अमृतसर की पावन धरती इस समय रूहानी रंग में सराबोर है। मौका है सिख पंथ के सबसे पवित्र और महान पर्व—श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व का। सिखों के पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी द्वारा सन 1604 में हरिमंदिर साहिब में पहली बार आदि ग्रंथ (श्री गुरु ग्रंथ साहिब) के प्रकाश किए जाने की ऐतिहासिक स्मृति में आज पूरा सिख जगत झूम उठा है। इस पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर यानी गोल्डन टेंपल को देश-विदेश से मंगवाए गए अनूठे और सुगंधित फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया है, जिसकी अलौकिक छटा देखते ही बनती है।
अमृतसर में गूंज रहा गानी-शबद का संगीत, उमड़ा आस्था का सैलाब
सितंबर 2026 के इस सुहाने दिन पर सुबह से ही गोल्डन टेंपल परिसर में श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा हुआ है। पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अमृतसर पहुंचे हैं। हर कोई अमृत सरोवर में डुबकी लगाकर गुरु चरणों में माथा टेकने और आशीर्वाद पाने के लिए आतुर दिखाई दे रहा है। मंदिर परिसर में गूंजते गुरबाणी के मधुर शबद और ढोल-नगाड़ों की थाप वातावरण को पूरी तरह से आध्यात्मिक बना रही है।
पवित्र परिक्रमा, गर्भगृह और मुख्य द्वार को जिस कलात्मक तरीके से फूलों से संवारा गया है, वह हर आने वाले का मन मोह रहा है। गलियारों और परिसरों में फूलों की महक और दीपों की जगमगाहट इस उत्सव की भव्यता में चार चांद लगा रही है।
गुरुद्वारा रामसर साहिब से निकला भव्य नगर कीर्तन
प्रकाश पर्व के इस पावन और ऐतिहासिक मौके पर परंपरा के अनुसार भव्य नगर कीर्तन का आयोजन किया गया है। यह नगर कीर्तन गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से आरंभ होकर विभिन्न मार्गों से होता हुआ श्री हरिमंदिर साहिब तक पहुंचा। नगर कीर्तन के दौरान आगे-आगे पारंपरिक गतका पार्टियां अपने शस्त्र कौशल का शानदार प्रदर्शन कर रही थीं, वहीं संगीतमय जत्थों द्वारा कीर्तन गायन किया जा रहा था।
- ऐतिहासिक मार्ग: गुरुद्वारा रामसर साहिब से हरिमंदिर साहिब तक का पूरा मार्ग फूलों से सजाया गया था।
- गतका प्रदर्शन: युवाओं और बच्चों ने पारंपरिक युद्ध कला गतका के अद्भुत करतब दिखाए।
- संगत का उत्साह: सड़कों के दोनों ओर खड़े होकर श्रद्धालुओं ने पालकी साहिब पर पुष्प वर्षा की।
विशेष जलौ और सजावट के दर्शन
इस विशेष अवसर पर श्री हरिमंदिर साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब और गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में पारंपरिक 'जलौ' (कीमती आभूषणों और धार्मिक वस्तुओं की नुमाइश) सजाए जाएंगे। इन दुर्लभ दर्शनों को पाने के लिए देश के कोने-कोने से सिख संगत सुबह से ही लाइनों में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रही है। प्रशासन और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की तरफ से सुरक्षा और लंगर के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।
इतिहास के पन्नों से जुड़ा यह पावन दिन
सिख इतिहास में 1604 का वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण है, जब श्री गुरु अर्जन देव जी महाराज ने अथक प्रयासों और संकलन के बाद आदि ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश हरिमंदिर साहिब में किया था। बाबा बुड्ढा जी को इस पवित्र ग्रंथ का पहला मुख्य ग्रंथी नियुक्त किया गया था। तब से लेकर आज तक यह परंपरा पूरी श्रद्धा और गरिमा के साथ निभाई जा रही है। प्रकाश पर्व का यह दिन मानवता, शांति, और भाईचारे का संदेश देता है, जिसे आत्मसात करने के लिए आज लाखों लोग अमृतसर में इकठ्ठा हुए हैं।
संध्या ढलते ही गोल्डन टेंपल की स्वर्ण वास्तुकला और अमृत सरोवर के पानी में झिलमिलाती रोशनी का यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं लगेगा। प्रकाश पर्व की यह रात अमृतसर में दीपों और आस्था के प्रकाश के साथ एक नई ऊर्जा का संचार कर रही है।