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छत्रपति संभाजीनगर का ट्रैफिक संकट: 20 साल में दोगुनी आबादी, कैसे संभलेगी रफ्तार?

छत्रपति संभाजीनगर का ट्रैफिक संकट: 20 साल में दोगुनी आबादी, कैसे संभलेगी रफ्तार?

छत्रपति संभाजीनगर शहर इस समय एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। औद्योगिक निवेश, तेजी से बढ़ते रोजगार के अवसर और शहरी विस्तार ने जहां एक ओर शहर के आर्थिक विकास को पंख दिए हैं, वहीं दूसरी ओर भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती भी खड़ी कर दी है। आने वाले दो दशकों में यह शहर एक नए रूप में नजर आएगा, लेकिन इसके साथ ही यहां की परिवहन व्यवस्था के सामने एक गंभीर संकट मंडरा रहा है। हाल ही में सामने आई व्यापक परिवहन योजना (CMP) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं, जो यह चेतावनी देते हैं कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो शहर की रफ्तार पूरी तरह थम सकती है।

2052 तक दोगुनी होगी आबादी, तीन गुना बढ़ेंगे रोजगार

औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में उभर रहे इस शहर में प्रवासियों और स्थानीय युवाओं के लिए अवसरों की बाढ़ सी आ गई है। अनुमान है कि अगले 20 से 25 वर्षों में यानी 2052 तक छत्रपति संभाजीनगर की आबादी आज की तुलना में लगभग दोगुनी हो जाएगी। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसरों में करीब तीन गुना की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की जा सकती है। शेंद्रा और अन्य प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार नए कारखाने और कंपनियां स्थापित हो रही हैं, जिससे बाहरी इलाकों में नई आवासीय बस्तियां भी तेजी से विकसित हो रही हैं।

जैसे-जैसे औद्योगिक विस्तार होगा, शहर के भीतर और बाहर आवागमन का दबाव भी उसी अनुपात में बढ़ेगा। सुबह के वक्त काम पर निकलने वाले कर्मचारियों और शिक्षण संस्थानों की ओर जाने वाले छात्रों का रेला जब सड़कों पर उतरेगा, तो मौजूदा सड़क ढांचा इस भारी दबाव को झेलने में असमर्थ साबित हो सकता है।

पीक आवर्स का दबाव और यात्राओं का गणित

शहरी यातायात की मांग का विश्लेषण करने पर एक दिलचस्प तथ्य सामने आता है। शहर में पीक आवर्स के दौरान होने वाली कुल यात्राओं में से लगभग 75 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल रोजगार और शिक्षा से जुड़ी आवाजाही की होती है। सुबह के समय दफ्तरों और स्कूलों की ओर तथा शाम को वापसी के वक्त मुख्य सड़कों पर वाहनों का सैलाब उमड़ पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सड़कों को चौड़ा कर देने भर से इस समस्या का समाधान नहीं निकाला जा सकता। जब तक लोगों को एक समयबद्ध, सुरक्षित और आरामदायक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प नहीं मिलेगा, तब तक निजी वाहनों (कार और बाइक) की संख्या बेकाबू होती जाएगी।

मौजूदा बस सेवा की स्थिति और 54 मिनट का अंतराल

भविष्य की बड़ी चुनौतियों के मुकाबले आज की हमारी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था काफी कमजोर नजर आती है। CMP की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के कई महत्वपूर्ण मार्गों पर औसतन केवल दो से तीन बसें ही उपलब्ध हैं। हैरानी की बात यह है कि इन बसों की आवृत्ति (Frequency) लगभग 54 मिनट तक है यानी एक बस छूट जाने पर यात्री को अगली बस के लिए करीब एक घंटे का इंतजार करना पड़ता है।

इतनी सुस्त और सीमित बस सेवा के भरोसे भविष्य की लाखों की आबादी की जरूरतों को पूरा करना नामुमकिन है। रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि 2052 तक सिटी बस, फीडर सेवाओं और मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) के संयुक्त तंत्र की क्षमता को मौजूदा स्तर से लगभग पांच गुना तक बढ़ाना होगा।

क्या कहती है एकीकृत मास ट्रांजिट नेटवर्क की योजना?

बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए शहर में एक मजबूत और एकीकृत परिवहन नेटवर्क की रूपरेखा तैयार की गई है। इस योजना के तहत निम्नलिखित प्रस्ताव प्रमुख हैं:

  • लगभग 48 किलोमीटर लंबा ट्रंक मास ट्रांजिट कॉरिडोर विकसित करना।
  • लगभग 320 किलोमीटर का विस्तृत फीडर नेटवर्क तैयार करना, जो स्थानीय बस्तियों को मुख्य मार्गों से जोड़े।
  • रेलवे स्टेशन से शेंद्रा और रेलवे स्टेशन से मुकुंदवाड़ी की दिशाओं को आपस में जोड़ने वाली करीब 38 किलोमीटर लंबी MRTS (मेट्रो जैसी प्रणाली) विकसित करना।

यह नेटवर्क न केवल यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएगा, बल्कि शहर के कोने-कोने को एक सूत्र में पिरोने का काम भी करेगा।

सड़कें चौड़ी करने से परे सोचना होगा

वर्तमान बुनियादी ढांचे की बात करें तो शहर की करीब 42 प्रतिशत सड़कें ही चार लेन की विभाजित (divided) सड़कें हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि लगभग 62 प्रतिशत सड़कों पर पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण पैदल यात्रियों को भारी जोखिम का सामना करना पड़ता है और सड़क सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।

भविष्य की नीति केवल वाहनों के लिए डामर बिछाने की नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ, साइकिल ट्रैक, आधुनिक बस बे और मास ट्रांजिट का एक समन्वित स्वरूप शामिल होना चाहिए।

सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को सात गुना बढ़ाने का लक्ष्य

शहर को प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और पार्किंग की विकराल होती समस्याओं से बचाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि लोग निजी वाहनों का मोह छोड़कर सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं। योजना के तहत सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को मौजूदा स्तर से लगभग सात गुना बढ़ाने का कठिन लेकिन अनिवार्य लक्ष्य रखा गया है। यह तभी संभव है जब लोगों को यह अहसास हो कि बस या मेट्रो से सफर करना उनकी अपनी कार या बाइक से ज्यादा सुविधाजनक और तेज है।

आर्थिक विकास और समृद्धि की कुंजी है मेट्रो

छत्रपति संभाजीनगर के संदर्भ में मेट्रो या MRTS परियोजना को केवल एक यातायात सुगम बनाने वाले साधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह आने वाले समय में इस क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास का सबसे बड़ा आधार स्तंभ बनेगी। जब उद्योगपतियों, निवेशकों, कामगारों और आम नागरिकों को एक आधुनिक और तेज रफ़्तार परिवहन तंत्र मिलेगा, तो शहर की उत्पादकता और जीवन स्तर दोनों में अभूतपूर्व सुधार होगा।

वक्त की मांग है कि आने वाले कल के ट्रैफिक संकट के विकराल होने का इंतजार करने के बजाय, आज ही इस हाई-कैपेसिटी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की नींव रखी जाए। छत्रपति संभाजीनगर की अगली छलांग केवल सड़कों की चौड़ाई पर नहीं, बल्कि उसकी स्मार्ट और तेज रफ्तार पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर टिकी होगी।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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