मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में हुए सनसनीखेज छोटू उर्फ दीपक राजावत हत्याकांड ने इन दिनों पूरे इलाके में सनसनी फैला रखी है। कानून-व्यवस्था की कड़ी मिसाल पेश करते हुए पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए दो मुख्य आरोपियों को सार्वजनिक रूप से सड़क पर घुमाया और वारदात वाली जगह पर ले जाकर क्राइम सीन रीक्रिएट (मौका मुआयना) कराया। दिन दहाड़े पुलिस की इस कार्रवाई को देखने के लिए स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। आइए जानते हैं इस खौफनाक वारदात के पीछे की पूरी और अंदर की कहानी।
भिंड रोड से धरे गए 10-10 हजार के इनामी बदमाश
ग्वालियर पुलिस ने ताबड़तोड़ दबिश के बाद इस हत्याकांड में शामिल दो कुख्यात बदमाशों—रानू उर्फ अभिषेक राजावत और राजवीर उर्फ राजू चौहान को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। इन्हें भिंड रोड स्थित बंटू ढाबे के पास से घेराबंदी करके दबोचा गया। गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने इनकी तलाशी ली, तो इनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई विदेशी पिस्टल और तीन जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए। पुलिस का शिकंजा कसता देख दोनों बदमाशों के चेहरे पर खौफ साफ तौर पर देखा जा सकता था।
गिरफ्तारी के अगले ही दिन पुलिस ने दोनों आरोपियों का मनोबल तोड़ने और जनता में सुरक्षा का भाव पैदा करने के लिए उन्हें घटनास्थल पर पैदल घुमाया। इस दौरान आरोपियों ने पुलिस के सामने वारदात के पूरे घटनाक्रम को दोहराया कि किस तरह उन्होंने छोटू को घेरकर गोलियों से छलनी किया था।
क्या है 22 सितंबर की वो खौफनाक रात?
यह पूरा मामला 22 सितंबर की आधी रात का है। गोला का मंदिर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रेसकोर्स रोड पर हजीरा निवासी छोटू उर्फ दीपक राजावत की ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच में सामने आया कि छोटू अपने कुछ दोस्तों के साथ शहर के सिरोल इलाके में एक शराब पार्टी का आनंद लेकर अपने घर लौट रहा था।
जैसे ही उसकी गाड़ी तानसेन नगर आरओबी के पास रेसकोर्स रोड पर मुड़ी, पहले से घात लगाकर बैठे बाइक सवार हथियारबंद बदमाशों ने उसे घेर लिया। छोटू कुछ समझ पाता, इससे पहले ही बदमाशों ने उसे बाइक से नीचे खींचा और उस पर गोलियों की बौछार कर दी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मृतक छोटू खुद भी एक हिस्ट्रीशीटर बदमाश था, जिसके चलते अपराध की दुनिया की पुरानी रंजिश इस घटना की मुख्य वजह बनी।
मुखबिरी का शक और खूनी रंजिश की कहानी
जांच में पुलिस को पता चला कि इस हत्याकांड की जड़ें बहुत गहरी हैं। पिछले साल हजीरा इलाके में बंटी भदौरिया और उसके साथियों ने मिलकर भोला सिकरवार की बेरहमी से हत्या कर दी थी। उस हत्याकांड में पुलिस और विरोधी गुट को शक था कि छोटू उर्फ दीपक राजावत ने ही मुखबिरी की थी। इसी मुखबिरी के शक के चलते भोला सिकरवार के भाई दिन्नू सिकरवार और हेमू सिकरवार के मन में छोटू के प्रति भयंकर दुश्मनी सुलग रही थी।
इस मामले में छोटू कुछ समय के लिए जेल भी गया था और घटना से कुछ दिन पहले ही जमानत पर बाहर आया था। जेल से बाहर आते ही उसने अपनी पुरानी जिंदगी शुरू की, लेकिन विरोधी गुट ने उसे रास्ते से हटाने की पूरी योजना बना ली थी।
पार्टी का बहाने बुलाया और देता रहा लोकेशन
इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए बहुत ही शातिर तरीके से जाल बिछाया गया था। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि पिल्लू उर्फ विशाल शर्मा, जो खुद छोटू का दोस्त होने का दावा करता था, इस साजिश का अहम मोहरा था। पिल्लू ने ही पार्टी के बहाने छोटू को घर से बाहर बुलाया था।
पार्टी के दौरान पिल्लू लगातार व्हाट्सएप कॉल के जरिए छोटू की पल-पल की लाइव लोकेशन मुख्य शार्पशूटरों यानी रानू और राजवीर को शेयर कर रहा था। जैसे ही छोटू का पार्टी से लौटने का समय हुआ, लोकेशन मिलते ही हमलावर अपनी बाइकों के साथ तैयार थे। पुलिस के मुताबिक, रानू ने बेहद नजदीक से छोटू के सीने और सिर में चार गोलियां दागीं, जबकि राजवीर और उसके अन्य साथियों ने भी दहशत फैलाने के लिए ताबड़तोड़ फायरिंग की।
मुरैना से लेकर भिंड तक छिपे थे आरोपी
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी हवा में हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए थे। पुलिस की रडार से बचने के लिए रानू और राजवीर ने पहले मुरैना का रुख किया और वहां कुछ दिन रिश्तेदारों के यहां छिपे रहे। जब पुलिस की दबिश वहां तेज हुई, तो वे भागकर भिंड चले गए।
ग्वालियर पुलिस की विशेष टीमों लगातार इनकी तलाश में जुटी थीं। मुखबिर से पुख्ता सूचना मिलने के बाद पुलिस ने भिंड रोड पर बिछाए गए जाल में दोनों को आखिरकार दबोच लिया। हैरान करने वाली बात यह है कि इन दोनों गिरफ्तार आरोपियों पर पहले से ही सात-सात गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो इनके आदतन अपराधी होने की गवाही देते हैं।
मुख्य साजिशकर्ता अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर
भले ही पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल कर ली हो, लेकिन इस हत्याकांड के मास्टरमाइंड अभी भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार:
- दिन्नू सिकरवार (फरार साजिशकर्ता)
- हेमू सिकरवार (फरार साजिशकर्ता)
- पिल्लू उर्फ विशाल शर्मा (लोकेशन देने वाला दोस्त - फरार)
इन तीनों की तलाश में ग्वालियर पुलिस की अलग-अलग टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बाकी बचे हुए आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा और इस पूरे आपराधिक नेटवर्क की कमर तोड़ दी जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कड़ी चेतावनी
इस सनसनीखेज वारदात के बाद से ग्वालियर के हजीरा और आसपास के इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की गैंगवार या तनाव को रोका जा सके। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शहर में कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। आरोपियों का जुलूस निकालकर पुलिस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि अपराध का अंत हमेशा भयानक होता है। अब देखना यह होगा कि पुलिस बाकी तीनों फरार आरोपियों को कब तक सलाखों के पीछे पहुंचाने में कामयाब होती है।