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UP Board New Admission Rule: दाखिले में जन्मतिथि को लेकर कड़े नियम जारी

UP Board New Admission Rule: दाखिले में जन्मतिथि को लेकर कड़े नियम जारी

शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और भविष्य में होने वाले कानूनी या प्रशासनिक विवादों को रोकने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने एक बेहद अहम कदम उठाया है। अक्सर ऐसा देखा गया है कि छात्र जब अपनी शिक्षा के अंतिम दौर में या हाईस्कूल की परीक्षा पास करने के बाद अपने प्रमाण पत्रों में सुधार के लिए चक्कर काटते हैं, तो उनकी मुश्किलें काफी बढ़ जाती हैं। इन तमाम समस्याओं की जड़ें अक्सर शुरुआती दाखिले के समय ही जम जाती हैं, जब बिना पुख्ता दस्तावेजों के जन्मतिथि दर्ज कर दी जाती है। इस गंभीर समस्या पर लगाम कसने के लिए अब बोर्ड प्रशासन ने कमर कस ली है और स्कूलों को सख्त निर्देश थमाए गए हैं।

प्रवेश के समय ही बरती जाएगी पैनी नजर

उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में अब छात्र-छात्राओं के दाखिले की प्रक्रिया उतनी आसान नहीं होगी जितनी पहले हुआ करती थी। बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से जारी किए गए नए और सख्त निर्देशों के मुताबिक, स्कूलों को अब एडमिशन के वक्त ही छात्र की जन्मतिथि के दस्तावेजों की बेहद बारीकी से जांच करनी होगी। आमतौर पर यह देखा जाता है कि प्रवेश के वक्त जो जन्मतिथि स्कूल के रजिस्टर में दर्ज हो जाती है, वही आगे चलकर छात्र के पूरे शैक्षणिक करियर और बोर्ड के मुख्य अभिलेखों का आधार बन जाती है। ऐसे में यदि शुरुआती स्तर पर ही कोई त्रुटि या लापरवाही हो जाती है, तो वह छात्र के भविष्य के लिए भारी संकट पैदा कर सकती है।

सत्यापन के लिए तय किए गए पांच मुख्य अभिलेख

छात्रों की जन्मतिथि के सत्यापन को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे, इसके लिए बोर्ड ने पांच प्रमुख मान्य अभिलेखों की सूची स्पष्ट कर दी है। विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि इन दस्तावेजों के आधार पर ही पूरी प्रमाणिकता के साथ प्रविष्टियां की जाएं:

  • जन्म प्रमाणपत्र: इसे सबसे पहली और सर्वोपरि प्राथमिकता दी जाएगी।
  • अस्पताल या एएनएम पंजीयन अभिलेख: यदि जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध न हो, तो मेडिकल रिकॉर्ड को आधार बनाया जाएगा।
  • आंगनबाड़ी अभिलेख: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्र के रिकॉर्ड को भी मान्यता दी गई है।
  • ग्राम पंचायत अभिलेख: जन्म-मृत्यु पंजीकरण से जुड़े ग्रामीण स्तर के आधिकारिक दस्तावेज।
  • शपथपत्र: अंतिम विकल्प के तौर पर माता-पिता या अभिभावक द्वारा दी गई विधिवत घोषणा का शपथपत्र मान्य होगा।

हाईस्कूल प्रमाणपत्र में संशोधन के बढ़ते मामलों पर चिंता

पिछले कुछ वर्षों में बोर्ड के सामने ऐसे मामलों की बाढ़ सी आ गई थी जहां छात्रों ने हाईस्कूल प्रमाणपत्र और अंकपत्र मिलने के बाद उसमें जन्मतिथि बदलवाने के लिए आवेदन किए। इन अदालती और प्रशासनिक चक्करों ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी अतिरिक्त दबाव डाला है। कई बार माध्यमिक स्तर पर प्रवेश के दौरान प्राथमिक या उच्च प्राथमिक विद्यालयों की ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) को ही अंतिम सत्य मान लिया जाता है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है। इन्ही विसंगतियों को दूर करने के लिए अब बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल कागजी टीसी के भरोसे काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरे रिकॉर्ड की गहन और पारदर्शी जांच जरूरी होगी।

शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के नियमों का पालन

इस पूरी व्यवस्था के बीच शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (RTE) के प्रावधानों का भी विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। कई मामलों में यह बात सामने आई है कि तय मानकों से कम उम्र के बच्चों का भी दाखिला करा दिया जाता है, जिससे बाद में उम्र के सत्यापन को लेकर पेंच फंस जाते हैं। आरटीई के नियमों के तहत कक्षा एक में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु छह वर्ष तय की गई है। इस नियम का कड़ाई से पालन हो, इसके लिए जन्म प्रमाणपत्र को पहली प्राथमिकता दी जाएगी। यदि किसी कारणवश यह प्रमाणपत्र तुरंत उपलब्ध नहीं होता है, तो अन्य मान्य अभिलेखों के आधार पर ही प्रविष्टि की जाएगी और उसका स्पष्ट इंदराज संबंधित स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज करना अनिवार्य होगा।

अभिभावकों और स्कूलों के लिए संदेश

शिक्षाविदों और विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड का यह कदम भले ही थोड़ा सख्त लगे, लेकिन यह छात्रहित में एक दूरगामी और सकारात्मक बदलाव साबित होगा। अक्सर गलत जन्मतिथि दर्ज होने की वजह से छात्रों को आगे चलकर सरकारी नौकरियों, पासपोर्ट बनवाने या उच्च शिक्षा के दौरान भारी मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है। अब यदि दाखिले के वक्त ही इन पांचों अभिलेखों की क्रॉस-चेकिंग पुख्ता तरीके से हो जाएगी, तो भविष्य में होने वाले संशोधनों की गुंजाइश लगभग न के बराबर रह जाएगी। सभी विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे इन नियमों का पालन पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ सुनिश्चित करें।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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