उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध चोपता-तुंगनाथ पैदल मार्ग पर एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां लगभग 400 मीटर गहरी खाई में गिरने से एक युवा महिला की मौत हो गई। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय पुलिस के साझा रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सोमवार को महिला के शव को गहरी खाई से बाहर निकाला गया। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पर्यटन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं।
कंट्रोल रूम को मिली थी हादसे की सूचना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आपदा कंट्रोल रूम रुद्रप्रयाग को 20 सितंबर को एक आपातकालीन सूचना मिली थी। सूचना में बताया गया कि चोपता से तुंगनाथ जाने वाले प्रसिद्ध पैदल मार्ग पर एक महिला अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई है और लापता है। घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत प्रशासनिक तंत्र हरकत में आया। अगस्त्यमुनि में तैनात एसडीआरएफ की टीम को तुरंत बचाव कार्य के लिए रवाना किया गया।
अपर उप निरीक्षक प्रेम प्रकाश के नेतृत्व में एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई। टीम जब तक चोपता पहुंची, तब तक शाम ढल चुकी थी। इसके बावजूद बिना एक पल गंवाए तुंगनाथ मंदिर के आसपास के इलाकों में गहन तलाशी अभियान शुरू किया गया। हालांकि, पहाड़ों पर रात का घना अंधेरा, ऊबड़-खाबड़ रास्ता और भारी ठंड के कारण रात के वक्त रेस्क्यू ऑपरेशन को आगे बढ़ाना असंभव साबित हुआ। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रात को अभियान कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।
सोमवार सुबह तड़के शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन
सोमवार, 21 सितंबर 2026 की सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही एसडीआरएफ की टीम ने फिर से अपना खोज और बचाव अभियान शुरू किया। सुबह करीब 7:10 बजे टीम ने रावण शीला क्षेत्र से नीचे की तरफ उतरते हुए गहरी खाइयों में तलाश शुरू की। टीम के सदस्यों ने अपनी जान जोखिम में डालकर ड्रोन और मैनुअल सर्चिंग की मदद ली।
कुछ घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद रावण शीला के नीचे लगभग 400 मीटर (करीब 1300 फीट) गहरी खाई में एक महिला का शव संदिग्ध अवस्था में दिखाई दिया। स्थिति स्पष्ट होते ही टीम ने तुरंत डीडीआरएफ (DDRF) और स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। सभी टीमों ने आपसी तालमेल बिठाते हुए खाई के दुर्गम और खतरनाक इलाके में उतरकर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया।
तीन किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर पैदल चलना पड़ा
हाइवे या सड़क मार्ग न होने के कारण खाई से शव को निकालना किसी चुनौती से कम नहीं था। एसडीआरएफ, डीडीआरएफ और स्थानीय पुलिस के जवानों ने अत्यधिक संकरे और जोखिम भरे रास्तों पर काम किया। शव को खाई से निकालने के बाद जवानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसे मुख्य मार्ग तक पहुंचाने की थी।
सुरक्षा बलों ने मानवीय संवेदनाओं और पेशेवर मुस्तैदी का परिचय देते हुए शव को स्ट्रेचर पर रखा और करीब तीन किलोमीटर तक पैदल दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होते हुए चोपता तक पहुंचाया। इस दौरान जवानों को भारी ढलान और पत्थरों के बीच से गुजरना पड़ा। चोपता पहुंचने के बाद शव को स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।
पंजाब की रहने वाली थी मृतका
पुलिस ने प्रारंभिक जांच और दस्तावेजों के आधार पर मृतका की शिनाख्त कर ली है। मृतका की पहचान 26 वर्षीय पूजा साहनी के रूप में हुई है, जो पंजाब की रहने वाली थी। अंदेशा जताया जा रहा है कि वह यहां छुट्टियां मनाने या धार्मिक यात्रा के तहत तुंगनाथ दर्शन के लिए आई होगी। पैदल मार्ग पर चलते समय संतुलन बिगड़ने या किसी अन्य कारण से वह फिसलकर खाई में जा गिरी।
पुलिस ने मृतका के परिजनों को इस अनहोनी की सूचना दे दी है। परिजनों के उत्तराखंड पहुंचने के बाद ही आगे की कानूनी औपचारिकताएं जैसे कि पोस्टमार्टम आदि पूरी की जाएंगी। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि क्या वह अकेली ट्रेकिंग कर रही थी या उसके साथ कोई अन्य साथी भी मौजूद था।
पहाड़ी ट्रैकिंग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां
चोपता-तुंगनाथ का यह मार्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता और दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर (तुंगनाथ) के लिए जाना जाता है। हर साल यहां देश-विदेश से हजारों पर्यटक और ट्रैकर आते हैं। लेकिन जरा सी लापरवाही यहां भारी पड़ सकती है। इस दुखद घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और विशेषज्ञों ने पर्यटकों के लिए कुछ अहम सलाह जारी की हैं:
- अत्यधिक सतर्कता बरतें: मार्ग संकरे और पथरीले हैं, इसलिए चलते समय पूरी तरह से सतर्क रहें।
- अकेले ट्रेकिंग से बचें: दुर्गम रास्तों पर कभी भी अकेले न जाएं, हमेशा ग्रुप या गाइड के साथ यात्रा करें।
- सुरक्षा बैरियर का ध्यान रखें: जिन स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगे हैं या रेलिंग नहीं है, वहां सेल्फी लेने या किनारे पर जाने से बचें।
- समय सीमा का पालन करें: पहाड़ों पर शाम ढलने के बाद अंधेरा बहुत जल्दी होता है, इसलिए अपनी यात्रा दिन के समय ही पूरी करें।
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि प्रकृति जितनी खूबसूरत है, उतनी ही अप्रत्याशित और खतरनाक भी हो सकती है। प्रशासन की ओर से लगातार पर्यटकों से अपील की जा रही है कि वे सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करें ताकि ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।