सितंबर का महीना आधा बीत चुका है और अमूल्य तौर पर इस समय तक देश के कई हिस्सों से मॉनसून अपनी विदाई की उल्टी गिनती शुरू कर देता है। लेकिन साल 2026 की मौसम परिस्थितियां कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही हैं। बंगाल की खाड़ी से लेकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक एक के बाद एक कई नए वेदर सिस्टम एक्टिव हो गए हैं, जिसके चलते मौसम का मिजाज एक बार फिर से बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई प्रमुख राज्यों के लिए ताजा चेतावनी जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
दिल्ली-एनसीआर में उमस के बीच अचानक करवट लेगा मौसम
राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों (NCR) में पिछले कुछ दिनों से लोग चिपचिपी गर्मी और उमस से परेशान हैं। सुबह और शाम के वक्त हल्की ठंडक का अहसास होने लगा था, लेकिन दोपहर की धूप बेहाल कर रही थी। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि एक नया चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) सक्रिय होने की वजह से आने वाले दिनों में बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है। हालांकि मूसलाधार बारिश की संभावना कम ही है, लेकिन छिटपुट बौछारें या गरज के साथ हल्की फुहारें जरूर इस उमस भरी गर्मी से राहत दिला सकती हैं।
स्थानीय मौसम केंद्र के मुताबिक, दिल्ली में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास बना हुआ है, लेकिन हवा में नमी की मात्रा अधिक होने के कारण बेचैनी महसूस हो रही है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अभी संतोषजनक श्रेणी में है, जो बारिश के बाद और बेहतर होने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में झमाझम बारिश के आसार
पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में मॉनसून एक बार फिर से सक्रिय होता नजर आ रहा है। सितंबर के इस दौर में भी बादलों का डेरा इन राज्यों के आसमान में बना हुआ है। मौसम विभाग का अनुमान है कि उत्तर प्रदेश के तराई वाले इलाकों और पूर्वी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने (Thunderstorms) की भी चेतावनी दी गई है, जिसके चलते किसानों और आम लोगों को खुले खेतों या पेड़ों के नीचे न जाने की हिदायत दी गई है।
बिहार की बात करें तो पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर समेत तमाम जिलों में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। राज्य के कुछ हिस्सों में नदियां पहले से ही उफान पर हैं, ऐसे में नई बारिश से जलस्तर पर भी असर पड़ सकता है, जिसके लिए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।
देश के अन्य हिस्सों में क्या है मौसम का हाल?
- मध्य भारत (मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़): इन दोनों राज्यों में सितंबर के अंत तक भारी बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर इन क्षेत्रों पर ज्यादा दिख रहा है।
- पहाड़ी राज्य (उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश): पहाड़ों पर लैंडस्लाइड का खतरा अभी टला नहीं है। लगातार हो रही छिटपुट बारिश के कारण रास्तों पर मलबा गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं, इसलिए पहाड़ी यात्रा करने से पहले मौसम की जानकारी अवश्य ले लें।
- दक्षिण भारत: केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां सामान्य बनी हुई हैं, जहां हल्की से मध्यम बौछारें लगातार जारी हैं।
कब होगी मॉनसून की आधिकारिक विदाई?
सामान्य तौर पर पश्चिमी राजस्थान से 17 सितंबर के आसपास मॉनसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, लेकिन इस साल सक्रिय वेदर सिस्टम्स के कारण इसमें थोड़ी देरी देखने को मिल रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह (लगभग 25 सितंबर के बाद) से ही उत्तर-पश्चिम भारत से मॉनसून के पूरी तरह लौटने की परिस्थितियां अनुकूल बन पाएंगी। तब तक देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का यह लुकाछिपी का खेल जारी रहने की पूरी संभावना है।
आम जनता और किसानों के लिए जरूरी सलाह
इस बदलते मौसम के दौर में स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं जैसे वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और पेट से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि खानपान का विशेष ध्यान रखें और बाहर का खुला खाना खाने से बचें। वहीं, किसानों के लिए यह सलाह है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें ताकि अचानक होने वाली बारिश से उनकी मेहनत खराब न हो।
मौसम विभाग की हर अपडेट पर हमारी नजर बनी हुई है। जैसे ही किसी नए वेदर अलर्ट या चेतावनी की घोषणा होगी, हम सबसे पहले आप तक सटीक जानकारी पहुंचाएंगे। तब तक मौसम के मिजाज को देखते हुए अपनी यात्रा और दैनिक गतिविधियों की योजना बनाएं।