पाकिस्तान एक बार फिर खून से सन गया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहट जिले में स्थित एक पुलिस लाइन परिसर के भीतर हुए सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। जुमे के पवित्र दिन जब लोग इबादत में मशगूल थे, ठीक उसी वक्त मौत बनकर आए फिदायीन हमलावरों ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दिल दहला देने वाले दोहरे धमाके में अब तक 23 बेकसूर लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण मरने वालों का आंकड़ा और भी ऊपर जा सकता है।
जुमे की नमाज के दौरान हुआ खूनी खेल
घटनास्थल से सामने आ रही शुरुआती जानकारियों के अनुसार, हमलावरों ने बेहद सुनियोजित तरीके से इस नापाक साजिश को रचा था। शुक्रवार का दिन होने के कारण पुलिस लाइन के भीतर बने एक विशेष स्थान पर नमाजियों की अच्छी खासी भीड़ जुटी हुई थी। स्थानीय चश्मदीदों और पुलिस सूत्रों का कहना है कि हमलावर सुरक्षा घेरे को भेदकर या किसी तरह अंदर घुसने में कामयाब रहे। जैसे ही लोग नमाज अदा कर रहे थे, अचानक पहला जोरदार धमाका हुआ, जिसने पलभर में वहां भगदड़ मचा दी।
लोग अभी कुछ समझ पाते और संभलने की कोशिश कर रहे थे कि चंद सेकेंड के भीतर ही दूसरा आत्मघाती धमाका (Suicide Blast) हो गया। दूसरे धमाके की तीव्रता इतनी भयानक थी कि आसपास की इमारतें और पुलिस लाइन के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। हर तरफ चीख-पुकार मच गई और जमीन खून से लाल हो गई।
मौके पर मची अफरातफरी, राहत और बचाव कार्य जारी
धमाके की गूंज दूर-दूर तक सुनाई दी, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और आतंकवाद रोधी दस्ते की टीमें भारी सुरक्षा बल के साथ मौके पर पहुंचीं। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का तांता लग गया। कोहट और आसपास के जिलों के अस्पतालों में इस समय इमरजेंसी घोषित कर दी गई है।
अस्पताल सूत्रों का कहना है कि कई घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। उनके शरीर पर बम के छर्रों और गंभीर जलने के निशान हैं। डॉक्टरों की विशेष टीमें घायलों की जान बचाने के लिए दिन-रात जुटी हुई हैं। इस बीच, सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया है और चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस साजिश में और कितने लोग शामिल थे।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील इलाके यानी पुलिस लाइन के भीतर इस तरह का बड़ा आतंकी हमला होना पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। एक तरफ जहां देश गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में चरमपंथी गतिविधियां एक बार फिर से बेकाबू होती नजर आ रही हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले यह साबित करते हैं कि आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल अभी भी सक्रिय हैं और वे सुरक्षा तंत्र को आसानी से चकमा देने की क्षमता रखते हैं। स्थानीय नागरिकों में इस घटना के बाद भारी आक्रोश और डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि जब पुलिस लाइन जैसी जगहों पर ही सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?
किस संगठन का हो सकता है हाथ?
हालांकि खबर लिखे जाने तक किसी भी प्रमुख आतंकवादी संगठन ने इस हमले की आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का शक तुरंत प्रतिबंधित संगठनों और स्थानीय उग्रवादी गुटों की तरफ गया है। खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र पिछले कुछ सालों से आतंकवादियों का गढ़ बनता जा रहा है, जहां सुरक्षा बलों को लगातार निशाना बनाया जाता रहा है। खुफिया एजेंसियां अब यह खंगालने में जुटी हैं कि आखिर इन हमलावरों को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट कहां से मिला और क्या इस हमले के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र था।
लगातार बिगड़ते हालात
वर्ष 2026 के इस दौर में भी पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा लगातार गर्त में जाती दिख रही है। इस ताजा खूनी संघर्ष ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान इस क्षेत्र में बढ़ते आतंकवाद की ओर खींच लिया है। स्थानीय प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है और संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है।
पीड़ित परिवारों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हर कोई इस बात से हैरान है कि आखिर कब तक बेकसूर लोग इस तरह की हिंसा का शिकार बनते रहेंगे। सरकार और सेना की तरफ से भले ही बड़े-बड़े दावे किए जाते हों, लेकिन कोहट की इस घटना ने उन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस पूरी साजिश की और भी परतें खुलने की उम्मीद है।