देहरादून के शिक्षण संस्थानों में चुनावी सरगर्मी और राजनीतिक पारा अपने चरम पर है। शहर के दो प्रमुख महाविद्यालयों—डीएवी पीजी कॉलेज और डीबीएस पीजी कॉलेज—के छात्रसंघ चुनाव के परिणाम सामने आ चुके हैं, जिन्होंने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि युवा राजनीति में मुकाबला कितना दिलचस्प और कांटे का होता है। एक तरफ जहां डीएवी कॉलेज में भगवा का परचम एक बार फिर लहराया है, वहीं दूसरी तरफ डीबीएस कॉलेज में एनएसयूआई ने जोरदार वापसी करते हुए अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया है। इन नतीजों ने राज्य की सियासत में भी हलचल तेज कर दी है, क्योंकि छात्र संघ चुनावों को आगामी राजनीतिक भविष्य की नर्सरी माना जाता है।
डीएवी पीजी कॉलेज: कड़े मुकाबले के बीच अभाविप ने फिर मारी बाजी
उत्तराखंड की राजधानी के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित डीएवी पीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं। भारी गहमागहमी और हंगामे के बीच हुए मतदान के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के उम्मीदवार नवदीप राणा ने अध्यक्ष पद पर शानदार जीत दर्ज की है। नवदीप राणा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एनएसयूआई के सौरभ सेमवाल को 94 मतों के अंतर से शिकस्त दी।
अध्यक्ष पद के लिए इस बार त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबला देखने को मिला, जिसमें कुल चार उम्मीदवार मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे थे। मतगणना के दौरान शुरुआती रुझानों से ही दोनों मुख्य संगठनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। आर्यन छात्र संगठन के अमित सिंह तीसरे स्थान पर रहे, जबकि 'वायस आफ स्टूडेंट्स' की तान्या को मात्र 36 वोट ही मिल सके। कुल 28 प्रत्याशियों ने इस चुनाव के विभिन्न पदों के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी, जिससे चुनावी माहौल काफी गर्म था।
अन्य पदों पर किसने मारी बाजी?
डीएवी कॉलेज के अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी छात्र नेताओं ने अपनी जीत का परचम लहराया। उपाध्यक्ष पद पर एसएफआइ के शैलेंद्र सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी हर्ष रावल को एक बड़े अंतर यानी 785 मतों से करारी शिकस्त दी। वहीं, सचिव पद के कड़े मुकाबले में निर्दलीय उम्मीदवार नीलांश ने सत्यम शिवम छात्र संगठन के दीपक राणा को 402 वोटों से पराजित किया।
सह-सचिव (छात्रा आरक्षित) के पद पर अनुष्का ठाकुर ने बाजी मारी, उन्होंने अनुष्का नौटियाल को 306 मतों के अंतर से हराया। कोषाध्यक्ष पद पर अंजलि भट्ट ने अपनी प्रतिद्वंद्वी अनुष्का को 423 मतों के भारी अंतर से मात दी। इसके अलावा, विश्वविद्यालय प्रतिनिधि (यूआर) के पद पर अनुज डोभाल ने 158 मतों के अंतर से जीत हासिल की। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. कौशल कुमार ने खेलकूद, एनसीसी और रेंजर-रोवर गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मनोनीत कार्यकारिणी सदस्य के रूप में नियुक्त किया है।
डीबीएस पीजी कॉलेज: एनएसयूआई के हाथ आई कमान, अभिनव बने अध्यक्ष
एक तरफ जहां डीएवी में अभाविप ने अपना दबदबा कायम रखा, वहीं डीबीएस पीजी कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव के परिणाम इसके बिल्कुल विपरीत रहे। यहां छात्रसंघ की कमान मुख्य रूप से एनएसयूआई के हाथों में आई है। अध्यक्ष पद के लिए हुए कड़े मुकाबले में एनएसयूआई के अभिनव कफलिया ने अभाविप के अभिषेक नेगी को 94 मतों के अंतर से हराकर जीत का स्वाद चखा।
डीबीएस कॉलेज में अध्यक्ष पद के लिए दोनों प्रमुख राष्ट्रीय संगठनों के बीच सीधा और बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जिसमें अंततः अभिनव कफलिया ने बाजी मार ली। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार सौरभ निर्वाचित हुए, जिन्होंने अभाविप के आदित्य उपाध्याय को 66 मतों से हराया। महासचिव पद पर एनएसयूआई समर्थित देवाशीष ने जीत दर्ज की और उन्होंने श्रुति नौटियाल को 131 मतों से पीछे छोड़ दिया।
डीबीएस में अन्य पदों के परिणाम
- छात्रा आरक्षित संयुक्त सचिव: आर्यन छात्र संगठन की चांदनी राणा विजयी रहीं, जिन्होंने पलक सिंह को 42 मतों से हराया।
- कोषाध्यक्ष: एनएसयूआई की आरती नेगी ने इस पद पर जीत हासिल की।
- विश्वविद्यालय प्रतिनिधि (यूआर): अभाविप के खाते में यह पद गया, जहां ईशा ने जीत दर्ज की।
- कार्यकारिणी सदस्य: इस कॉलेज में चार पदों पर आर्यन छात्र संगठन के प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे, जिनमें श्रीशांत चमोली, अखिल रावत, अनुष्का रावत और प्रीति बंगवाल शामिल हैं।
विवाद और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
चुनाव प्रक्रिया के दौरान दोनों ही कॉलेजों में भारी उत्साह के साथ-साथ तनाव का माहौल भी देखने को मिला। मतदान और मतगणना के दौरान कई मौकों पर मामूली झड़प और हंगामे की स्थिति बनी। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन को कड़ी मशकूर करनी पड़ी। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
जैसे ही चुनाव परिणाम घोषित हुए, विजयी प्रत्याशियों के समर्थकों ने कॉलेज परिसरों को ढول-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ गूंजा दिया। छात्र नेताओं को फूल-मालाओं से लाद दिया गया और हवा मेंी गुलाल उड़ाकर जश्न मनाया गया। हालांकि, इस चुनावी शोरगुल के बीच अब छात्रों की निगाहें नवनिर्वाचित छात्रसंघ पदाधिकारियों पर टिकी हैं, जो कॉलेज परिसर में विकास कार्यों और छात्रों की समस्याओं के समाधान का वादा कर सत्ता में आए हैं।