पश्चिम बंगाल की राजनीति में जादवपुर यूनिवर्सिटी (JU) में हुई हिंसा और तोड़फोड़ के बाद पारा चढ़ गया है। यूनिवर्सिटी परिसर में आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के प्रदर्शन और कथित हंगामे के दो दिन बाद तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस पूरे मामले में अब राष्ट्रवाद, वंदे मातरम और कैंपस की सुरक्षा जैसे मुद्दे मुख्यधारा की बहस बन चुके हैं, जिस पर तीखी बयानबाजी का दौर जारी है।
केंपस में राष्ट्रवाद स्थापित करने की हुंकार
एक जनसभा को संबोधित करते हुए एक वरिष्ठ नेता ने यूनिवर्सिटी के वामपंथी (Left-wing) छात्रों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए और दावा किया कि संस्थान में राष्ट्र विरोधी ताकतें हावी हैं। उन्होंने कहा कि कैंपस के भीतर और बाहर हर हाल में राष्ट्रवाद स्थापित किया जाएगा और इस मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
अपने संबोधन में उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सच है कि जादवपुर यूनिवर्सिटी परिसर में 'वंदे मातरम' नहीं गाया जा सकता और वहां राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाता? उन्होंने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी कैंपस में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का प्रवेश वर्जित है और वहां सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगाए जा सकते। इन बयानों के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल सा आ गया है।
यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों ने खारिज किए आरोप
दूसरी ओर, जादवपुर यूनिवर्सिटी के शिक्षकों और अधिकारियों ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इतिहास विभाग की प्रोफेसर मारूणा मुर्मू ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह (Convocation) के दौरान परंपरा के अनुसार 'वंदे मातरम' गाया जाता है और ओपन-एयर थिएटर के बाहर राज्यपाल द्वारा राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया जाता है।
- यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक मुख्यालय अरविंद भवन के सामने राष्ट्रीय ध्वज स्थायी रूप से फहराया जाता है।
- जादवपुर यूनिवर्सिटी की स्थापना ही राष्ट्रवाद की भावना से हुई थी, इसलिए यहाँ राष्ट्रगीਤ या राष्ट्रीय ध्वज को लेकर कोई पाबंदी नहीं है।
- विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, हालिया हिंसा के सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपे गए हैं, जो इस बात का सबूत है कि कैंपस में कैमरे मौजूद हैं।
निर्माणा इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर और कार्यकारी परिषद के सदस्य पार्थ प्रतिम बिस्वाश ने भी मुख्यमंत्री के दावों पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों का यूनिवर्सिटी आना-जाना लगा रहता है, ऐसे में यह कहना कि अधिकारी कैंपस में प्रवेश नहीं कर सकते, तथ्यों के विपरीत है।
मीडिया और वामपंथियों पर कड़ी चेतावनी
अपने भाषण के दौरान उन्होंने एक मीडिया समूह पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक खास मीडिया ग्रुप जादवपुर की घटना को लेकर सहानुभूति दिखा रहा है और उन ताकतों के साथ खड़ा है जो 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों का सम्मान नहीं करतीं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में रहना है, तो 'वंदे मातरम' गाना ही होगा।
वामपंथी दलों पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों की राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है और जो चुनावों में अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए, वे अब जादवपुर के बहाने राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उन्हें कोई फायदा नहीं मिलने वाला है।
हिंसा और तोड़फोड़ की पूरी पृष्ठभूमि
बता दें कि गुरुवार तड़के जादवपुर यूनिवर्सिटी में उस वक्त तनाव फैल गया था जब एबीवीपी के समर्थकों ने कथित तौर पर मुख्य प्रशासनिक भवन में घुसकर वामपंथी छात्रों को निशाना बनाया। इस दौरान कपड़े के जलते हुए गोले फेंके जाने के आरोप भी लगे। बाद में दोपहर के समय एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने मुख्य गेट पर प्रदर्शन किया, जिसे तितर-बितर करने के लिए पुलिस को दखل देना पड़ा था।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित प्रतीक चिन्ह (Emblem) को भी नुकसान पहुंचा था, जिसे प्रख्यात कलाकार नंदलाल बोस ने डिजाइन किया था। हालांकि, बाद में उसे ठीक कर दिया गया।
