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डूंगरपुर में सियासी उलटफेर: बीएपी को बड़ा झटका, 50 कार्यकर्ता भाजपा में शामिल

डूंगरपुर में सियासी उलटफेर: बीएपी को बड़ा झटका, 50 कार्यकर्ता भाजपा में शामिल

राजस्थान के सियासी गलियारों से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जो आने वाले पंचायतीराज चुनावों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डूंगरपुर जिले के चितरी मंडल क्षेत्र में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) को तगड़ा झटका लगा है। चुनाव की सुगबुगाहट के बीच बीएपी से जुड़े लगभग 50 प्रमुख कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक राजनीति से किनारा करते हुए भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर समीकरणों को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है।

जयपुर में हुआ भव्य मिलन समारोह

मंगलवार को जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने खुद इन तमाम नवागत कार्यकर्ताओं का पार्टी का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम एक सोची-समझी रणनीति के तहत आगे बढ़ा, जिसमें एसटी मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बलवीर अहारी और भाजपा जिला महामंत्री पंकज जैन ने अहम भूमिका निभाई।

इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में ही बीएपी के ये कार्यकर्ता विशेष तौर पर डूंगरपुर से जयपुर पहुंचे थे। प्रदेश कार्यालय में हुए इस मिलन समारोह के बाद से ही सियासी पारे में उबाल आ गया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इन नए कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब उनका मुख्य उद्देश्य बूथ और वार्ड स्तर पर संगठन की जड़ों को और अधिक मजबूत करना है, ताकि आगामी पंचायतीराज चुनावों में पार्टी को अभूतपूर्व सफलता मिल सके।

क्यों बदला इन कार्यकर्ताओं ने पासा?

इस बड़े राजनीतिक फेरबदल के पीछे की मुख्य वजह बीएपी चितरी मंडल ब्लॉक सचिव सुखलाल मकवाना के नेतृत्व को माना जा रहा है। सुखलाल मकवाना खुद इस दल-बदल के केंद्र में रहे हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने मीडिया और पार्टी मंचों से खुलकर अपनी बात रखी।

सुखलाल मकवाना ने अपने बयान में कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार जिस तरह से जनजाति समाज के कल्याण के लिए समर्पित भाव से काम कर रही है, उससे वे बेहद प्रभावित थे। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि टीएसपी (Tribal Sub-Plan) क्षेत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और पदों पर जनजाति समाज के लिए आरक्षण की व्यवस्था अगर किसी ने सुनिश्चित की है, तो वह भारतीय जनता पार्टी की सरकारों की ही देन है।

बीएपी नेतृत्व पर गंभीर आरोप

पार्टी बदलने वाले इन कार्यकर्ताओं ने अपनी पुरानी पार्टी यानी बीएपी के नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सुखलाल मकवाना ने आरोप लगाया कि बीएपी के नेता लगातार समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की मौजूदा कार्यशैली, आंतरिक नीति और जिस राजनीतिक दिशा में वे आगे बढ़ रहे थे, उससे वे और उनके तमाम साथी लंबे समय से असंतुष्ट थे। समाज के विकास और क्षेत्र की प्रगति के रास्ते में यह असंतोष एक बड़ी दीवार बन रहा था, जिसके चलते उन्होंने और उनके साथियों ने बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से भाजपा के साथ जुड़ने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।

पंचायतीराज चुनाव को लेकर बढ़ी हलचल

डूंगरपुर जिले में होने वाले आगामी पंचायतीराज चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज हो गई हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के मद्देनजर भाजपा ने अपनी रणनीतिक गतिविधियां और तेज कर दी हैं। एक तरफ जहां संभावित प्रत्याशियों से आवेदन लिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वार्डवार संगठनात्मक समीक्षा का दौर भी जारी है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में पूरा फोकस जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने पर है। बूथ और वार्ड स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने के निर्देश भी स्थानीय कार्यकर्ताओं को दिए गए हैं ताकि चुनावी वैतरणी को आसानी से पार किया जा सके।

स्थानीय राजनीति पर इसके क्या होंगे दूरगामी प्रभाव?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डूंगरपुर के चितरी मंडल क्षेत्र में एक साथ 50 कार्यकर्ताओं का पार्टी छोड़ना बीएपी के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है। स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों से ठीक पहले इस तरह का बदलाव हवा का रुख बदलने का संकेत देता है।

यदि ये कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में पारंपरिक वोटों को भाजपा के पाले में लाने में कामयाब होते हैं, तो आगामी चुनावों में परिणाम काफी चौंकाने वाले हो सकते हैं। फिलहाल, इस राजनीतिक घटना ने डूंगरपुर की आबोहवा में चुनावी सरगर्मी को और अधिक बढ़ा दिया है, और हर किसी की नजरें अब आगामी चुनावों के टिकट वितरण और प्रचार अभियानों पर टिकी हुई हैं।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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