स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक ऐसा ऐतिहासिक आयोजन हुआ, जिसने हर भारतीय के सीने को गर्व से चौड़ा कर दिया। मौका था काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं वर्षगांठ का। इस शताब्दी समारोह में शिरकत करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के उन अमर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने हंसते-हंसते अंग्रेजों के फंदे को चूम लिया था। सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा कि यह घटना महज़ एक वाकया नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान, वीरता और अटूट देशभक्ति का सबसे स्वर्णिम अध्याय है।
शहीदों के परिवारों का हुआ सम्मान और जारी हुईं खास पुस्तिकाएं
इस भव्य कार्यक्रम की शुरुआत बेहद भावनात्मक माहौल में हुई। देश की रक्षा और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारियों और वीर सैनिकों के परिजनों को इस मंच से सम्मानित किया गया। उनके संघर्ष को सलाम करते हुए दो विशेष पुस्तिकाओं—'वंदे मातरम' और 'काकोरी ट्रेन एक्शन' का विमोचन भी किया गया।
- वंदे मातरम: यह विशेष पुस्तिका स्कूली बच्चों की कला और पेंटिंग पर आधारित है।
- काकोरी ट्रेन एक्शन: इसमें आधिकारिक रिकॉर्ड और अमर शहीदों के जीवन से जुड़ी दुर्लभ जानकारियां शामिल की गई हैं।
'अंग्रेजों की भाषा बोलते थे देश के हुक्मरान' - CM योगी का तीखा हमला
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अतीत के पन्नों को पलटा और पिछली सरकारों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने तो इस घटना को 'डकैती' कहा ही था, लेकिन दुख की बात यह है कि स्वतंत्र भारत की सत्ता संभालने वालों ने भी अंग्रेजों के एजेंडे को आगे बढ़ाया और इसे 'काकोरी डकैती कांड' का नाम दिया।
योगी ने कड़े शब्दों में कहा, "जिन लोगों ने देश की युवा पीढ़ी को उनके असली नायकों और क्रांतिकारियों के इतिहास से दूर रखा, उन्होंने भारत के भविष्य के साथ सबसे बड़ा अन्याय किया है।" उन्होंने यहां तक जिक्र किया कि लखनऊ के ही कुछ राजनीतिक नेताओं ने उस दौर में वकालत करते हुए हमारे कई क्रांतिकारियों को आजीवन कारावास की सजा दिलवाने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
आखिर क्या था वह ऐतिहासिक 'काकोरी ट्रेन एक्शन'?
यह कहानी है 9 अगस्त 1925 की, जब लखनऊ के पास काकोरी में एक ऐसा दुस्साहसिक कदम उठाया गया जिससे अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिल गई थी। 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) के वीर क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के ही खजाने से हथियार खरीदने की एक मास्टरप्लान योजना बनाई थी।
राम प्रसाद 'बिस्मिल', अशफाक उल्ला खान, ठाकुर रोशन सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे महान क्रांतिकारियों के नेतृत्व में शाहजहांपुर से लखनऊ आ रही ट्रेन को काकोरी के पास रोका गया और सरकारी खजाना अपने कब्जे में लिया गया। इस घटना के बाद ब्रिटिश सरकार ने दमन चक्र चलाया और दिसंबर 1927 में देश के इन महानायकों को अलग-अलग जेलों में फांसी के फंदे पर लटका दिया गया, लेकिन उनके हौसले को कभी झुकाया नहीं जा सका।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: काकोरी ट्रेन एक्शन कब हुआ था?
उत्तर: काकोरी ट्रेन एक्शन 9 अगस्त 1925 को उत्तर प्रदेश में लखनऊ के पास अंजाम दिया गया था।
Q2: इसे 'कांड' क्यों नहीं कहा जाना चाहिए?
उत्तर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और इतिहासकारों के अनुसार, यह देश की आजादी के लिए क्रांतिकारियों द्वारा उठाया गया एक राजनीतिक और स्वाभिमानी कदम था, जिसे अंग्रेजों ने दुर्भावना वश 'डकैती' का नाम दिया था।
Q3: इस घटना से कौन से प्रमुख क्रांतिकारी जुड़े थे?
उत्तर: इस ऐतिहासिक घटना से राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, ठाकुर रोशन सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे महान क्रांतिकारी जुड़े थे।