क्रिकेट के मैदान पर जब दबाव चरम पर होता है, तब टीम को एक ऐसे खिलाड़ी की दरकार होती है जो पारी को संभाल भी सके और जरूरत पड़ने पर गियर बदलकर रनगति को भी तेज कर सके। भारतीय क्रिकेट टीम के लिए यह भूमिका इन दिनों केएल राहुल बखूबी निभा रहे हैं। हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज के आखिरी मुकाबले में राहुल ने एक ऐसी पारी खेली, जिसने आलोचकों का मुंह तो बंद किया ही, साथ ही कई बड़े रिकॉर्ड्स को भी नेस्तनाबूद कर दिया।
मौजूदा समय में जब भारतीय मध्य क्रम में लगातार बदलाव और प्रयोग किए जा रहे हैं, तब केएल राहुल का यह प्रदर्शन किसी वरदान से कम नहीं है। न्यू चंडीगढ़ के पीसीए स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में जब राहुल क्रीज पर उतरे, तब टीम की स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। पारी के 25वें ओवर में 141 रन पर तीन विकेट गिर चुके थे। इसके बाद राहुल ने जिस परिपक्वता के साथ पारी को आगे बढ़ाया, वह आधुनिक सीमित ओवरों के क्रिकेट की एक बेहतरीन मिसाल है।
नंबर 5 पर राहुल का जलवा, एबी डिविलियर्स के करीब
आंकड़ों के आईने में देखें तो नंबर 5 पर बल्लेबाजी करते हुए केएल राहुल का रिकॉर्ड बेहद शानदार है। इस पोजीशन पर खेलते हुए उनका औसत 68 से अधिक का है। इस पायदान पर दक्षिण अफ्रीका के महान बल्लेबाज एबी डिविलियर्स के बाद सबसे बेहतरीन आंकड़ों वाले बल्लेबाजों में राहुल का नाम मजबूती से शुमार होता है।
- शतकों की बराबरी: नंबर 5 पर बल्लेबाजी करते हुए राहुल के नाम अब उतने ही शतक (4) दर्ज हो गए हैं, जितने महान विकेटकीपर-बल्लेबाज एमएस धोनी के थे।
- शानदार स्ट्राइक रेट: इस पोजीशन पर खेलने वाले चुनिंदा बल्लेबाजों में राहुल एकमात्र ऐसे खिलाड़ियों में शामिल हैं जिनका औसत 50 से ऊपर और स्ट्राइक रेट 100 से अधिक का है।
- डेथ ओवर्स में महारत: पारी के अंतिम ओवरों में रन बनाने की उनकी क्षमता में गजब का सुधार देखा गया है। हालिया नियमों और बदली हुई रणनीतियों के बीच भी राहुल ने डेथ ओवर्स में अपनी बल्लेबाजी से सबको प्रभावित किया है।
कठिन परिस्थितियों से पार पाने की कला
यह सफर राहुल के लिए आसान नहीं रहा है। टीम कॉम्बिनेशन, बाएं हाथ के बल्लेबाजों की तलाश और लगातार बदलते बल्लेबाजी क्रम के बीच उन्होंने कभी अपनी जगह को लेकर शिकायत नहीं की। इंग्लैंड दौरे पर शुरुआती असफलताओं और चोट के बाद वापसी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बावजूद, घरेलू सर्किट से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक, राहुल ने अपने खेल में निरंतरता बनाए रखी है।
वेस्टइंडीज के खिलाफ उस मुकाबले में उनकी नाबाद 129 रनों की पारी सिर्फ एक शतक नहीं थी, बल्कि यह इस बात का प्रमाण थी कि वह किस उच्च स्तर के बल्लेबाज हैं। शुरुआत में संभलकर खेलने और पुरानी पड़ चुकी गेंद पर स्ट्राइक रोटेट करने के बाद, पारी के अंतिम 10 ओवरों में उन्होंने जिस तरह से बड़े शॉट खेले, उसने स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को रोमांचित कर दिया। आखिरी कुछ गेंदों में उनके बल्ले से निकले छक्के और चौके इस बात की गवाही दे रहे थे कि अब वह फिनिशर की भूमिका को कितनी अच्छी तरह समझ चुके हैं।
भविष्य की रणनीतियों के लिए एक मजबूत स्तंभ
जैसे-जैसे बड़े टूर्नामेंट नजदीक आ रहे हैं, भारतीय टीम प्रबंधन के लिए यह राहत की बात होगी कि मध्य क्रम में उनका सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी शानदार फॉर्म में है। विकेटकीपिंग की दोहरी जिम्मेदारी संभालते हुए टीम के लिए संकट के समय दीवार बनकर खड़ा होना हर खिलाड़ी के बस की बात नहीं होती।
केएल राहुल ने अपने इस हालिया प्रदर्शन से यह साफ कर दिया है कि वह केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि भारतीय वनडे टीम की रीढ़ हैं। आने वाले मुकाबलों में उनकी यह फॉर्म टीम इंडिया की जीत की इबारत लिखने में अहम भूमिका निभाएगी। क्रिकेट के गलियारों में अब इस बात की चर्चा आम हो चली है कि सही मायनों में राहुल ही इस समय भारतीय वनडे क्रिकेट के 'मिस्टर इंडिस्पेंसेबल' (अरिहार्य) हैं।