शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों और शिक्षकों की समस्याओं के समाधान को लेकर राजस्थान के शिक्षकों का सबसे बड़ा मंच इस बार दक्षिण राजस्थान के आदिवासी बहुल जिले में सजने जा रहा है। हम बात कर रहे हैं राजस्थान शिक्षक संघ के आगामी 63वें राज्य स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन की, जो इस साल 27 और 28 नवंबर को ऐतिहासिक नगरी डूंगरपुर में आयोजित होने जा रहा है। इस राज्य स्तरीय आयोजन को लेकर शिक्षा जगत में अभी से ही जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।
मेजबानी मिलने के बाद से युद्धस्तर पर शुरू हुई तैयारियां
डूंगरपुर जिला कमेटी को इस प्रतिष्ठित सम्मेलन की मेजबानी मिलने के बाद से ही संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों में खासा जोश है। आयोजन को ऐतिहासिक और सफल बनाने के लिए जिला स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में मंगलवार को स्थानीय राजकीय महारावल उच्च माध्यमिक विद्यालय के परिसर में जिला कमेटी की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष मणिलाल मालीवाड़ ने की, जिसमें जिले भर के तमाम दिग्गज शिक्षक नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी नवंबर माह में होने वाले इस दो दिवसीय महाकुंभ की रूपरेखा तैयार करना और विभिन्न समितियों को जिम्मेदारियां सौंपना था।
प्रदेश नेतृत्व का आह्वान- 'आपसी समन्वय से बनाएंगे सम्मेलन को ऐतिहासिक'
बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत कुमार खराड़ी ने विस्तार से जानकारी दी कि राज्य कमेटी ने इस बार डूंगरपुर जिला इकाई पर भरोसा जताते हुए आयोजन की कमान सौंपी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सामान्य सम्मेलन नहीं है, बल्कि प्रदेश भर के शिक्षकों की आवाज बुलंद करने और शिक्षा की गुणवत्ता पर मंथन करने का एक बहुत बड़ा अवसर है।
श्री खराड़ी ने जिले के सभी ब्लॉक और जिला पदाधिकारियों से अपील की कि वे आपसी सामंजस्य और पूरी सक्रियता के साथ अभी से तैयारियों में जुट जाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि डूंगरपुर जिला कमेटी अपनी मेहमाननवाजी और सांगठनिक क्षमता के दम पर इस आयोजन को अब तक के सबसे सफल सम्मेलनों में से एक बना देगी।
स्वागत समिति और अन्य उप-समितियों का हुआ गठन
किसी भी बड़े आयोजन की सफलता उसके बेहतरीन प्रबंधन पर निर्भर करती है। इसे ध्यान में रखते हुए डूंगरपुर जिला कमेटी ने व्यवस्थाओं को विकेंद्रीकृत करते हुए कई महत्वपूर्ण समितियों का गठन किया है:
- स्वागत समिति: सम्मेलन की समग्र निगरानी और आगंतुकों के स्वागत के लिए गठित इस मुख्य समिति का संयोजक प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत कुमार खराड़ी को बनाया गया है।
- वित्तीय प्रबंधन: सम्मेलन के बजट और वित्तीय लेन-देन की पारदर्शी व्यवस्था के लिए कोषाध्यक्ष के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई है।
- आवास और भोजन व्यवस्था: बाहर से आने वाले हजारों शिक्षकों के ठहरने और उनके भोजन की उत्तम व्यवस्था के लिए अलग से प्रभारियों की नियुक्ति की गई है।
- मंच सज्जा एवं प्रचार-प्रसार: कार्यक्रम स्थल को भव्य रूप देने और मीडिया व प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी भी सुयोग्य पदाधिकारियों को सौंपी गई है।
जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवीलाल गौड़ ने बैठक के दौरान सम्मेलन की विस्तृत रूपरेखा पेश की, जिस पर उपस्थित सभी सदस्यों ने गहन चर्चा की और अपनी सहमति जताई। सभी ब्लॉकों से आए प्रतिनिधियों ने एक स्वर में जिला कमेटी को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
इन प्रमुख चेहरों की रही उपस्थिति
इस विचार-विमर्श की बैठक में डूंगरपुर जिले के कोने-कोने से शिक्षक प्रतिनिधि शामिल हुए। सभा की गरिमा बढ़ाने वालों में जिला सभाध्यक्ष बाबूराम रोत, उप सभाध्यक्ष मक्षिराम फलेजा, जिला उपाध्यक्ष वासुदेव परमार, और जिला कोषाध्यक्ष कांतिलाल खराड़ी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
इसके अलावा विनोद मीणा, पुष्पा वरहात, सतीश अहारी, नारायण लाल डामोर, पुष्पेंद्र कुमार मीणा, कमलेश डामोर, गौतम लाल मनात और हेमंत डामोर सहित कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी बैठक में सक्रिय रूप से शरीक हुए। संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल संचालन जिला मंत्री धनराज खराड़ी द्वारा किया गया, जिन्होंने अंत में सभी का आभार व्यक्त किया।
शिक्षा जगत की नजरें डूंगरपुर पर
नवंबर के आखिरी सप्ताह में होने वाले इस 63वें राज्य स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन पर पूरे राजस्थान के शिक्षकों की निगाहें टिकी हुई हैं। इसमें राज्य भर से हजारों की संख्या में शिक्षक और शिक्षाविद हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के दौरान शिक्षा की मौजूदा स्थिति, शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याओं, पदोन्नति, वेतन विसंगतियों और स्कूली शिक्षा में सुधार जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर मंथन किए जाने की पूरी संभावना है।
फिलहाल, डूंगरपुर जिला प्रशासन और शिक्षक संघ के कार्यकर्ता मिलकर इस आयोजन को भव्य रूप देने के लिए दिन-रात एक करने में जुट गए हैं। आने वाले दिनों में तैयारियों का यह दायरा और अधिक व्यापक होने की उम्मीद है।