जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। विधानसभा सत्र के पहले दिन ही सदन के भीतर और बाहर का माहौल काफी तनावपूर्ण और मुद्दों से भरपूर दिखाई दिया। सत्र की शुरुआत भले ही विधिवत रूप से हुई हो, लेकिन विपक्षी विधायकों और जन प्रतिनिधियों ने जनता से जुड़े तमाम गंभीर मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। खास तौर पर कठुआ जिले के जसरोटिया विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले विधायक राजीव जसरोटिया ने कई तीखे सवाल उठाए, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
बिजली दरों में बढ़ोतरी और जनता का आक्रोश
सत्र के पहले दिन सबसे गरमाया हुआ मुद्दा बिजली दरों में हाल ही में की गई बढ़ोतरी का रहा। आम आदमी से लेकर उद्योग जगत तक, हर कोई बढ़ी हुई बिजली दरों से त्रस्त है। इसी दर्द को सदन की पटल पर रखते हुए विधायक राजीव जसरोटिया ने सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक तरफ आम जनता महंगाई की मार झेल रही है, वहीं दूसरी तरफ आवश्यक सेवाओं जैसे बिजली के दामों में मनमाने ढंग से इजाफा कर दिया गया है।
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित होती नजर आ रही है। बिजली के बढ़ते दामों ने आम आदमी के मासिक बजट को बिगाड़ कर रख दिया है और सरकार इस पर कोई भी राहत देने को तैयार नहीं है। सदन में इस मुद्दे के उठने के बाद से ही राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी तूल पकड़ सकता है.
कर्मचारी वर्ग का संघर्ष और विधानसभा में गूंज
सत्र के दौरान केवल बिजली ही नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का मुद्दा भी प्रमुखता से छाया रहा। जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय से आंदोलित चल रहे कर्मचारी वर्गों की आवाज अब विधानसभा के अंदर तक पहुंच चुकी है। विधायक ने विशेष रूप से निम्नलिखित श्रेणियों के कर्मचारियों के हितों का हवाला दिया:
- दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी (Daily Wagers): जो अपनी सेवा शर्तों और नियमितीकरण (Regularization) के लिए सालों से संघर्ष कर रहे हैं।
- एनएचएम (NHM) कर्मचारी: स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारी जो अपनी लंबित मांगों को लेकर लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं।
- आउटसोर्स कर्मचारी: निजी एजेंसियों के माध्यम से सरकारी विभागों में काम करने वाले वे कामगार जिन्हें आज भी वित्तीय सुरक्षा और स्थायित्व का इंतजार है।
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ता: समाज के जमीनी स्तर पर पोषण और स्वास्थ्य योजनाओं को लागू करने वाली महिला कार्यकर्ता, जिनकी विभिन्न मांगें लंबे समय से अनसुनी की जा रही हैं।
मूकदर्शक बनी सरकार और बढ़ता असंतोष
सदन के भीतर यह आरोप लगाया गया कि लगातार कर्मचारी वर्ग अपने विभागों में अपने हकों की लड़ाई लड़ रहा है, प्रदर्शन कर रहा है, धरने दे रहा है, लेकिन वर्तमान सरकार इस पर पूरी तरह से मूकदर्शक बनी हुई है। कर्मचारियों की सेवा शर्तों को सुधारने के बजाय उन्हें केवल आश्वासन मिल रहे हैं, जिसके कारण ज़मीन पर भारी असंतोष व्याप्त है।
विधायक ने सरकार से स्पष्ट मांग की कि वह इन तमाम मुद्दों पर अपनी स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट करे। केवल कागजी वादों से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर कर्मचारियों के कल्याण के लिए ठोस कदम उठाने ही होंगे।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन और सदन में गूंज
विधानसभा सत्र के ठीक पहले और सत्र के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगों को लेकर भी जमकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। ये कार्यकर्ताएं मानदेय बढ़ाने और अपनी अन्य व्यावसायिक व सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मांगों को लेकर लगातार मुखर हैं। विधानसभा के पहले ही दिन इन मुद्दों के सदन में गूंजने से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में सरकार के लिए विपक्ष के सवालों का जवाब देना आसान नहीं होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्र के पहले दिन ही इन तमाम मुद्दों (कर्मचारियों, कामगारों, बिजली दरों और स्वास्थ्य कर्मियों) का एक साथ उठना इस बात का संकेत है कि विपक्ष इस बार सरकार को किसी भी मोर्चे पर आसानी से छूट देने के मूड में नहीं है। जनता से जुड़े ये बुनियादी सवाल अब केंद्र में आ चुके हैं और आने वाली बहसों की दिशा तय करेंगे।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का यह मौजूदा सत्र जनता की उम्मीदों और कर्मचारियों के भविष्य के लिहाज से बेहद अहम साबित होने जा रहा है। एक तरफ जहां सरकार के पास अपनी उपलब्धियां गिनाने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के तीखे तेवर और कर्मचारियों का सड़क से लेकर सदन तक का संघर्ष सरकार की कार्यप्रणाली पर लगातार सवालिया निशान लगा रहा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले सत्र के दिनों में सरकार इन गंभीर मुद्दों पर क्या आधिकारिक और संतोषजनक जवाब देती है।