अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सुरक्षा को लेकर हाल ही में सामने आई एक बड़ी घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई (Flydubai) की उड़ान के दौरान कॉकपिट में एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी। इस खतरनाक परिस्थिति में भारतीय कैप्टन स्मित ने अपनी सूझबूझ और अदम्य साहस का परिचय देते हुए 174 यात्रियों की जान बचाई। उनकी इस बहादुरी की गूंज इस समय देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। इस घटना के बाद से विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल को लेकर समीक्षा तेज हो गई है।
इस बीच, इस अंतरराष्ट्रीय घटना का असर और इससे जुड़े सबक अब क्षेत्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गए हैं। बिहार के दरभंगा एयरपोर्ट और इसके आसपास के इलाकों में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर नए सिरे से मंथन शुरू हो गया है। हालांकि एयरपोर्ट के अंदरूनी हिस्से में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के कड़े पहरे और सख्त इंतजाम हैं, लेकिन मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर यानी बाहरी परिसर और मुख्य सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
दरभंगा-जयनगर मुख्य सड़क पर सुरक्षा का जिम्मा और चुनौतियां
दरभंगा एयरपोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर का नजारा आम दिनों में काफी व्यस्त रहता है। यहाँ दिनभर यात्रियों और उनके स्वजनों की भारी आवाजाही बनी रहती है। विमानों के आगमन और प्रस्थान के समय तो यह भीड़ और भी ज्यादा बढ़ जाती है। एयरपोर्ट के ठीक बाहर दरभंगा-जयनगर मुख्य सड़क गुजरती है, जिसके आसपास चाय, समोसा और खान-पान की कई छोटी-मोटी दुकानें संचालित होती हैं।
अक्सर देखा जाता है कि फ्लाइट में देरी होने की स्थिति में यात्री और उनके साथ आए परिजन भारी-भरकम सामान के साथ इन्हीं दुकानों के आसपास वक्त गुजारते हैं। इसके अलावा, विमान से उतरने वाले यात्री भी अपना कीमती सामान और बैग लेकर पैदल ही मुख्य सड़क की तरफ बढ़ते हैं। इन यात्रियों में देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले वीवीआईपी लोग और कई बार विदेशी नागरिक भी शामिल होते हैं। ऐसे में मुख्य सड़क पर सुरक्षा का कोई पुख्ता और मजबूत घेरा न होना एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है.
पुलिस गश्त की कमी और स्थानीय लोगों की चिंताएं
स्थानीय नागरिकों और नियमित यात्रा करने वाले लोगों का कहना है कि एयरपोर्ट और उसके आसपास के क्षेत्र में जिस तेजी से आवाजाही और भीड़ बढ़ रही है, उस अनुपात में पुलिस की सक्रियता नजर नहीं आती है। लोगों का दावा है कि दिनभर में बमुश्किल एक या दो बार पुलिस का गश्ती वाहन इस मार्ग से गुजरता है। इसके बाद लंबे समय तक मुख्य सड़क और आसपास के इलाकों में पुलिस की कोई खास मौजूदगी नहीं दिखती।
इस इलाके की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इसके बेहद करीब ही बस स्टैंड का क्षेत्र भी स्थित है। बस स्टैंड के पार्किंग ठेके और वर्चस्व को लेकर अतीत में कई बार हिंसक झड़पें और गोलीबारी की घटनाएं भी यहाँ घट चुकी हैं। यात्रियों के पास कीमती मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैग और अन्य जरूरी सामान होने के कारण इस भीड़-भाड़ वाले इलाके में अपराधियों के सक्रिय होने का खतरा हमेशा बना रहता है।
पूर्व की घटनाएं और यात्रियों के कड़वे अनुभव
- एयरपोर्ट से सफर करने वाले कई यात्रियों के सामान और मोबाइल चोरी होने की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं।
- इन वारदातों की जानकारी स्थानीय पुलिस प्रशासन को भी बखूबी है, बावजूद इसके जमीनी स्तर पर सुरक्षा के हालात जस के तस बने हुए हैं।
- मुख्यालय स्तर से मिलने वाले सुरक्षा निर्देशों का मैदानी स्तर पर पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा है, जिससे आम जनता में नाराजगी है।
- यात्रियों और उनके परिजनों का मानना है कि केवल एयरपोर्ट की चारदीवारी के भीतर सुरक्षा काफी नहीं है, जब तक बाहर का रास्ता सुरक्षित न हो।
विमान के अंदर से लेकर बाहर तक सतर्कता की जरूरत
दुबई की फ्लाइट वाली घटना ने हमें यह सिखाया है कि विमानन सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही कितनी भारी पड़ सकती है। हालांकि वह मामला आसमान में कॉकपिट के भीतर का था, लेकिन दरभंगा एयरपोर्ट के बाहर की परिस्थितियां जमीन पर एक अलग किस्म की चुनौती पेश कर रही हैं। यहाँ मूल सवाल सिर्फ हवाई जहाज की सुरक्षा का नहीं, बल्कि उससे कहीं ज्यादा यात्रियों के सुरक्षित तरीके से एयरपोर्ट तक पहुँचने और सफर के बाद वहाँ से बाहर निकलने का है।
यात्री संघों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि उड़ानों के आने-जाने के निर्धारित समय के अनुसार मुख्य सड़क पर पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई जानी चाहिए। उनकी मांग है कि एयरपोर्ट के बाहरी क्षेत्र में नियमित और सघन पुलिस गश्त की व्यवस्था हो, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
प्रशासन का पक्ष और उठाए जा रहे कदम
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दरभंगा के एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने स्पष्ट किया है कि बाहरी परिसर की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह गंभीर है और लगातार सघन गश्त की जा रही है। उन्होंने बताया कि सीआईएसएफ के साथ बेहतर तालमेल और समन्वय बिठाकर सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जा रही है।
एसएसपी ने यह भी आश्वस्त किया कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक न रह जाए, इसके लिए समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निरीक्षण भी किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर प्रयासों के बावजूद, धरातल पर आम जनता और यात्रियों का यह मानना है कि सुरक्षा के इन दावों को और अधिक मजबूत और दृश्यमान बनाने की आवश्यकता है, ताकि हर यात्री बिना किसी डर के अपने सफर को पूरा कर सके।