राजस्थान में त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनावों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी धनतेरस के पावन पर्व और जनता की धार्मिक भावनाओं को सर्वोपरि रखते हुए चुनाव कार्यक्रम में आंशिक संशोधन (Partial Amendment) करने का बड़ा निर्णय लिया है। इस बदलाव के बाद अब ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं और चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को पर्व के दौरान राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।
अक्टूबर और नवंबर का यह महीना त्योहारों और लोकतंत्र के महापर्व यानी चुनावों का अनूठा संगम लेकर आया है। ऐसे में निर्वाचन आयोग द्वारा लिया गया यह संवेदनशीलता भरा कदम हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है। आइए विस्तार से जानते हैं कि किस चरण में क्या बदलाव किए गए हैं और नया टाइमटेबल क्या कहता है।
धनतेरस की आस्था और जनभावनाओं का रखा गया पूरा मान
भारत में पर्व और त्योहारों का विशेष महत्व होता है, और धनतेरस का दिन तो खरीदारी और सुख-समृद्धि के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। राजस्थान में चल रहे या तय होने वाले चुनावी माहौल के बीच जब यह बात सामने आई कि मतदान की तारीखें धनतेरस के आसपास पड़ रही हैं, तो आम जनता और राजनीतिक दलों के मन में संशय था कि लोग अपने पर्व को कैसे मनाएंगे।
जनभावनाओं की इसी नब्ज़ को पहचानते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने त्वरित कार्रवाई की और पोलिंग पार्टियों की रवानगी की तारीखों में एक दिन का बदलाव कर दिया। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के मुख्य दिन और बाकी प्रक्रियाएं तय योजना के अनुसार ही आगे बढ़ेंगी, सिवाय उन तारीखों के जिन्हें पर्व के मद्देनजर एडजस्ट किया गया है।
प्रथम चरण का संशोधित कार्यक्रम
शेड्यूल में बदलाव के तहत प्रथम चरण की शुरुआत अब इस प्रकार होगी:
- पोलिंग पार्टियों की रवानगी: अब पोलिंग पार्टियां 21 अक्टूबर को अपने गंतव्य के लिए रवाना होंगी।
- जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्य मतदान: इसके लिए वोटिंग ठीक अगले दिन यानी 22 अक्टूबर को संपन्न कराई जाएगी।
- पंच एवं सरपंच चुनाव: इन पदों के लिए 23 अक्टूबर को नामांकन दाखिल किए जाएंगे और 24 अक्टूबर को मतदान होगा।
- उप सरपंच चुनाव: इस चरण के तहत उप सरपंच का चुनाव 25 अक्टूबर को कराया जाएगा।
द्वितीय चरण का नया टाइमटेबल
दूसरे चरण की गतिविधियों को भी पर्व के लिहाज से सुगम बनाया गया है:
- पोलिंग पार्टियों का प्रस्थान: अब यह दल 27 अक्टूबर को रवाना होंगे।
- जिला परिषद एवं पंचायत समिति मतदान: इसके लिए मतदाता 28 अक्टूबर को अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
- पंच और सरपंच प्रक्रिया: इस श्रेणी के लिए 29 अक्टूबर को नामांकन और 30 अक्टूबर को मतदान की तिथि तय की गई है।
- उप सरपंच का चुनाव: यह प्रक्रिया 31 अक्टूबर को पूरी होगी।
तृतीय चरण का विस्तृत संशोधित विवरण
तीसरे चरण को लेकर भी आयोग ने तिथियों में हल्का फेरबदल किया है:
- पोलिंग दल प्रस्थान: चुनाव कराने वाली पार्टियां 2 नवंबर को रवाना होंगी।
- जिला परिषद और पंचायत समिति मतदान: मुख्य मतदान 3 नवंबर को होगा।
- पंच व सरपंच नामांकन और मतदान: इसके लिए 4 नवंबर को नामांकन दाखिल किए जाएंगे और 5 नवंबर को मतदान होगा।
- अप्रत्यक्ष उप सरपंच चुनाव: केवल वार्ड पंचों द्वारा चुने जाने वाले उप सरपंच का चुनाव 6 नवंबर को पूर्वाह्न में संपन्न होगा।
पूरे प्रदेश में 50 दिनों तक चलेगा चुनावी महासमर
राजस्थान के कुल 37 जिलों में यह चुनावी प्रक्रिया लगभग 50 दिनों तक चलेगी। 8 अक्टूबर से शुरू होकर 28 नवंबर तक पंचायतीराज चुनाव के अलग-अलग चरण आयोजित किए जा रहे हैं। राज्य की राजधानी जयपुर की बात करें, तो यहाँ सबसे अधिक चार चरणों में चुनाव संपन्न कराए जा रहे हैं, जो इसे और भी दिलचस्प बनाते हैं।
इसके अलावा, जैसलमेर, फलोदी और सलूंबर ऐसे जिले हैं जहाँ केवल एक ही चरण में मतदान प्रक्रिया पूरी होगी। वहीं झुंझुनूं, करौली, सीकर, बांसवाड़ा, बीकानेर, जालोर और उदयपुर में तीन चरणों में चुनाव होंगे, जबकि शेष 30 जिलों में दो चरणों में मतदाता अपने प्रतिनिधियों को चुनेंगे।
महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण का बड़ा प्रभाव
इस बार के पंचायतीराज चुनावों का एक सबसे अहम और क्रांतिकारी पहलू महिलाओं के लिए तय 50 प्रतिशत का आरक्षण है। राज्य के कुल 1.69 लाख पदों में से लगभग आधी सीटों पर महिलाएं चुनकर आएंगी, जो जमीनी स्तर पर महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल पेश करेगा।
आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में से करीब 7,200 महिला सरपंच और 65,000 महिला वार्ड पंच चुनकर सामने आएंगी। इसके साथ ही, 457 प्रधानों में से 221 पदों पर महिला नेत्री ही कमान संभालेंगी। यह बदलाव ग्रामीण भारत की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है।
वोटिंग के दिन ही आएंगे परिणाम और आचार संहिता लागू
ग्रामीण मतदाताओं के लिए एक और राहत भरी बात यह है कि सरपंच चुनाव के मामले में वोटिंग के दिन ही देर रात तक नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे, जिससे परिणाम को लेकर लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पंचायत चुनावों की घोषणा के साथ ही पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है और प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने की तैयारियों में जुटा हुआ है।
राज्य निर्वाचन आयोग के इस लचीले और व्यावहारिक रुख से यह साफ है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को संचालित करते समय आम नागरिकों की धार्मिक भावनाओं और संस्कृति का पूरा सम्मान किया जा रहा है, जिसकी चौतरफा सराहना हो रही है।