छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से इस वक्त की एक बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। जिले की जीवनदायिनी कहे जाने वाली महानदी के किनारे बसे तमाम गांवों में जिला प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे जलस्तर और बांध की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने बड़ा कदम उठाया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गंगरेल बांध के तीन गेट खोल दिए गए हैं, जिसके बाद से नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर की ओर आ रहा है।
गंगरेल बांध से पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन मुस्तैद
धमतरी जिले का प्रमुख और विशाल गंगरेल बांध एक बार फिर से अपनी पूरी क्षमता के साथ चर्चा में है। जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, कैचमेंट एरिया में हो रही लगातार गतिविधियों और पानी की आवक को नियंत्रित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। बांध के तीन बड़े गेट खोले जाने से महानदी के निचले इलाकों में पानी का बहाव काफी तेज हो गया है।
प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अपनी कमर कस ली है। नदी के आसपास के इलाकों में लगातार मुनादी कराई जा रही है ताकि आम नागरिक और पशुपालक नदी के करीब जाने से बचें। स्थानीय प्रशासन की टीमें मैदानी इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं और स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं।
महानदी किनारे बसे इन गांवों के लिए विशेष चेतावनी
गंगरेल बांध के गेट खुलने का सीधा असर महानदी के तटवर्ती और मैदानी इलाकों पर पड़ रहा है। धमतरी जिले के दर्जनों ऐसे गांव हैं जो नदी के बेहद करीब बसे हैं। इन सभी बस्तियों और बलोदाबाजार, रायपुर तथा आगे की तरफ जाने वाले तटीय क्षेत्रों में विशेष चौकसी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
- नदी के जलस्तर में अचानक भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
- मछुआरों और नाविकों को पूरी तरह से नदी में उतरने से मना कर दिया गया है।
- तट के पास बनी कच्ची बस्तियों और खेतों की तरफ जाने वाले रास्तों पर नजर रखी जा रही है।
- मवेशियों को पानी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रखने की अपील की गई है।
अधिकारियों की अपील: घबराएं नहीं, सतर्क रहें
स्थिति की नजाकत को भांपते हुए जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और हर स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए है। हालांकि, प्रकृति के आगे एहतियात बरतना सबसे बड़ा बचाव है, इसलिए लोगों से सहयोग की विशेष अपेक्षा की जा रही है।
जल संसाधन विभाग के इंजीनियर लगातार 24 घंटे बांध के जलस्तर और उसके डिस्चार्ज की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मौसम के बदलते मिजाज और ऊपर के इलाकों से आ रहे पानी के फ्लो को देखते हुए आने वाले घंटों में गेटों की संख्या घटाई या बढ़ाई जा सकती है, जिसका निर्णय पूरी तरह से लाइव डेटा के आधार पर लिया जाएगा।
सुरक्षा उपायों के तहत कंट्रोल रूम सक्रिय
किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटने के लिए जिला मुख्यालय पर एक विशेष बाढ़ नियंत्रण कक्ष (Control Room) स्थापित कर दिया गया है। यदि किसी भी गांव में पानी भरने की आशंका हो या किसी को मदद की जरूरत हो, तो वे सीधे इस कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। आपदा प्रबंधन की टीमें भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं और रबर बोट्स तथा अन्य बचाव उपकरणों के साथ तैयार रखी गई हैं।
आम जनता से पुनः अनुरोध है कि वे अगले कुछ दिनों तक महानदी के घाटों, पुल-पुलियों और डूब क्षेत्र वाले इलाकों का रुख बिल्कुल न करें। यह समय रोमांच दिखाने का नहीं, बल्कि पूरी संवेदनशीलता और सावधानी के साथ सुरक्षा नियमों का पालन करने का है।