हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध योग गुरु स्वामी रामदेव के पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। देश की आंतरिक सुरक्षा मामलों को देखने वाले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के उन सभी 34 स्वीकृत पदों को औपचारिक रूप से समाप्त करने का निर्देश जारी कर दिया है, जो इस विशेष औद्योगिक परिसर की सुरक्षा के लिए तय किए गए थे।
यह फैसला कोई अचानक लिया गया कदम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबी प्रक्रिया और महीनों पहले लिए गए निर्णयों की कड़ियां जुड़ी हुई हैं। आधिकारिक दस्तावेजों और रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय सुरक्षा बल ने इस वर्ष 4 मई को ही पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क के परिसर से अपनी सुरक्षा टुकड़ी को पूरी तरह से हटा लिया था। अब गृह मंत्रालय के इस ताज़ा आदेश के बाद उन पदों को भी कागजों और रिकॉर्ड से हमेशा के लिए हटा दिया गया है, जो इस सुरक्षा विंग की आधिकारिक संख्या का हिस्सा हुआ करते थे।किन पदों को किया गया है समाप्त?
मंत्रालय की ओर से जारी किए गए इस निर्देश में सुरक्षा विंग के पूरे ढांचे का जिक्र किया गया है, जिसे अब भंग कर दिया गया है। इस विंग की मौजूदा स्वीकृत संख्या में विभिन्न रैंक के कुल 34 पद शामिल थे, जो अब इतिहास बन चुके हैं। इन पदों का विवरण इस प्रकार है:
- असिस्टेंट कमांडेंट: 1 पद
- सब-इंस्पेक्टर (SI): 4 पद
- असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI): 2 पद
- हेड कांस्टेबल: 11 पद
- कांस्टेबल: 16 पद
इन सभी 34 पदों के खत्म होने के साथ ही गृह मंत्रालय ने बकाया भुगतान (Dues Payment) को लेकर भी स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं, ताकि प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरी तरह से अंतिम रूप दिया जा सके।
साल 2015 में क्यों तैनात हुई थी CISF?
इस पूरी तैनाती के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि यह सुरक्षा यूं ही नहीं दी गई थी। इसके पीछे एक गंभीर घटना और कानून-व्यवस्था का मामला जुड़ा था। जून 2015 से सीआईएसएफ की एक विशेष टुकड़ी पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क को सुरक्षा कवच प्रदान कर रही थी।
उस समय यह भारी-भरकम तैनाती तब अनिवार्य हो गई थी जब इस कंपनी के निजी सुरक्षा गार्डों और स्थानीय ट्रक यूनियन के समर्थकों के बीच किसी बात को लेकर भयंकर हिंसक झड़प हो गई थी। इस अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण झड़प में एक व्यक्ति की जान चली गई थी, जिसके बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया था। स्थिति की नजाकत को देखते हुए और औद्योगिक परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया था और वहां सीआईएसएफ को तैनात करने का बड़ा फैसला लिया गया था।
सुरक्षा हटने के बाद अब क्या है स्थिति?
लगभग एक दशक तक केंद्रीय सुरक्षा बल के साये में रहने के बाद इस साल मई के महीने में सुरक्षा बलों को वहां से हटा लिया गया था। अब गृह मंत्रालय के ताजा आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार अब इस विशिष्ट औद्योगिक इकाई की सुरक्षा के लिए किसी भी केंद्रीय बल के संसाधनों को आवंटित करने के पक्ष में नहीं है।
औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील परिसरों में जब स्थिति सामान्य हो जाती है और स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था संभालने में पूरी तरह सक्षम हो जाता है, तो केंद्रीय बलों को वापस बुलाना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है। हालांकि, इतने लंबे समय के बाद पदों का पूरी तरह से खत्म होना और बकाया भुगतानों का हिसाब-किताब करना यह संकेत देता है कि इस अध्याय का अब पूरी तरह से समापन हो चुका है।
स्थानीय और व्यावसायिक हलकों में चर्चा
हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र में स्थित पतंजलि का यह मेगा फूड पार्क देश के सबसे बड़े फूड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में गिना जाता है। यहां रोजाना हजारों की संख्या में कर्मचारी, श्रमिक और आगंतुक आते हैं। जब यहां केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात था, तो इसकी सुरक्षा का स्तर एक अलग ही श्रेणी का माना जाता था।
अब जबकि सीआईएसएफ की पूरी उपस्थिति और उससे जुड़े तमाम पद आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिए गए हैं, तो कंपनी अपनी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय पुलिस तंत्र के जरिए ही परिसर की निगरानी और सुरक्षा को संभाल रही है। गृह मंत्रालय के इस कदम पर देश भर के औद्योगिक और प्रशासनिक गलियारों में बारीक नजर रखी जा रही है, क्योंकि यह देश के निजी संस्थानों में केंद्रीय बलों की तैनाती और उनकी वापसी के नियमों से जुड़ा एक अहम मामला है।