संगम की पावन रेती पर सनातन आस्था का सबसे बड़ा और अलौकिक समागम यानी माघ मेला अपने विराट स्वरूप की ओर कदम बढ़ा चुका है। साल 2027 में आयोजित होने वाले माघ मेले को इस बार ऐतिहासिक और अब तक के सबसे भव्य रूप में सजाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और उनकी सुख-सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने अभी से कमर कस ली है। इस बार मेले के क्षेत्रफल में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जिससे देश-विदेश से आने वाले कल्पवासियों और श्रद्धालुओं को और अधिक सुगमता मिल सकेगी।
925 हेक्टेयर में फैलेगा मेला क्षेत्र, आठ सेक्टरों में बंटेगी व्यवस्था
प्रशासनिक स्तर पर हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में जो खाका तैयार किया गया है, उसके अनुसार वर्ष 2027 का माघ मेला कुल 925 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्रफल में बसाया जाएगा। यदि इसकी तुलना पिछले यानी वर्ष 2026 के मेल क्षेत्र से करें, तो इस बार लगभग 81 हेक्टेयर की भारी-भरकम बढ़ोतरी की गई है। इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पूरे मेला परिसर को कुल आठ सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा।
मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. और पुलिस आयुक्त पियूष मोर्डिया की संयुक्त अध्यक्षता में हुई पहली निर्णायक बैठक में यह साफ कर दिया गया है कि इस बार व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पिछले आयोजनों के अनुभवों से सीख लेते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभी से धरातल पर काम शुरू कर दें ताकि समय रहते सभी कार्य पूरे किए जा सकें।
नागवासुकी मंदिर के सामने बनेगा विशेष सेक्टर
इस बार के माघ मेले की सबसे खासियतों में से एक नागवासुकी मंदिर के सामने एक विशेष सेक्टर का विकास किया जाना है। धार्मिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र को विशेष रूप से संवारा जाएगा ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, मेला क्षेत्र को जोड़ने और यातायात को सुगम बनाने के लिए पांटून पुलों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
योजना के मुताबिक, मेला क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए इस बार दो नए पांटून पुल अतिरिक्त रूप से बनाए जाने का प्रस्ताव है। पारंपरिक रूप से बनने वाले नौ पांटून पुलों की व्यवस्था तो रहेगी ही, साथ ही इन नए पुलों के बन जाने से मेला क्षेत्र के भीतर आवागमन और अधिक सहज हो जाएगा।
52 दिनों तक चलेगा आस्था का यह अनुष्ठान, जानें प्रमुख स्नान पर्वों की तारीखें
वर्ष 2027 का यह माघ मेला कुल 52 दिनों की लंबी अवधि तक चलेगा। यह भव्य आयोजन 14 जनवरी से शुरू होकर छह मार्च तक अनवरत चलेगा। इस दौरान छह अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र स्नान पर्व आएंगे, जिन पर करोड़ों श्रद्धालुओं के संगम में डुबकी लगाने की संभावना है:
- 14-15 जनवरी 2027: मकर संक्रांति (प्रथम प्रमुख स्नान)
- 22 जनवरी 2027: पौष पूर्णिमा
- 06 फरवरी 2027: मौनी अमावस्या (सबसे बड़ा स्नान पर्व)
- 11 फरवरी 2027: बसंत पंचमी
- 20 फरवरी 2027: माघी पूर्णिमा
- 06 मार्च 2027: महाशिवरात्रि (अंतिम स्नान पर्व)
पार्किंग और यातायात व्यवस्था का चौतरफा विस्तार
मेले में आने वाले वाहनों की भारी भीड़ को नियंत्रित करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए इस बार पार्किंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर विशेष फोकस किया गया है। पार्किंग क्षेत्र को पिछले साल के मुकाबले काफी बढ़ाया जा रहा है:
- पार्किंग का कुल क्षेत्रफल 250 हेक्टेयर से बढ़ाकर सीधे 280 हेक्टेयर किया जा रहा है।
- पार्किंग स्थलों की संख्या 42 से बढ़ाकर 48 कर दी गई है।
- वाहनों की कुल क्षमता 1.30 लाख से बढ़ाकर 1.45 लाख वाहनों की जाएगी।
- यादतायात को सुचारू रखने के लिए इस बार एक की जगह दो मुख्य ट्रैफिक लाइनें बनाई जाएंगी।
सुरक्षा के मोर्चे पर अभूतपूर्व इंतजाम: 1152 सीसीटीवी कैमरे रखेंगे नजर
करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस बार पुलिस और प्रशासन ने तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। मेला क्षेत्र की चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या को लगभग तिगुना कर दिया गया है। पिछले आयोजनों में जहां करीब 400 कैमरे होते थे, वहीं इस बार पूरे मेला क्षेत्र में 1152 हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त अन्य सुरक्षात्मक उपायों को भी मजबूत किया जा रहा है:
- पुलिस चौकियों की संख्या 42 से बढ़ाकर 50 करने का प्रस्ताव है।
- महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए महिला हेल्प डेस्क 16 से बढ़ाकर 18 किए जाएंगे।
- साइबर अपराधियों और अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए साइबर हेल्प डेस्क की संख्या 16 से बढ़ाकर 17 होगी।
- अग्निशमन सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए फायर कर्मियों की संख्या 17 से बढ़ाकर 19 यूनिट/टीम की जाएगी।
बुनियादी सुविधाओं और स्वच्छता पर रहेगा कड़ा पहरा
मेला क्षेत्र में आने वाले कल्पवासियों और संतों को बिजली, पेयजल, सैनिटेशन, ड्रेनेज और टेंट-पांडाल जैसी बुनियादी सुविधाएं समयबद्ध तरीके से मिल सकें, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को अभी से एक्शन मोड में आने को कह दिया गया है। मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया है कि समतलीकरण से लेकर स्वच्छता तक के सभी कार्य उच्च गुणवत्ता के होने चाहिए। पिछले सालों में आई छोटी-मोटी कमियों को इस बार पूरी तरह से दूर करने की रणनीति बनाई गई है, ताकि प्रयागराज आने वाला हर श्रद्धालु एक दिव्य और भव्य अनुभव के साथ अपने घर लौटे।
