अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल और गहरे होते जा रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन द्वारा नए और कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की तैयारियों के बीच सोमवार (24 अगस्त 2026) को ईरान की मुद्रा 'रियाल' इतिहास के सबसे निचले स्तर पर आ गई। मुद्रा बाजारों में कारोबार की शुरुआत के साथ ही रियाल लुढ़ककर 20.2 लाख प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।
भले ही ईरान का केंद्रीय बैंक आधिकारिक दर 15 लाख रियाल प्रति डॉलर के आसपास बता रहा हो, लेकिन आम नागरिकों और खुले बाजार में कारोबार करने वालों को इससे कहीं अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। इस ऐतिहासिक गिरावट ने युद्ध और प्रतिबंधों से पहले से ही पिस रही ईरानी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।युद्ध और प्रतिबंधों की दोहरी मार से कराहता ईरान
इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से पहले ही वहां की अर्थव्यवस्था भारी दबाव में थी। देश दोहरे अंकों की महंगाई और नकारात्मक विकास दर (Negative Growth) का सामना कर रहा था। हालांकि, पिछले लगभग छह महीने से जारी युद्ध ने इस स्थिति को और ज्यादा भयावह बना दिया है।
आम ईरानी नागरिकों के लिए रसोई का बजट संभालना नामुमकिन सा हो गया है। युद्ध शुरू होने के बाद से चावल की कीमतों में करीब 60 प्रतिशत और गोमांस (बीफ) के दामों में 150 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अनुमान जताया है कि इस संकट के कारण ईरान की जीडीपी (GDP) में 5 प्रतिशत से ज्यादा की भारी गिरावट आ सकती है.
होर्मुज जलडमरूमध्य बना जंग का नया मैदान
आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह घिरने के बावजूद, तेहरान के पास एक बड़ा रणनीतिक हथियार अब भी मौजूद है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर ईरानी हमलों और धमकियों के कारण इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात लगभग ठप हो चुका है। दुनिया का पांचवां हिस्सा यानी वैश्विक तेल कारोबार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था।
वर्तमान में ईरान ने इस जलमार्ग को पूरी तरह से फिर से खोलने से तब तक इनकार कर दिया है, जब तक कि वह वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स या शुल्क न वसूल सके। इस स्थिति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है और आगामी अमेरिकी कांग्रेस चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है।
ओमान की मध्यस्थता और यूएई का बड़ा कदम
इस गतिरोध को तोड़ने के लिए, जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित ओमान और ईरान के बीच इस जलमार्ग के संयुक्त प्रबंधन की योजना पर अंतिम दौर की बातचीत चल रही है। ओमान के विदेश मंत्री इस सिलसिले में तेहरान का दौरा करने वाले हैं।
दूसरी ओर, खाड़ी देशों के रुख में भी बड़ा बदलाव आया है। ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पिछले हफ्ते ही ईरान के साथ अपने सभी व्यापारिक संबंधों को निलंबित करने की घोषणा कर दी है, जिससे तेहरान की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
अमेरिका का 'आर्थिक डी-डे' और तेहरान की दो टूक
इस गतिरोध को तोड़ने के लिए, ट्रम्प प्रशासन ने घोषणा की है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करना जारी रखेंगे, उन पर द्वितीयक प्रतिबंध (Secondary Sanctions) समेत और भी कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने 'फिनांसियल टाइम्स' में छपे अपने लेख में लिखा, "राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान की अर्थव्यवस्था को इस हद तक तबाह कर दिया है कि रियाल कभी इतना कमजोर नहीं रहा और महंगाई इतनी ज्यादा नहीं रही। आक्रामकता को बढ़ावा देने वाले देशों को अब इस आत्म-धोखे से बाहर आना होगा।"
इसके जवाब में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने तेहरान में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, "इस स्थिति का कोई भी और escalation (तनाव) निश्चित रूप से गंभीर परिणाम लेकर आएगा। हमारे हाथ बंधे हुए नहीं हैं।" इसके साथ ही, जून में 60 दिन के संघर्षविराम में मध्यस्थता करने वाला पाकिस्तान भी युद्ध समाप्त करने के उपायों पर चर्चा करने के लिए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेज चुका है।
आम जनता में निराशा का माहौल
राजधानी तेहरान की सड़कों पर आम लोगों के बीच भविष्य को लेकर भारी निराशा है। अपनी बची-कुची बचत को अमेरिकी डॉलर में बदलकर खुद को आर्थिक नुकसान से बचाने की कोशिश कर रहे 73 वर्षीय सादेघ महमूदिया ने कहा, "अब किसी भी समझौते और शांति की कोई उम्मीद नहीं बची है।
