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मराठी भाषा विवाद पर देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान, जानिए क्या है नया नियम

मराठी भाषा विवाद पर देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान, जानिए क्या है नया नियम

मुंबई की सड़कों पर इन दिनों ऑटो और टैक्सी चालकों के बीच फैली एक अफवाह ने ऐसा बवाल काटा कि आम लोगों की सुबह की रफ्तार थम गई। सोशल मीडिया पर चल रही भारी-भरकम जुर्माने की खबरों के बाद चालकों ने कई इलाकों में प्रदर्शन किया और सड़कों पर उतर आए। स्थिति को बेकाबू होते देख अब खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्य के परिवहन मंत्री को आगे आकर पूरी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी है। आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है और सरकार के नए नियम क्या कहते हैं।

अधिकारियों की सख्ती और सोशल मीडिया पर फैली अफवाह

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ असामाजिक तत्वों या गलतफहमी के चलते यह अफवाह फैल गई कि जिन ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी नहीं आती, उन पर 5,000 रुपये से लेकर 20,000 या 25,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। इस खबर के आग की तरह फैलते ही मुंबई के पश्चिमी उपनगरों जैसे कांदिवली, मलाड, सांताक्रूज, दहिसर और अंधेरी में अफरा-तफरी मच गई।

सोमवार सुबह के पीक आवर्स में कई जगहों पर चालकों ने 'रास्ता रोको' प्रदर्शन किया। कुछ जगहों पर तो प्रदर्शनकारियों ने अन्य चालकों को जबरन यात्रियों को बैठाने से रोका और गाड़ियों से यात्रियों को नीचे उतारने की भी कोशिश की। सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें लालजीपाड़ा और ओशिवारा मेगा मॉल के पास ट्रैफिक जाम और हंगामे की तस्वीरें साफ देखी जा सकती थीं।

देवेंद्र फडणवीस ने क्या कहा? स्पष्ट की सरकार की मंशा

बढ़ते तनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत दखल दिया और चालकों के मन से डर को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार का उद्देश्य चालकों को भाषा का 'विशेषज्ञ' या विद्वान बनाना बिल्कुल नहीं है।

"चालकों को मराठी भाषा का विशेषज्ञ बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्हें केवल काम से जुड़ी बुनियादी (बेसिक) मराठी आनी चाहिए, ताकि वे यात्रियों के साथ संवाद कर सकें। सरकार की मंशा किसी को परेशान करने की नहीं, बल्कि सुचारू कामकाज सुनिश्चित करने की है।" — देवेंद्र फडणवीस

सीएम ने यह भी जोर देकर कहा कि चालकों को भाषा सीखने के लिए पर्याप्त अतिरिक्त समय दिया गया है और अब तक किसी का भी लाइसेंस रद्द नहीं किया गया है।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक की चेतावनी: 1 महीने का नोटिस अनिवार्य

इस पूरे मामले पर राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए आरटीओ (RTO) अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी आरटीओ अधिकारी एक महीने की समयसीमा (Deadline) खत्म होने से पहले ही चालकों पर जुर्माना लगाता पाया गया, तो उस अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री ने 12 अगस्त के सरकारी प्रस्ताव (GR) का हवाला देते हुए पूरी प्रक्रिया समझाई:

  • पहला चरण: जिन चालकों को कामकाजी मराठी नहीं आती, आरटीओ उन्हें 1 महीने का नोटिस देगा और भाषा सीखने का मौका देगा।
  • दूसरा चरण: अगर एक महीने के बाद भी चालक भाषा की शर्त पूरी नहीं कर पाते हैं, तो उनके लाइसेंस और बैज को निलंबित (Suspend) कर दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें सीखने के लिए 3 महीने का अतिरिक्त समय और मिलेगा।
  • अंतिम चरण: यदि तीन महीने की अतिरिक्त अवधि के बाद भी वे विफल रहते हैं, तब जाकर उनका लाइसेंस रद्द किया जाएगा।

हालांकि, मंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि जो चालक जानबूझकर भाषा सीखने से इनकार करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संजय निरूपम की दखल और आरटीओ की कार्रवाई के आंकड़े

शिवसेना नेता संजय निरूपम ने उत्तर भारतीय चालकों का पक्ष लेते हुए परिवहन मंत्री से मुलाकात की थी और बिना नोटिस दिए भारी-भरकम जुर्माना वसूलने पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसके बाद सरकार ने यह सफाई जारी की है।

आंकड़ों पर गौर करें तो आरटीओ (RTOs) ने 20 अगस्त को पर्याप्त मराठी ज्ञान न होने के कारण 1,268 कमर्शियल वाहनों के चालकों को नोटिस जारी किया था। इसके अगले दिन यानी 21 अगस्त को पूरे महाराष्ट्र में ऐसे 1,499 गैर-मराठी भाषी चालकों को नोटिस दिए गए। हालांकि, राहत की बात यह है कि अब तक 1,65,600 गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों ने मराठी कक्षाओं में हिस्सा लिया है और भाषा सीख रहे हैं।

यूनियनों की सफाई और स्थिति सामान्य

ऑटो-रिक्शा और टैक्सी यूनियनों के नेताओं ने साफ किया कि किसी भी प्रमुख यूनियन ने कोई हड़ताल या आंदोलन का आह्वान नहीं किया था। सुबह के समय जो प्रदर्शन हुए, वे कुछ ऐसे चालकों के समूहों द्वारा किए गए थे जो अपनी आजीविका छिनने के डर और भाषा की अनिवार्यता को लेकर पैनिक (Panic) में थे।

दोपहर होते-होते पुलिस और यूनियन नेताओं की सूझबूझ से स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई और यातायात सुचारू रूप से चलने लगा। सरकार के स्पष्टीकरण के बाद अब चालकों में फैला डर भी काफी हद तक कम हो गया है।

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अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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