आगामी चुनावों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। इसी कड़ी में, जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत चल रहे कार्यों की जमीनी हकीकत जानने के लिए जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने बुधवार को औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कई प्रखंडों और पंचायतों में बनाए गए डिजिटाइजेशन कैंपों का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
चैनपुर और बन्दुवा पंचायत में जमीनी हालात का जायजा
जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने अपने दौरे की शुरुआत चैनपुर प्रखंड कार्यालय और बन्दुवा पंचायत भवन में लगाए गए विशेष डिजिटाइजेशन कैंपों के निरीक्षण से की। उन्होंने वहां मौजूद अधिकारियों से बूथवार प्राप्त किए गए प्रपत्र-6 की विस्तृत जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान कुछ बूथों पर प्रपत्र-6 का कलेक्शन उम्मीद से कम पाया गया, जिस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा और कम कलेक्शन के पीछे के वास्तविक कारणों की थाह ली।
दूसरी ओर, जिन बूथों पर यह संकेत मिल रहे थे कि उस क्षेत्र के सभी पात्र नागरिकों से प्रपत्र-6 सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिए गए हैं, वहां के बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) और सुपरवाइजर को एक सख्त निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि ऐसे बूथों के संबंध में लिखित पुष्टि दी जाए कि शत-प्रतिशत योग्य नागरिकों को कवर कर लिया गया है ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से बाहर न छूट पाए।
नए मतदाताओं को जोड़ने पर विशेष जोर
भारत निर्वाचन आयोग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि 1 अक्टूबर 2026 को जिन युवाओं ने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है, उनका नाम प्राथमिकता के आधार पर मतदाता सूची में जोड़ा जाना चाहिए। लोकतंत्र के इस सबसे बड़े पर्व में देश के नौजवानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।
उन्होंने मातहत अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी बूथ क्षेत्र में कोई भी ऐसा योग्य नागरिक न बचे, जो अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने से वंचित रह गया हो। इसके लिए घर-घर जाकर जागरूकता फैलाने और फॉर्म भरवाने के काम में तेजी लाने को कहा गया।
प्रपत्र-6, 7 और 8 के डिजिटाइजेशन में तेजी लाने के निर्देश
कैंपों के निरीक्षण के दौरान डीईओ ने दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया की भी बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने प्रपत्र-6 (नया नाम जोड़ने के लिए), प्रपत्र-7 (नाम हटाने या आपत्ति के लिए) और प्रपत्र-8 (विवरण में संशोधन के लिए) के ऑनलाइन अपडेशन और डिजिटाइजेशन के काम में गति लाने की हिदायत दी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग द्वारा तय किए गए मानकों और निर्धारित दस्तावेजों के दायरे में ही पूरी की जानी चाहिए। इसमें किसी भी तरह की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लेस्लीगंज प्रखंड सभागार का भी किया औचक दौरा
चैनपुर के बाद जिला निर्वाचन पदाधिकारी सीधे लेस्लीगंज प्रखंड सभागार पहुंचे। वहां चल रहे डिजिटाइजेशन कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने विशेष तौर पर सोनबर्षा, खैराट और गोराडी खास क्षेत्रों का जिक्र किया। इन इलाकों में प्रपत्र-6 का कलेक्शन अपेक्षाकृत कम पाया गया था, जिस पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों से जवाब तलब किया और सुधार के लिए आवश्यक उपाय सुझाए।
समीक्षा बैठक के मुख्य बिंदु:
- 100% कवरेज: प्रत्येक योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो।
- युवा मतदाताओं पर फोकस: 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं का त्वरित पंजीकरण।
- लिखित पुष्टि: शत-प्रतिशत कलेक्शन वाले बूथों के बीएलओ और सुपरवाइजर द्वारा लिखित प्रमाण।
- समयबद्ध कार्य: सभी प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन आयोग के तय समय के भीतर पूरा हो।
अधिकारियों की उपस्थिति और प्रशासनिक संदेश
इस पूरे निरीक्षण अभियान के दौरान जिला निर्वाचन पदाधिकारी के साथ कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें उप निर्वाचन पदाधिकारी उदय रजक के अलावा संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (AERO) प्रमुख रूप से शामिल थे। इन अधिकारियों को भी फील्ड विजिट बढ़ाने और जमीनी स्तर पर आ रही दिक्कतों को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की इस सक्रियता से यह साफ जाहिर होता है कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों को लेकर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। एसआईआर अभियान के इस चरण का मुख्य उद्देश्य यही सुनिश्चित करना है कि देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार यानी मतदान से कोई भी योग्य नागरिक वंचित न रहे। आने वाले दिनों में इस तरह के निरीक्षणों और समीक्षा बैठकों का दौर और अधिक तीव्र होने की उम्मीद है, ताकि तय समयसीमा के भीतर मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिहीन और अपडेट बनाया जा सके।