वाराणसी की पावन भूमि पर बुधवार को मानवता और सामाजिक सौहार्द की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। अवसर था राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस का, और इस खास मौके पर हिंदू युवा वाहिनी की तरफ से शहर के लहुराबीर स्थित आईएमए ब्लड बैंक के हॉल में एक वृहद स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में न केवल युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, बल्कि विभिन्न समुदायों के लोगों ने एक मंच पर आकर यह साबित कर दिया कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है।
डॉ. सौरभ मौर्य का ऐतिहासिक कारनामा: 234वीं बार किया रक्तदान
इस पूरे शिविर का सबसे बड़ा और प्रेरणादायक आकर्षण रहे हिंदू युवा वाहिनी के जिला प्रवक्ता एवं साधना फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. सौरभ मौर्य। नियमित रूप से रक्तदान करने वाले डॉ. मौर्य ने इस शिविर में अपने जीवन का 234वां रक्तदान किया। इतनी बार रक्तदान करना अपने आप में एक अद्भुत रिकॉर्ड है और चिकित्सा जगत के साथ-साथ आम जनता के लिए भी एक मिसाल है।
रक्तदान करने के बाद डॉ. सौरभ मौर्य ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रक्तदान से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया स्वैच्छिक रक्तदान किसी गंभीर रूप से बीमार या दुर्घटना के शिकार व्यक्ति के जीवन की डोर को थाम सकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा समय निकालकर इस महादान का हिस्सा जरूर बनें।
भव्य शुरुआत और गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी
शिविर का शुभारंभ बेहद भव्य तरीके से किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या ने शिरकत की। वहीं, विशिष्ट अतिथि के तौर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के निदेशक डॉ. सत्यनारायण संखवार और आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनुराग टंडन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने पूरी गर्मजोशी के साथ अतिथियों का स्वागत किया। हिंदू युवा वाहिनी के मंडल प्रभारी भास्कर तिवारी, महिला प्रकोष्ठ की मंडल अध्यक्ष सुनीता सोनी और जिला अध्यक्ष समर बहादुर सिंह ने सभी मंचासीन अतिथियों को अंगवस्त्र और पारंपरिक स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। अतिथियों ने भी संगठन के इस प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की और कहा कि समाज को ऐसे आयोजनों की बेहद आवश्यकता है।
62 यूनिट रक्त हुआ एकत्र, उमड़ी युवाओं की भीड़
शिविर में सुबह से ही युवाओं और रक्तदाताओं का तांता लगा रहा। हर कोई इस नेक काम में अपना योगदान देने के लिए उत्सुक नजर आया। आईएमए ब्लड बैंक की कुशल चिकित्सकीय टीम की देखरेख में चले इस शिविर के दौरान कुल 62 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।
रक्तदान करने वालों में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल रहे। राजू सोनी, अभिषेक राय, विशाल शुक्ला, मिथुन विश्वकर्मा, आकाश यादव, अंकित पांडेय, राजन मौर्य, गोलू कुमार, शिव सोनकर, दीपक राय, रितिक मौर्य, अरुण मौर्य, वारिस अहमद और इंद्रदेव सिंह समेत दर्जनों उत्साही लोगों ने बेझिझक होकर अपना रक्त दान किया। हर एक रक्तदाता के चेहरे पर दूसरों की जिंदगी बचाने की खुशी साफ झलक रही थी।
'रक्त का कोई धर्म नहीं होता' - एकता का संदेश
इस रक्तदान शिविर की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि इसमें विभिन्न जातियों, धर्मों और समुदायों के लोगों ने कंधे से कंधا मिलाकर हिस्सा लिया। इस मौके पर वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि रक्त का कोई धर्म या जाति नहीं होती है। जब किसी जरूरतमंद को खून की आवश्यकता होती है, तो उसके शरीर में दौड़ने वाला रक्त सिर्फ 'जीवन' बचाता है, न कि उसकी पहचान पूछता है।
"रक्तदान के दौरान जाति, धर्म और संप्रदाय की तमाम दीवारें ढह जाती हैं और केवल मानवता की भावना सबसे ऊपर नजर आती है।" - आयोजक मंडल
अतिथियों ने इस बात पर जोर दिया कि देश में रक्त की कमी को पूरा करने का एकमात्र जरिया स्वैच्छिक रक्तदान ही है। यदि हर स्वस्थ नागरिक साल में एक या दो बार नियमित अंतराल पर रक्तदान करने का संकल्प ले ले, तो देश में रक्त की कमी से किसी की जान नहीं जाएगी।
आयोजकों ने जताया आभार
शिविर के सफल समापन पर हिंदू युवा वाहिनी और साधना फाउंडेशन की पूरी टीम ने राहत की सांस ली और सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वे उन सभी साहसी रक्तदाताओं, पधारे हुए सम्मानित अतिथियों, आईएमए ब्लड बैंक की पूरी चिकित्सकीय टीम और इस आयोजन को सफल बनाने में पर्दे के पीछे से सहयोग करने वाले हर एक व्यक्ति के आभारी हैं।
इस प्रकार, वाराणसी में आयोजित यह रक्तदान शिविर सिर्फ खून इकट्ठा करने का एक जरिया नहीं रहा, बल्कि इसने समाज में आपसी भाईचारे, एकता और निस्वार्थ सेवा भाव का एक अनूठा संदेश दिया है, जो आने वाले दिनों में और अधिक लोगों को प्रेरित करेगा।