कॉरपोरेट सोशल उत्तरदायित्व यानी सीएसआर (CSR) फंड के नाम पर देश में एक बहुत बड़े खेल का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 200 करोड़ रुपये के भारी-भरकम फंड डायवर्जन मामले में अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए महाराष्ट्र समेत देश के चार प्रमुख राज्यों में एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस कार्रवाई के दौरान केंद्रीय एजेंसी ने कुल 8 ठिकानों पर दबिश दी, जहां से कई चौंकाने वाले दस्तावेज और सबूत हाथ लगे हैं।
फर्जी ट्रस्टों के जरिए चल रहा था पूरा खेल
जांच एजेंसी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला सीएसआर फंड की हेराफेरी और उसके गलत इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है। आरोपी कंपनियों और व्यक्तियों ने मिलकर कई फर्जी ट्रस्टों का एक पूरा नेटवर्क खड़ा कर रखा था। इन कागजी और फर्जी ट्रस्टों का इस्तेमाल केवल और केवल कॉरपोरेट घरानों से मिलने वाले सीएसआर फंड को डायवर्ट करने और उसे निजी खातों में ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।
प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि कंपनियों द्वारा समाज कल्याण और विकास कार्यों के नाम पर दिया गया पैसा कभी भी जमीन पर खर्च नहीं हुआ। इसके बजाय, एक सुनियोजित साजिश के तहत इस रकम को शेल कंपनियों और फर्जी ट्रस्टों के खातों में ट्रांसफर किया गया। बाद में इस पैसे को अलग-अलग माध्यमों से निकाल लिया गया या अन्यत्र निवेश कर दिया गया।
चार राज्यों में 8 ठिकानों पर ईडी का शिकंजा
प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने महाराष्ट्र के अलावा अन्य तीन राज्यों में स्थित ठिकानों पर एक साथ यह कार्रवाई की। इस दौरान संदिग्धों के ठिकानों से लगभग 21 लाख रुपये की नकदी भी बरामद की गई है। इसके अलावा, कई डिजिटल डिवाइस, बैंक खातों के विवरण, और संदिग्ध संपत्तियों के कागजात जब्त किए गए हैं, जिनकी अब गहनता से जांच की जा रही है।
एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे वित्तीय फर्जीवाड़े के पीछे कौन-कौन लोग मुख्य रूप से शामिल हैं और क्या इसमें कुछ बड़े कॉरपोरेट अधिकारी या पेशेवर लोग भी संलिप्त हैं। जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है ताकि इस सिंडिकेट की गहराई तक पहुंचा जा सके।
सीएसआर फंड नियमों का खुला उल्लंघन
भारत सरकार के नियमों के अनुसार, हर योग्य कंपनी को अपने मुनाफे का एक निश्चित हिस्सा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में खर्च करना अनिवार्य होता है। हालांकि, पिछले कुछ समय से इस तरह के फंड के दुरुपयोग की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।
- फर्जी एनजीओ और ट्रस्ट: सीएसआर फंड को हड़पने के लिए ऐसे ट्रस्ट बनाए गए जिनका जमीनी स्तर पर कोई वजूद नहीं था।
- फंड डायवर्जन: सामाजिक कार्यों के लिए आया पैसा व्यक्तिगत लाभ और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में लगाया गया।
- बड़ी रकम की हेराफेरी: शुरुआती आकलन में यह घोटाला 200 करोड़ रुपये से अधिक का आंका जा रहा है।
आगे की कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारियों की संभावना
ईडी की इस सख्त कार्रवाई के बाद कॉरपोरेट जगत में हड़कंप मच गया है। जिन लोगों और संस्थाओं के ठिकानों पर छापेमारी की गई है, उन्हें जल्द ही पूछताछ के लिए समन भेजा जा सकता है। एजेंसी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है।
आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है, साथ ही संलिप्त पाए जाने वाले लोगों की गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं। वित्तीय अपराधों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का यह शिकंजा यह साफ संदेश देता है कि सीएसआर फंड जैसे पवित्र और सामाजिक उद्देश्यों के लिए मिलने वाले पैसों में किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।