताएं: करोड़ों के बेहिसाब लेन-देन और शैल कंपनियों के जरिए निवेश।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शुरुआती जांच के बाद इस मामले की आंच EOW तक पहुंची थी, जिसके बाद राज्य स्तर पर एफआईआर दर्ज कर बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और छापेमार कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
देवेंद्र यादव और अन्य आरोपियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
विधायक देवेंद्र यादव और चंद्रदेव राय समेत अन्य आरोपियों का कोर्ट में पहुंचना इस बात की ओर इशारा करता है कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ पुख्ता सबूत अदालत के सामने रख रहा है। हालांकि, बचाव पक्ष के वकीलों का कहना है कि वे कानूनी दायरे में रहकर अपने मुवक्किलों का पक्ष रखेंगे और अदालत में इन आरोपों को चुनौती दी जाएगी। लेकिन जिस तरह से EOW ने अपनी जांच का दायरा विस्तृत किया है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में कोर्ट की कार्यवाही बेहद दिलचस्प और तीखी होने वाली है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की राह
इस बहुचर्चित मामले में चार्जशीट पेश होने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कानूनी जीत बता रहे हैं, वहीं प्रभावित दलों का यह दावा है कि राजनीतिक प्रतिशोध के चलते उनके नेताओं को फंसाया जा रहा है। बहरहाल, अदालत का रुख क्या रहता है और आने वाली तारीखों में न्यायाधीश क्या फैसला सुनाते हैं, इस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।
राज्य के सबसे बड़े आर्थिक अपराधों में गिने जाने वाले इस कोल लेवी कांड का यह नया अध्याय यह तय करेगा कि आने वाले समय में कानून के लंबे हाथ किस-किस तक पहुंचते हैं। अदालत की अगली कार्रवाई और चार्जशीट के विस्तृत दस्तावेजों के बाहर आने के बाद इस पूरे नेटवर्क की कई और परतें उधड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।