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ग्लोबल इन्वेस्टर्स को लुभाने के लिए भारत की मेगा कूटनीति, टोरंटो से टोक्यो तक छाए मंत्री

ग्लोबल इन्वेस्टर्स को लुभाने के लिए भारत की मेगा कूटनीति, टोरंटो से टोक्यो तक छाए मंत्री

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत तेजी से एक नए और भरोसेमंद केंद्र के रूप में उभर रहा है। दुनिया के तमाम बड़े बाजारों में मंदी और अनिश्चितता के बीच, भारत अपनी मजबूत आर्थिक वृद्धि और सुधारों के दम पर विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) का ध्यान अपनी ओर खींचने में जुटा है। इसी रणनीतिक अभियान के तहत देश के दो वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री इस समय दुनिया के अहम वित्तीय और तकनीकी केंद्रों में मोर्चा संभाले हुए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कनाडा के टोरंटो में हैं, तो वहीं केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल जापान के टोक्यो में वैश्विक निवेशकों और उद्योग दिग्गजों को भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनने का न्योता दे रहे हैं।

कनाडा में वित्त मंत्री का बड़ा संदेश: भारत है ग्रोथ का नया इंजन

टोरंटो में निवेशकों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दो टूक शब्दों में कहा कि दुनिया भर के निवेशकों के लिए भारत में पैसा लगाना सबसे फायदेमंद सौदा साबित होगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेशकों की सक्रिय भागीदारी यह सुनिश्चित करेगी कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का मुख्य ग्रोथ इंजन बने और बाकी देश भी इसके साथ अपनी रफ्तार बनाए रख सकें। वित्त मंत्री ने भारत के उस मजबूत आधार का जिक्र किया जो इसे अन्य विकासशील बाजारों से अलग खड़ा करता है।

निर्मला सीतारमण ने अपने संबोधन के दौरान देश की युवा आबादी, लगातार बढ़ रही खपत (Consumption) और तेजी से गहरे हो रहे पूंजी बाजारों (Capital Markets) को मुख्य ताकत बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का यह बदलाव किसी तात्कालिक उछाल का नतीजा नहीं है, बल्कि यह एक गहरी ढांचागत (Structural) तब्दीली है। देश में हो रहे तेजी से शहरीकरण, मजबूत होते मध्यम वर्ग और विश्व स्तरीय डिजिटल बुनियादी ढांचे ने अर्थव्यवस्था के लगभग हर सेक्टर में निवेश के नए और सुनहरे दरवाजे खोल दिए हैं।

इसके साथ ही, वित्त मंत्री ने भारत के डिजिटल इकोसिस्टम की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि किस प्रकार तकनीक और डिजिटल पहलों ने आम आदमी से लेकर बड़े कारोबारियों तक के लिए वित्तीय और वाणिज्यिक सेवाओं तक पहुंच को बेहद आसान और पारदर्शी बना दिया है।

टोक्यो में पीयूष गोयल का भरोसा: 'ट्रस्टेड पार्टनर' के रूप में उभर रहा भारत

दूसरी ओर, एशिया के तकनीकी महाशक्ति जापान की राजधानी टोक्यो में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने निवेशकों के साथ एक उच्च-स्तरीय गोलमेज बैठक (Roundtable) की। पीयूष गोयल ने जापान के निवेशकों के सामने भारत को एक 'भरोसेमंद' (Trusted) निवेश गंतव्य के रूप में पेश किया। उन्होंने साफ किया कि सरकार विदेशी निवेशकों के साथ हर कदम पर खड़ी है ताकि व्यापारिक प्रक्रियाओं को सुगम बनाया जा सके।

बैच और बैठकों के इस सिलसिले में जापानी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई व्यावहारिक कदम उठाने का भी ऐलान किया गया। पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार विशेष रूप से सेमीकंडक्टर (Chip Manufacturing) जैसी हाई-टेक इंडस्ट्रीज में इस्तेमाल होने वाले विशेष उपकरणों के लिए सर्टिफिकेशन नियमों को और अधिक सरल बनाने पर काम कर रही है। उन्होंने जापानी कंपनियों को यह भी आश्वस्त किया कि नियामक मोर्चे पर आने वाली किसी भी बाधा को दूर करने में सरकार व्यक्तिगत रूप से मदद करेगी।

शार्क टैंक की तर्ज पर भारत-जापान स्टार्टअप पिचिंग सीरीज

इस कूटनीतिक दौरे का एक सबसे दिलचस्प पहलू दोनों देशों के बीच स्टार्टअप इकोसिस्टम को जोड़ना रहा। पीयूष गोयल ने दुनिया भर में लोकप्रिय रियलिटी शो 'शार्क टैंक' की तर्ज पर एक नई 'भारत-जापान स्टार्टअप पिचिंग सीरीज' (India-Japan Start-up Pitching Series) शुरू करने का प्रस्ताव रखा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के युवा स्टार्टअप्स को बड़े निवेशकों और संभावित बिजनेस पार्टनर से सीधे जोड़ना है ताकि नए आइडियाज को तुरंत फंडिंग और बाजार मिल सके।

वाणिज्य मंत्री ने यह भी साझा किया कि यूनिक्लो (Uniqlo) जैसे बड़े जापानी टेक्सटाइल ब्रांड भारत में अपने निवेश को बढ़ाने और अपने ग्लोबल मार्केट के लिए यहीं से ज्यादा से ज्यादा उत्पादों की सोर्सिंग करने की योजना पर गंभीरता से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हम मिलकर बिजनेस के रिश्तों को और मजबूत बना रहे हैं। अब हम सिर्फ विचारों या पिचों से आगे बढ़कर पायलट प्रोजेक्ट्स, निवेश और उन्हें बड़े पैमाने पर विस्तार देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।'

विदेशी निवेश आकर्षित करने की चुनौती और मौजूदा वैश्विक परिदृश्य

हालांकि सरकार की ओर से यह वैश्विक आउटरीच काफी आक्रामक और सकारात्मक है, लेकिन आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, भारत को अपनी इस क्षमता को वास्तविक और निरंतर विदेशी निवेश (FDI) में बदलने में कुछ मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

चालू वर्ष के दौरान, विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार और बॉन्ड से कुछ हद तक पूंजी निकाली है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि भारतीय इक्विटी का मूल्यांकन (Valuations) अपेक्षाकृत ऊंचा चल रहा है, जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सेक्टर में हो रहे भारी-भरकम निवेश निवेशकों को अपनी ओर खींच रहे हैं। ऐसे में, मंत्रियों का यह विदेश दौरा निवेशकों के भरोसे को दोबारा जीतने और वैश्विक पूंजी का रुख भारत की ओर मोड़ने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

सितंबर के अंत में अमेरिकी दौरा

टोरंटो और टोक्यो के बाद, सरकार के इस आर्थिक कूटनीति अभियान का अगला बड़ा पड़ाव संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) होगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका का दौरा करेंगे। इस यात्रा के दौरान वह मिलwaukee में होने वाली जी-20 (G-20) की बैठक में हिस्सा लेंगे और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (US Trade Representative) जैमीसन ग्रीर के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात में दोनों देशों के बीच अटके पड़े व्यापार समझौतों (Trade Pact Issues) और आर्थिक सहयोग के नए रास्तों पर विस्तार से चर्चा होगी।

कुल मिलाकर, भारत की यह वैश्विक कूटनीति यह स्पष्ट करती है कि देश अब केवल एक विशाल घरेलू उपभोक्ता बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में खुद को एक अनिवार्य और रीढ़ की हड्डी की तरह स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer (देश खबरें)

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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