भारतीय सेना के एक और सच्चे सपूत ने अपनी लंबी और गौरवशाली जीवन यात्रा को विराम दे दिया है। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के मुगलसराय थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहाँ देश की आन-बान और शान के प्रतीक रहे सेवानिवृत्त सैनिक सूफी बदरुद्दीन का निधन हो गया है। लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे सुबेदार बदरुद्दीन ने इलाज के दौरान कमांड अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल उनके परिवार में, बल्कि पूरे इलाके और पूर्व सैनिक संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई है।
राष्ट्रीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
कमांड अस्पताल में निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक आवास मुगलसराय लाया गया। यहाँ सैन्य परंपराओं और पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। देश के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले इस जांबाज फौजी को अंतिम विदाई देने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पूर्व सैनिक संगठन के सदस्य मौजूद रहे।
देश सेवा का एक स्वर्णिम इतिहास
सेना में रहते हुए सूफी बदरुद्दीन का कार्यकाल बेहद शानदार रहा। उनका सैन्य जीवन देश के प्रति निष्ठा और समर्पण की एक मिसाल था। उनके सेवाकाल से जुड़े प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- नाम एवं पद: सुबेदार बदरुद्दीन (सर्विस नंबर: 203101 H)
- रेजिमेंट: बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप (अंतिम यूनिट: 119 इंजीनियर रेजीमेंट)
- जन्म तिथि: 17 फरवरी 1950
- सेना में भर्ती: 22 जनवरी 1971
- सेवा निवृत्ति: 31 जनवरी 1999
- कुल सेवा: 28 वर्ष
- निधन तिथि: 04 अक्टूबर 2026
उन्होंने भारतीय सेना में रहकर लगभग 28 वर्षों तक देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। 1971 के दौर से लेकर अपनी सेवानिवृत्ति तक उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया।
संगठन को खड़ा करने में निभाई थी अहम भूमिका
सेवानिवृत्ति के बाद भी सुबेदार बदरुद्दीन रुके नहीं, बल्कि उन्होंने समाज और अपने साथियों के लिए काम करना जारी रखा। वह मुगलसराय और चंदौली के पूर्व सैनिक संगठनों के सबसे पुराने और सक्रिय सदस्यों में से एक थे। स्थानीय स्तर पर पूर्व सैनिकों को एकजुट करने और उनके अधिकारों तथा कल्याण के लिए आवाज उठाने में उनकी भूमिका अग्रणी रही।
साथियों का कहना है कि वीरेंद्र प्रताप यादव के साथ मिलकर उन्होंने चंदौली में पूर्व सैनिक संगठन को मजबूत करने के लिए अथक प्रयास किए थे। आज यह संगठन क्षेत्र के पूर्व सैनिकों के लिए एक मजबूत सहारा है, जिसकी नींव में सुबेदार बदरुद्दीन जैसे कर्तव्यनिष्ठ सैनिकों का पसीना और मेहनत शामिल है।
अंतिम यात्रा में उमड़ी दिग्गजों और साथियों की भीड़
जब सुबेदार बदरुद्दीन की अंतिम यात्रा निकाली गई, तो उसमें थल सेना से सेवानिवृत्त हुए तमाम अधिकारी और उनके साथी सैनिक उपस्थित रहे। सेना से जुड़े अनुशासन और आत्मीयता का यह नजारा देखकर हर कोई भावुक हो गया। अंतिम यात्रा में शामिल होने वाले प्रमुख पूर्व सैन्य अधिकारियों और सैनिकों में:
- कैप्टन बलचरन
- कैप्टन विजय नारायन
- कैप्टन जलालुद्दीन
- कैप्टन फिरोज खान
- कैप्टन इसुब खान
- सूबेदार नामवर सिंह
- लेफ्टिनेंट काशीनाथ शर्मा
- सूबेदार रामजी शर्मा
- सूबेदार मदन मोहन शर्मा
- सूबेदार गुलाम अली
- हवलदार श्याम सुंदर
- हवलदार बी पी यादव
- नायक मो. अलीम
- सूबेदार सूर्यनाथ शर्मा
- सूबेदार अंगद यादव
- सूबेदार एस के शर्मा
- हवलदार राम नरेश
- सूबेदार राम करन
- सूबेदार महेंद्र नाथ
इन तमाम साथियों और दिग्गजों ने नम आंखों से अपने प्रिय मित्र और सहकर्मी को अंतिम विदाई दी। उपस्थित लोगों ने उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सूफी बदरुद्दीन का जाना पूरे क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता।
एक युग का अंत
सुबेदार बदरुद्दीन का पूरा जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक सैनिक सिर्फ वर्दी में ही नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद भी समाज के लिए एक प्रहरी की तरह जीता है। उनका निधन भले ही हमारे बीच से उनके भौतिक शरीर को ले गया हो, लेकिन उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्य और देश के प्रति उनका समर्पण हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। चंदौली की धरती अपने इस वीर सपूत को हमेशा याद रखेगी। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।