कांग्रेस ने उठाई मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के आईटी सिस्टम में व्यापक बदलाव की मांग
कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोकने और आयोग के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) तंत्र में बड़े बदलाव करने की अपील की है। कांग्रेस का आरोप है कि राजनीतिक दलों को लंबे समय तक सर्च करने योग्य मतदाता सूची उपलब्ध न कराए जाने से कथित तौर पर ‘वोट चोरी’ को बढ़ावा मिला है।
सर्च करने योग्य मतदाता सूची और पूर्व के आरोप
जयराम रमेश के अनुसार, पिछले दो वर्षों से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार यह मांग कर रहे थे कि निर्वाचन आयोग सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को डिजिटल फॉर्मेट में ऐसी मतदाता सूची उपलब्ध कराए, जिसमें मतदाताओं के नाम और अन्य विवरण आसानी से खोजे जा सके। रमेश ने दावा किया कि वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को कथित तौर पर लाखों फर्जी मतदाताओं का पता चला था, जिसके बाद से ही इस पारदर्शी डिजिटल फॉर्मेट की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही थी। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि आयोग ने करीब आठ साल तक राजनीतिक दलों को यह सुविधा नहीं दी, जिससे चुनावी पारदर्शिता प्रभावित हुई।
15 अक्टूबर के आदेश और देरी पर सवाल
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में उल्लेख किया कि गत 15 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने एक आदेश जारी कर 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) के तहत राजनीतिक दलों को सर्च करने योग्य प्रारूप में मतदाता सूची उपलब्ध कराने की बात कही थी। इसे पारदर्शिता की दिशा में एक कदम माना गया, लेकिन कांग्रेस ने इस सुविधा को देने में बरती गई लंबी देरी पर गहरी आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि यह कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था ताकि चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह की शंका न रहे।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर सीधा हमला
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा प्रहार करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि उन्हें अब अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें हर हाल में इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के शीर्ष नेतृत्व ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों के अनुरूप काम करते हुए संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता और उस पर जनता के भरोसे को भारी नुकसान पहुंचाया है। रमेश के मुताबिक, केवल सीईसी का पद छोड़ना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरी प्रणाली में सुधार की जरूरत है।
एसआईआर (SIR) रोकने की पुरजोर अपील और आईटी सिस्टम में सुधार
जयराम रमेश ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी कड़ी चिंता व्यक्त की है। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया के कारण देश के 13 करोड़ से अधिक नागरिकों के संवैधानिक मताधिकार पर खतरा मंडरा सकता है। इसी आशंका के चलते उन्होंने SIR प्रक्रिया को तुरंत निलंबित करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग के मौजूदा आईटी सिस्टम में व्यापक फेरबदल करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में मतदाता सूची और डेटा तक राजनीतिक दलों की पहुंच पारदर्शी और सुगम बनी रहे। इस पूरे घटनाक्रम पर अब चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।