झारखण्ड की राजनीतिक फिजाओं में एक बार फिर गर्माहट आ चुकी है। राज्य के गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है। विधायक सह राज्य के मंत्री रहे सुदिव्य कुमार सोनू के असामयिक निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर कब्जे के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अंदरखाने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। हालांकि चुनाव आयोग ने अभी तक आधिकारिक तौर पर चुनावी तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन संवैधानिक प्रावधानों के तहत छह महीने के भीतर होने वाले इस मुकाबले को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा सबसे ज्यादा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने इस बार सहानुभूति कार्ड और मजबूत राजनीतिक पकड़ को साधते हुए बड़ा दांव चला है।
झामुमो का मास्टरस्ट्रोक: श्वेता शर्मा के नाम पर मुहर
विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक, गिरिडीह सीट से झामुमो की ओर से दिवंगत विधायक सुदिव्य कुमार सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा का नाम लगभग तय माना जा रहा है। पार्टी के भीतर से लेकर जमीनी स्तर तक इस पर सहमति बन चुकी है, और अब केवल आधिकारिक घोषणा होना शेष है। पति के निधन के कुछ ही हफ्तों बाद श्वेता शर्मा ने जिस प्रकार से राजनीतिक मैदान में कदम रखा है, उसने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। हाल ही में उन्होंने पीरटांड़ के विभिन्न ग्रामीण और शहरी इलाकों का दौरा कर स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधी मुलाकात की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि श्वेता शर्मा की यह सक्रियता झामुमो के पारंपरिक वोटबैंक को एकजुट रखने और सहानुभूति की लहर को भुनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पिछले कुछ दिनों से लगातार क्षेत्र में उनकी मौजूदगी ने विरोधियों की धड़कनों को बढ़ा दिया है। कार्यकर्ता भी उनके समर्थन में खुलकर सामने आ रहे हैं, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि झामुमो इस सीट पर अपनी पुरानी विरासत को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता है।
भाजपा के खेमे में हलचल: पीरटांड़ की सियासत और नए समीकरण
एक तरफ जहां झामुमो अपने उम्मीदवार के नाम को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर टिकट की दावेदारी को लेकर भारी रस्साकशी शुरू हो गई है। पिछले विधानसभा चुनाव 2024 के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो मुकाबला बेहद कांटे का रहा था। चुनाव में झामुमो के सुदिव्य कुमार सोनू को 94,042 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के टिकट पर उतरे निर्भय कुमार शाहाबादी ने 90,204 मत हासिल किए थे। दोनों दिग्गजों के बीच हार-जीत का अंतर महज 3,838 वोटों का था, जो यह बताता है कि यह सीट दोनों दलों के लिए कितनी प्रतिष्ठापूर्ण है।
इस बार समीकरण थोड़े बदलते हुए नजर आ रहे हैं। पिछले चुनाव के परिणामों का गहराई से विश्लेषण करने पर यह बात सामने आई थी कि गिरिडीह शहरी और मुफस्सिल क्षेत्रों में भाजपा को बढ़त मिली थी, लेकिन पीरटांड़ के इलाके ने बाजी पलट दी थी। पीरटांड़ में झामुमो को जो भारी बढ़त हासिल हुई थी, वही सुदिव्य सोनू की जीत का मुख्य आधार बनी थी। यही वजह है कि इस उपचुनाव में पीरटांड़ क्षेत्र की भूमिका को सबसे अहम माना जा रहा है और भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ता अब इसी क्षेत्र से किसी स्थानीय चेहरे को चुनावी मैदान में उतारने की पुरजोर मांग उठा रहे हैं।
संभावित दावेदारों की लंबी सूची और सोशल मीडिया पर जंग
भाजपा के भीतर टिकट पाने के लिए कई स्थानीय नेता अपनी ताकत झोंक रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पीरटांड़ क्षेत्र से सक्रिय रहने वाले श्याम प्रसाद, अमर तुरी, सिकंदर हेंब्रम और मनोज साहू जैसे कई नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में बने हुए हैं। इनमें से कई नेता अपने-अपने स्तर पर जनसंपर्क अभियानों को तेज कर चुके हैं।
दिलचस्प बात यह है कि केवल जमीनी स्तर पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच अपनी दावेदारी को लेकर होड़ सी मच गई है। इंटरनेट मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर समर्थक अपने चहेते नेताओं के समर्थन में पोस्ट साझा कर रहे हैं और पार्टी आलाकमान तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, भाजपा संगठन की तरफ से अभी तक किसी भी उम्मीदवार के नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई गई है, लेकिन अंदरखाने चल रही यह सुगबुगाहट पार्टी के भीतर बढ़ते कॉम्पिटिशन को साफ बयां करती है।
वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण और आगे की चुनावी प्रक्रिया
गिरिडीह उपचुनाव की प्रक्रिया को गति मिलने में अभी थोड़ा वक्त और लग सकता है। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य चल रहा है। इसके तहत आगामी 19 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। प्रशासनिक रूप से इस लिस्ट के जारी होने के बाद ही उपचुनाव की आधिकारिक घोषणा और नामांकन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
लेकिन प्रशासनिक तारीखों के आने से पहले ही जिस तरह से राजनीतिक तापमान बढ़ा है, उसने स्पष्ट कर दिया है कि यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है। एक तरफ झामुमो अपनी साख और सहानुभूति के बल पर मैदान में उतरने को तैयार है, तो वहीं भाजपा पिछले मामूली अंतर के आंकड़े को पाटने और इस बार जीत हासिल करने के लिए हर संभव रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे मतदाता सूची का प्रकाशन और राजनीतिक दलों की बैठकें आगे बढ़ेंगी, गिरिडीह का यह चुनावी रण और अधिक स्पष्ट और धारदार होता जाएगा।