व्यापारिक जगत में अनुशासन और नियमों की पालना को सर्वोपरि रखते हुए एक कड़ा और बड़ा कदम उठाया गया है। हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक शहर मंडी में स्वर्णकार वेलफेयर एसोसिएशन ने अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। संगठन के नियमों की लगातार अवहेलना करने वाले कुछ सदस्यों को एसोसिएशन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से जिले के सर्राफा बाजार में चर्चाओं का बाजार गर्म है और यह संदेश साफ है कि अब संगठन के नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा।
वार्षिक अधिवेशन में लिए गए कई अहम फैसले
मंडी में आयोजित स्वर्णकार वेलफेयर एसोसिएशन का वार्षिक अधिवेशन बेहद सुगबुगाहट और महत्वपूर्ण चर्चाओं के बीच संपन्न हुआ। इस बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के प्रधान आशुतोष पाल ने की। अधिवेशन में संगठन के विस्तार, व्यापारिक चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक की शुरुआत एक बेहद संवेदनशील और भावुक क्षण के साथ हुई, जहां इस वर्ष भारतवर्ष और नेपाल में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अपनी जान गंवाने वाले अनगिनत लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। सभी उपस्थित सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।
बैठक में मुख्य रूप से चीफ पैट्रन जितेंद्र चोपड़ा, पैट्रन महेशपुरी, सरदार सर्व सुखपाल सिंह मल्होत्रा, सरदार भगवंत सिंह, और मंडी व्यापार मंडल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जितेंद्र पुरी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इन दिग्गजों की मौजूदगी ने बैठक के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया।
सिल्वर हॉलमार्किंग और नए सरकारी नियमों पर विशेष जोर
बदलते दौर में व्यापार को पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा तय किए गए नए नियमों की जानकारी देना भी इस बैठक का एक मुख्य एजेंडा था। एसोसिएशन के महासचिव गौरव चोपड़ा ने पिछले साल की पूरी गतिविधियों और वित्तीय विवरण को सदस्यों के सामने रखा। इसके बाद, उन्होंने सभी को सरकार की नई गाइडलाइंस से अवगत कराया।
विशेष रूप से 'सिल्वर हॉलमार्किंग' (Silver Hallmarking) को लेकर बैठक में लंबी चर्चा हुई। सर्राफा कारोबारियों को यह समझाया गया कि आने वाले समय में शुद्धता और गुणवत्ता के मानक कितने जरूरी हो चुके हैं। इसके अलावा, संगठन की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सभी सदस्यों के मासिक शुल्क में सौ-सौ रुपये की वृद्धि करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
दिग्गजों के सुझाव: व्यापार के बदलते परिवेश में खुद को ढालना जरूरी
अधिवेशन के दौरान एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य की रूपरेखा तैयार की:
- महेशपुरी (पैटर्न): उन्होंने वर्तमान कार्यकारिणी के कामकाज की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से मौजूदा टीम पिछले कार्यकाल की गतिविधियों को आगे बढ़ा रही है, वह काबिले तारीफ है।
- सरदार सर्व सुखपाल सिंह मल्होत्रा: उन्होंने बदलते व्यापारिक परिवेश का जिक्र करते हुए कहा कि आज के डिजिटल और आधुनिक समय में कारोबारियों को खुद में बदलाव लाना होगा, तभी टिक पाना संभव है।
- सरदार भगवंत सिंह: उन्होंने मंडी एसोसिएशन के दायरे को केवल शहर तक सीमित न रखकर इसे पूरे जिला स्तर तक विस्तारित करने का एक उपयोगी सुझाव दिया।
वार्षिक अवकाश की घोषणा और कड़ा संदेश
बैठक के अंतिम चरण में प्रधान आशुतोष पाल ने आगामी सर्दियों के दौरान होने वाले वार्षिक अवकाश का आधिकारिक ऐलान किया। मंडी जिले में स्वर्णकार प्रतिष्ठान 25 दिसंबर 2026 से 1 जनवरी 2027 तक पूरी तरह बंद रहेंगे। इस अवधि को वार्षिक अवकाश के रूप में निर्धारित किया गया है।
हालांकि, इस अधिवेशन का सबसे बड़ा और चर्चित बिंदु अनुशासन पर प्रहार रहा। प्रधान आशुतोष पाल ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि कुछ सदस्य लगातार संगठन के बनाए गए नियमों और मर्यादाओं की अनदेखी कर रहे थे। ऐसे सदस्यों को चेतावनी देने के बावजूद जब सुधार नहीं दिखा, तो उन्हें एसोसिएशन से बाहर कर दिया गया। यह कदम संगठन की एकता और अनुशासन को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
मिल-जुलकर काम करने का लिया गया प्रण
कड़ी कार्रवाई के बाद माहौल को सकारात्मक और एकजुट बनाए रखने के लिए प्रधान आशुतोष पाल ने सभी सक्रिय सदस्यों को एक साथ मिलकर, आपसी भाईचारे के साथ आगे बढ़ने का संकल्प दिलवाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वर्णकार समाज की ताकत उसकी एकता में ही निहित है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में एसोसिएशन के अन्य कई दिग्गज चेहरे भी मुस्तैदी से मौजूद रहे। इनमें वरिष्ठ उप प्रधान संत मल्होत्रा, भास्कर चोपड़ा, उपप्रधान संजय सोनी, विपिन सोनी, प्रेस सचिव सरदार राजा सिंह, कोषाध्यक्ष विकास सेखरी और कोटली के कोऑर्डिनेटर रवि सोनी की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि संगठन अपने हर फैसले को लेकर पूरी तरह एकजुट और गंभीर है।
मंडी के सर्राफा कारोबारियों के बीच इस कड़े फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, लेकिन अधिकांश व्यापारियों का मानना है कि अनुशासनहीनता पर लगाम कसना संगठन के हित में एक बेहद जरूरी कदम था।