10 साल पुराना खौफ और गोलियों की तड़तड़ाहट से खत्म हुआ एक अध्याय
पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध की दुनिया में कभी सबसे बड़ा मुद्दा बना 'कैराना पलायन' (Kairana Exodus) अब इतिहास के पन्नों में सिमट गया है। शामली जिले में पुलिस मुठभेड़ के दौरान 1 लाख रुपये के इनामी कुख्यात गैंगस्टर फुरकान (38) के मारे जाने के साथ ही उस खौफनाक दौर का पटाक्षेप हो गया, जिसने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया था।
फुरकान वही अपराधी था, जिसकी रंगदारी और खौफ के चलते साल 2014 में कैराना के प्रमुख व्यापारी विनोद कुमार सिंग्घल की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद व्यापारियों में ऐसा डर फैला कि दर्जनों परिवारों को कैराना छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।
रंगना गांव के पास मुठभेड़: ऐसे ढेर हुआ इनामी फुरकान
पुलिस से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, 5 अगस्त की देर रात पुलिस को सूचना मिली थी कि फुरकान अपने एक साथी के साथ शामली के रंगना गांव के पास किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है।
- घेराबंदी और फायरिंग: पुलिस टीम ने जब संदिग्धों को रुकने का इशारा किया, तो अपराधियों ने सीधी फायरिंग शुरू कर दी।
- जवाबी कार्रवाई: पुलिस की ओर से की गई आत्मरक्षार्थ फायरिंग में फुरकान को कई गोलियां लगीं, जबकि उसका दूसरा साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया।
- एक सिपाही घायल: इस मुठभेड़ में हेड कांस्टेबल हरविंदर भी गोली लगने से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भर्ती कराया गया है।
- हथियार बरामद: मौके से पुलिस ने एक ऑटोमैटिक कार्बाइन, एक पिस्टल, जिंदा कारतूस और बिना नंबर प्लेट की बाइक बरामद की है।
2014 का वो काला दिन और 'पलायन' की गूंज
16 अगस्त 2014 को कैराना व्यापार मंडल के कोषाध्यक्ष विनोद कुमार सिंग्घल की उनकी ही किराना दुकान में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वजह थी—रंगदारी न देना। इस हत्याकांड के बाद विनोद सिंग्घल का परिवार मुजफ्फरनगर शिफ्ट हो गया था। बाद में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों के काफी समझाने-बुझाने पर परिवार वापस लौटा।
इसके बाद 2016 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह मुद्दा देशव्यापी सुर्खियों में आया, जब दिवंगत बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने दावा किया कि आपराधिक गिरोहों की धमकियों और रंगदारी के डर से लगभग 350 हिंदू परिवारों को कैराना छोड़ना पड़ा था।
"मेरे भाई की हत्या के बाद सिर्फ हमारा परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा कैराना खौफ में जी रहा था। रंगदारी के चलते दो और व्यापारियों शिव कुमार और राजेंद्र गर्ग की भी हत्या कर दी गई थी। आज इतने सालों बाद पुलिस की इस कार्रवाई से शांति की उम्मीद जगी है।"
— वरुण सिंग्घल (दिवंगत विनोद सिंग्घल के छोटे भाई)
पुलिस रिकॉर्ड में 'D-8/2015' गैंग का सरगना था फुरकान
मूल रूप से कैराना के आर्यपूरी इलाके का रहने वाला फुरकान पुलिस फाइलों में पंजीकृत गैंग 'D-8/2015' चलाता था। उसके खिलाफ हत्या, लूट, रंगदारी, एनडीपीएस (NDPS) और आर्म्स एक्ट के 24 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज थे। हाल ही में वह एक नशीले पदार्थ के मामले में 10 साल की सजा काटने के बाद जमानत पर बाहर आया था और दोबारा अपने नेटवर्क को सक्रिय कर रहा था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. कैराना का गैंगस्टर फुरकान कौन था?
फुरकान शामली जिले के कैराना का 1 लाख रुपये का इनामी कुख्यात अपराधी था, जो रंगदारी और हत्या के कई मामलों में नामजद था। वह कैराना व्यापारी विनोद सिंग्घल हत्याकांड का मुख्य आरोपी भी था।
Q2. कैराना पलायन मामला क्या था?
वर्ष 2014-2016 के दौरान कैराना में आपराधिक गिरोहों के खौफ और रंगदारी मांगों के कारण कई व्यापारी परिवारों को कस्बा छोड़कर जाना पड़ा था। वर्ष 2016 में इस मुद्दे ने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया था।
Q3. एनकाउंटर में पुलिस को क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने फुरकान के पास से एक कार्बाइन, एक पिस्टल, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस, नकदी और बिना नंबर प्लेट की एक मोटरसाइकिल बरामद की है।