देश की सीमाओं की सुरक्षा करने वाले जब वर्दी उतार देते हैं, तो इसका यह कतई अर्थ नहीं होता कि उनका देश और समाज के प्रति दायित्व समाप्त हो गया है। इस बात को एक बार फिर चरितार्थ किया है उत्तराखंड के कोटद्वार स्थित पूर्व सैनिक संघर्ष समिति ने। उत्तरकाशी और धराली की प्राकृतिक आपदाओं के बाद अब द्वारीखाल ब्लॉक के मेहरगांव में कुदरत का ऐसा कहर टूटा कि पूरा इलाका दहल उठा। यहाँ 18 अगस्त 2026 को हुई भयंकर अतिवृष्टि ने एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जिंदगी हमेशा के लिए छीन ली। इस हृदयविदारक त्रासदी ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
मानवता की मिसाल: दुख की घड़ी में बना संबल
किसी अपने को खोने का दर्द क्या होता है, इसे फौज की अनुशासन और संवेदनाओं को करीब से जानने वाले पूर्व सैनिक भली-भांति समझते हैं। इसी मानवीय भावना का परिचय देते हुए आज यानी 30 अगस्त 2026 को पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल सीधे मेहरगांव (द्वारीखाल) जा पहुँचा। समिति के पदाधिकारियों ने वहाँ पहुंचकर न केवल शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया, बल्कि कोटद्वार क्षेत्र के पूर्व सैनिकों द्वारा आपसी सहयोग से जुटाई गई राहत राशि का चेक भी पीड़ित परिवार को सौंपा।
भले ही यह आर्थिक मदद किसी बड़े पैकेज के मुकाबले छोटी लगे, लेकिन इसमें जो अपनापन, संवेदना और सांत्वना छिपी है, वह इस मुश्किल दौर में पीड़ित परिवार के लिए एक बहुत बड़ा संबल साबित हो रही है। संकट की इस बेला में अपनों के बीच खड़े होना ही सबसे बड़ा मानवीय धर्म माना जाता है, जिसे इन पूर्व सैनिकों ने एक बार फिर साबित कर दिखाया है।
“हमने वर्दी उतारी है, फर्ज नहीं”
पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार का यह स्पष्ट मानना है कि सैनिक का जीवन केवल सरहद की रखवाली तक सीमित नहीं होता। जब देश का नागरिक संकट में हो, तब भी एक सैनिक का दिल उसी तरह धड़कता है जैसे सीमा पर पहरा देते वक्त धड़कता था। समिति के सदस्यों का कहना है:
“हमने वर्दी उतार दी है, फर्ज नहीं। सरहद हो या अपना समाज, जरूरत के समय खड़ा होना ही हमारा धर्म है।”
यह कोट सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि उन हजारों सैनिकों के जज्बे की गवाही है जिन्होंने अपनी जवानी देश के नाम कर दी और अब अपनी सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा को ही अपने जीवन का दूसरा सबसे बड़ा लक्ष्य बना चुके हैं।
उत्तराखंड में आपदाओं का जख्म और राहत की दरकार
पहाड़ी राज्यों में खासकर मानसून के मौसम में प्रकृति का रौद्र रूप अक्सर देखने को मिलता है। उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश और अतिवृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मेहरगांव की घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आपदाएं कितनी अचानक और भयानक होती हैं। ऐसे में सरकारी मदद के अलावा सामाजिक संगठनों और पूर्व सैनिकों जैसी संस्थाओं का आगे आना समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है।
समिति के प्रमुख कार्य और सामाजिक सरोकार:
- वीर नारियों का सम्मान: देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों के परिवारों और वीर नारियों की समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान करना।
- आपदा प्रबंधन और राहत: राज्य में किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय पीड़ितों तक तुरंत राहत सामग्री और आर्थिक सहायता पहुँचाना।
- आपसी भाईचारा और सहयोग: पूर्व सैनिकों के बीच एकजुटता बनाए रखना और समाज के हर दुख-सुख में कंधे से कंधा मिलाकर चलना।
- युवाओं के लिए प्रेरणा: आने वाली पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और समाज सेवा की भावना जागृत करना।
मानव सेवा ही सच्ची देश सेवा है
आज के दौर में जब संवेदनशीलता कम होती जा रही है, पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार का यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणास्त्रोत है। यह घटना हमें यह सिखाती है कि मुसीबत के समय किसी एक व्यक्ति या परिवार की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि पूरे समाज को एकजुट होकर आगे आना चाहिए। जब देश के रक्षक ही समाज के रक्षक बन जाएं, तो किसी भी आपदा का सामना करना आसान हो जाता है।
आइए, हम सब मिलकर इस नेक पहल से सीख लें और अपने आसपास के जरूरतमंदों व आपदा पीड़ितों के मददगार बनें। क्योंकि अंत में यही सच साबित होता है कि मानव सेवा ही सच्ची देश सेवा है।
