वाराणसी में हर साल बारिश के मौसम में और गंगा-वरुणा के बढ़ते जलस्तर के कारण उत्पन्न होने वाली जलभराव की गंभीर समस्या से स्थायी रूप से निजात पाने के लिए नगर निगम ने कमर कस ली है। इस बार केवल तात्कालिक राहत देने के बजाय दीर्घकालिक और तकनीकी रूप से मजबूत समाधानों पर जोर दिया जा रहा है, ताकि शहर के निचले और नवविस्तारित इलाकों में रहने वाले नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। नगर निगम प्रशासन की यह कवायद न केवल मौजूदा मानसून सत्र को ध्यान में रखकर है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए एक सुरक्षित शहरी जल निकासी तंत्र (Drainage System) तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
वरुणा नदी के तटवर्ती इलाकों में बनेंगे फ्लड पिलर
बारिश के दिनों में वरुणा नदी का जलस्तर बढ़ने पर अक्सर यह देखा जाता है कि मुख्य सीवर लाइनों के जरिए पानी विपरीत दिशा में यानी शहर की तरफ बहने लगता है, जिसे 'बैकफ्लो' कहा जाता है। इस बैकफ्लो के कारण न केवल सीवर का गंदा पानी सड़कों और गलियों में भर जाता है, बल्कि यह आम जनजीवन के लिए स्वास्थ्य संकट भी पैदा करता है। इस गंभीर समस्या का स्थायी तोड़ निकालते हुए नगर निगम ने वरुणा नदी के तटवर्ती संवेदनशील इलाकों में फ्लड पिलर बनाने का निर्णय लिया है। इन पिलर्स और विशेष संरचनाओं की मदद से बाढ़ के समय सीवर के पानी को शहर की ओर आने से प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।
विवेका नगर का कच्चा नाला बनेगा पक्का, अस्सी नाले से होगी कनेक्टिविटी
हाल ही में प्रशासनिक दौरों के दौरान नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों ने नवविस्तारित क्षेत्रों और कई वार्डों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान चितईपुर स्थित विवेका नगर कॉलोनी में एक बड़े कच्चे नाले की बदहाली सामने आई। इस कच्चे नाले की उपेक्षा के कारण पंचकोशी, सुसुवाही और वैष्णो नगर जैसे बड़े इलाकों का बारिश का पानी सही से निकल नहीं पाता था। इस नाले में झाड़ियों और भारी मात्रा में कचरे के जम जाने से पानी का प्राकृतिक बहाव पूरी तरह अवरुद्ध हो गया था।
इसे गंभीरता से लेते हुए नगर आयुक्त ने तुरंत प्रभाव से विवेका नगर के इस कच्चे नाले को पक्का करने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस नाले को आधुनिक तकनीक से संवारकर सीधे अस्सी नाले से जोड़ा जाएगा, ताकि इन सभी कॉलोनियों का गंदा और बरसाती पानी बिना किसी रुकावट के मुख्य नाले तक पहुंच सके।
तीन प्रमुख इलाकों में बिछाई जाएंगी नई ड्रेनेज पाइपलाइन
शहर के कुछ हिस्से ऐसे हैं जहाँ भौगोलिक स्थिति या पुरानी बसावट के कारण जलभराव की समस्या विकराल रूप ले लेती है। इस चुनौती से पार पाने के लिए अमरा, बरसोहा और सुरभि नगर जैसे क्षेत्रों में नई ड्रेनेज पाइपलाइन बिछाए जाने की योजना पर मुहर लग चुकी है। संबंधित अभियंताओं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे उन सभी छोटे-बड़े स्थानों को चिन्हित करें जहाँ ज़रा सी बारिश में पानी जमा हो जाता है। इन स्थानों पर जरूरत के हिसाब से नई और बड़े व्यास की पाइपलाइनें डाली जाएंगी ताकि जल निकासी की उचित और निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके।
85 शक्तिशाली पंपों की तैनाती और चौबीस घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम
बारिश के दौरान आपात स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम ने अपनी मशीनरी को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया है। शहर के निचले और जलभराव के प्रति संवेदनशील इलाकों में कुल 85 शक्तिशाली पंपों को तैनात किया गया है। इन पंपों के नियमित संचालन और ईंधन आपूर्ति की निगरानी के लिए एक दैनिक रिपोर्टिंग सिस्टम तैयार किया गया है। इसके अलावा, नागरिकों की शिकायतों को तत्काल सुनने और उनका मौके पर ही निस्तारण करने के लिए चौबीस घंटे (24x7) सक्रिय रहने वाले एक विशेष कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है।
- गली पिट की सफाई: सड़कों के किनारे बने गली पिट (Gully Pits) में बहकर आने वाला पॉलीथीन और कचरा अक्सर ड्रेनेज को जाम कर देता है। इसकी नियमित सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
- जवाबदेही तय: गली पिट की सफाई या जल निकासी में किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर संबंधित सहायक अभियंता (AE) और अवर अभियंता (JE) की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
- एंटी लार्वा छिड़काव: जमे हुए पानी के कारण पनपने वाले मच्छरों और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए युद्धस्तर पर एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है।
बीएचयू और लंका क्षेत्र में स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) अस्पताल परिसर और उससे सटे लंका क्षेत्र में जलभराव एक पुरानी और बड़ी समस्या रही है। इस समस्या के स्थायी और वैज्ञानिक समाधान के लिए बीएचयू प्रशासन के साथ मिलकर एक वृहद 'स्टॉर्म वाटर योजना' (Storm Water Scheme) पर काम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत सीएंडडीएस (C&DS) से प्रस्तावित नाले की विस्तृत ड्राइंग और डिजाइन मांगी गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का मानना है कि जिस प्रकार तेलियाबाग मार्ग पर जलभराव की समस्या का सफल समाधान निकाला गया था, उसी तर्ज पर बीएचयू और लंका क्षेत्र को भी जलभराव मुक्त बनाया जाएगा।
प्रशासन के इन समन्वित और दूरदर्शी प्रयासों से उम्मीद की जा रही है कि इस बार बनारस के नागरिकों को जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलेगी, और शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य की किसी भी प्राकृतिक चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम हो सकेगा।