नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ऐतिहासिक शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव का आयोजन किया। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित रेशिमबाग मैदान में आयोजित इस मुख्य समारोह में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शस्त्र पूजन किया। इस विशेष अवसर पर दैनिक जागरण के मुख्य संपादक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
समारोह की शुरुआत पारंपरिक रूप से स्वयंसेवकों के भव्य पथ संचलन (रूट मार्च) और युगाब्द 5128 के तहत नागपुर महानगर के आयोजन के साथ हुई। शताब्दी वर्ष होने के कारण इस बार के विजयादशमी उत्सव को लेकर देशभर में विशेष उत्सुकता और उत्साह का माहौल देखा गया।
ओटीटी प्लेटफॉर्म और नई पीढ़ी को लेकर चिंता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आधुनिक तकनीक और सूचना माध्यमों के दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली जानकारी को बिना उचित-अनुचित का विवेक किए ग्रहण कर रही है। इसके नकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद दुनिया के कई देशों ने इस संबंध में अनुशासन और प्रतिबंध लागू किए हैं। भारत में भी विशेष रूप से 'ओटीटी प्लेटफॉर्म्स' (OTT platforms) को लेकर समाज में ऐसी आवश्यकता महसूस की जा रही है, जिस पर शासन और प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
पश्चिमी संस्कृति की आंधी और सांस्कृतिक मूल्य
मोहन भागवत ने वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए कहा कि भारत सहित पूरे विश्व में शालीनता, मंगलकारी मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और मानवीय संस्कारों को नष्ट करने वाली एक आसुरी प्रवृत्ति की आंधी पश्चिम से उठी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के तथाकथित प्रगत देश भी इस चुनौती से त्रस्त और असहाय महसूस कर रहे हैं। ऐसे में देश को आगे बढ़ाने और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए स्वतंत्रता संग्राम के समय से भी अधिक तपस्या और समर्पण की आवश्यकता है।
स्वामी श्रद्धानंद और स्वामी लक्ष्मणानंद का स्मरण
अपने संबोधन के दौरान संघ प्रमुख ने देश के महान स्वाधीनता सेनानियों और तपस्वियों को याद किया। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के पक्के तपस्वी, शिक्षाविद, शुद्धि आंदोलन के नेता और स्वतंत्रता सेनानी स्वामी श्रद्धानंद के सर्वोच्च बलिदान को 100 वर्ष पूरे हो गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने ओडिशा में आदिवासी समाज की सेवा के लिए समर्पित रहे स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती महाराज की जन्म शताब्दी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों ने स्वधर्म और समाज की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
संगठित हिंदू समाज और मानवीय संवेदनाएं
डॉ. मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदू समाज में चेतना जगाने और उसे संगठित व मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शक्ति के अभाव में व्यक्ति, समाज और देश तीनों के लिए अपना अस्तित्व, सम्मान और सुरक्षा बनाए रखना असंभव है। एक संगठित हिंदू समाज के निर्माण का यह प्रयास किसी अन्य धर्म के सम्मान या देश की भावनात्मक एकता के विरुद्ध नहीं है। उन्होंने मानवीय संवेदनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सांस्कृतिक मूल्य ही कैप्टन स्मित मच्छर जैसे व्यक्तियों को अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की रक्षा करने की प्रेरणा देते हैं।