धौलपुर की सड़कों पर शुक्रवार को राजनीतिक पारा उस समय सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोला। जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने सीधे तौर पर देश की सर्वोच्च चुनावी संस्था की निष्पक्षता पर सवालिया निशान खड़े किए। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इस हद तक बढ़ गया था कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
लोकतंत्र की हत्या का लगाया आरोप, पुतला फूंककर जताया आक्रोश
शुक्रवार को आयोजित इस प्रदर्शन का केंद्र बिंदु निर्वाचन आयोग के भीतर हाल ही में उठे कथित अंदरूनी विवाद रहे। विरोध प्रदर्शन की अध्यक्षता कर रहे कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष साकेत बिहारी शर्मा ने मीडिया और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एक बेहद सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि देश के निर्वाचन आयोग के भीतर से ऐसे खुलासे सामने आ रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव को हिलाकर रख देने के लिए काफी हैं।
साकेत बिहारी शर्मा ने आरोप लगाया कि पिछले 10 महीनों की अवधि के दौरान आयोग के दो निर्वाचन आयुक्तों—सुखवीर सिंह संधू और विवेक जोशी—द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कई निर्णयों पर कड़ी आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी हैं। इन दोनों आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए गए कथित एकतरफा फैसलों के खिलाफ कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से अपनी असहमति जताई है।
देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की उठी मांग
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण आंतरिक मतभेदों और आपत्तियों के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त कथित तौर पर मनमाने और तानाशाही तरीके से फैसले ले रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने यहाँ तक कह दिया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले ऐसे कृत्यों के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
"देश का निर्वाचन आयोग निष्पक्षता का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन जब अंदर से ही एकतरफा फैसले लिए जाने और आपत्तियों को दरकिनार किए जाने की खबरें आती हैं, तो लोकतंत्र के भविष्य पर गंभीर संकट मंडराने लगता है।" - स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी और विरोध का तरीका
इस विरोध प्रदर्शन में केवल स्थानीय स्तर के कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कई दिग्गज पदाधिकारी भी विशेष रूप से शामिल हुए। प्रदर्शन स्थल पर पार्टी की एकजुटता और आक्रामक तेवर साफ तौर पर देखे जा सकते थे।
- धर्मेंद्र शर्मा: सचिव, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी
- अमित मुदगल: सचिव, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी
- अविनाश शास्त्री: उपाध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी
- रामेंद्र सिंह मीणा: बाड़ी ब्लॉक अध्यक्ष
- पंकज तिवारी: प्रदेश महासचिव, एनएसयूआई
पूरे कार्यक्रम का संचालन जिला प्रवक्ता धनेश जैन द्वारा बहुत ही संयोजित तरीके से किया गया। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस बल भी मौके पर मुस्तैद रहा। कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के आसपास नारेबाजी करते हुए अपने गुस्से का इजहार किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने की बात भी कही।
राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज
धौलपुर में हुए इस प्रदर्शन ने राजस्थान की सियासत में एक बार फिर से उबाल ला दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह के गंभीर आरोप लगाना और देशद्रोह की मांग करना राष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि इस मामले पर विपक्षी दलों की क्या रणनीति रहती है और क्या आयोग की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।
फिलहाल, धौलपुर का यह विरोध प्रदर्शन स्थानीय राजनीति का सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है और हर कोई इस अंदरूनी विवाद के नतीजों पर अपनी नजरें टिकाए हुए है।