छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक बेहद मर्मस्पर्शी और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। हसदेव नदी के पावन और शांत बहने वाले जल ने तीन हंसते-खेलते परिवारों को जिंदगीभर का ऐसा जख्म दे दिया है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। पिछले 72 घंटों से लगातार जारी अनथक रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार नदी से तीनों लापता छात्रों के शव बरामद कर लिए गए हैं। जैसे ही यह खबर नदी के घाट पर बैठी नम आंखों तक पहुंची, वहां का पूरा माहौल चीख-पुकार और आंसुओं में डूब गया। अपनों के शवों को देखते ही परिजन खुद को संभाल नहीं सके और फूट-फूटकर रो पड़े। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है।
देवरी पिकनिक स्पॉट पर हुई थी अनहोनी
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी दुर्घटना जांजगीर के चर्चित देवरी पिकनिक स्पॉट के पास हुई थी। कुछ छात्र अपनी रोजमर्रा की पढ़ाई और तनाव से दूर कुछ खुशनुमा पल बिताने के लिए इस पिकनिक स्पॉट पर पहुंचे थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह पिकनिक उनके जीवन का आखिरी सफर साबित होगा। हसदेव नदी की खूबसूरती के बीच अचानक पानी का तेज बहाव इन छात्रों के लिए काल बन गया। नदी के अनिश्चित जल स्तर और तेज बहाव की चपेट में आने से तीन छात्र पानी में बह गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था।
72 घंटों तक चला जांबाज रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना के तुरंत बाद राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), स्थानीय पुलिस प्रशासन और कुशल गोताखोरों की संयुक्त टीम ने हसदेव नदी में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया था। नदी की अथाह गहराई, पानी का मटमैला रंग और तेज बहाव रेस्क्यू टीम के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। टीम ने देवरी पिकनिक स्पॉट से लेकर नदी के आगे के कई किलोमीटर के हिस्से को खंगालना शुरू किया। पानी के नीचे बड़े-बड़े पत्थर और उनके बीच बने खोहरा (गुफा जैसी संरचनाएं) इस तलाश में सबसे बड़ी बाधा बन रहे थे।
बावजूद इसके, बचाव दल ने हिम्मत नहीं हारी। सर्च ऑपरेशन के दूसरे दिन ही एक छात्र पवन का शव घटनास्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर बरामद कर लिया गया था। हालांकि, अन्य दो छात्रों—सचिन और मुरारी का कोई सुराग नहीं मिल पाया था, जिससे परिजनों की सांसें अटकी हुई थीं।
पत्थरों के नीचे फंसे मिले सचिन और मुरारी के शव
पवन का शव मिलने के बाद भी प्रशासन और गोताखोरों की टीम ने अपनी तलाश का दायरा और बढ़ा दिया। नदी के हर संभावित कोने और पत्थरों के नीचे की गहराई को खंगाला गया। आखिरकार, शुक्रवार को रेस्क्यू टीम को बड़ी सफलता तब मिली जब घटनास्थल के आसपास ही एक बड़े पत्थर के नीचे बने खोहरा में सचिन और मुरारी के शव फंसे हुए मिले।
विशेष उपकरणों और गोताखोरों की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों शवों को बाहर निकाला गया। इसके साथ ही पिछले तीन दिनों से चल रहा वह दिल दहला देने वाला इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया, जिसमें हर कोई तीनों छात्रों के सकुशल लौटने की प्रार्थना कर रहा था।
तीन दिनों तक नदी किनारे टिकी रहीं उम्मीद भरी नजरें
यह पिछले तीन दिन उन परिवारों के लिए किसी महाप्रलय से कम नहीं थे, जिनके अपने नदी की लहरों में खो गए थे। तीनों छात्रों के माता-पिता, रिश्तेदार और गांव के लोग बिना कुछ खाए-पिए लगातार तीन दिनों तक हसदेव नदी के किनारे ही डेरा डाले बैठे रहे। ठंडी हवाएं, खुले आसमान के नीचे का पहरा और हर गुजरते घंटे के साथ कम होती उम्मीदें—इन सब के बीच वे सिर्फ एक ही आस लगाए बैठे थे कि उनका बेटा सही सलामत उनके पास लौट आएगा।
लेकिन जब शुक्रवार को सचिन और मुरारी के शव मिलने की पुष्टि हुई, तो वहां मौजूद हर एक व्यक्ति का कलेजा फट गया। नदी किनारे विलाप करती मांओं और दहाड़ मारकर रोते पिताओं की चीखों ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं। प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने किसी तरह शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया, लेकिन इस दुख के आगे सारे शब्द बौने साबित हो रहे थे।
एक साथ तीन घरों के बुझ गए चिराग
इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। जिन घरों में कुछ दिनों पहले तक बच्चों की किलकारियों और उनके भविष्य को लेकर सपनों की बातें होती थीं, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और रोने की आवाजें गूंज रही हैं। एक साथ तीन युवा छात्रों की अर्थियां उठने से पूरा समाज स्तब्ध है।
प्रशासन ने तीनों शवों को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पिकनिक स्पॉट्स और नदियों के किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं होते, और कैसे जरा सी लापरवाही पलभर में हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ कर रख देती है।