कोटद्वार: 'गेटवे ऑफ गढ़वाल' के नाम से मशहूर कोटद्वार आज एक गंभीर मोड़ पर खड़ा है। 2 लाख से अधिक आबादी वाले इस मैदानी शहर का युवा 12वीं पास करते ही अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर बाहर जाने की योजना बनाने लगता है। पूर्व सैनिक महेंद्रपाल सिंह रावत के एक तीखे आलेख ने इस पूरे मुद्दे को फिर से बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है कि कोटद्वार विकास का द्वार है या फिर मजबूरी के पलायन का?
17 साल की उम्र में शहर छोड़ने को मजबूर युवा
कोटद्वार उत्तराखंड का एक बेहद महत्वपूर्ण भूभाग है, लेकिन जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं का भारी अकाल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शहर में आज तक न तो कोई सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज बन पाया और न ही कोई मेडिकल कॉलेज।
- शिक्षा की स्थिति: उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को देहरादून, दिल्ली या रुड़की का रुख करना पड़ता है।
- आर्थिक बोझ: बाहर रहने का खर्च मध्यमवर्गीय परिवारों की जीवनभर की जमा-पूंजी निचोड़ लेता है।
- रोजगार का अकाल: सिडकुल होने के बावजूद बड़ी फैक्ट्रियों और आईटी पार्कों की भारी कमी है।
स्वास्थ्य व्यवस्था लाचार: एम्स ऋषिकेश के भरोसे सांसें
स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो कोटद्वार का बेस अस्पताल केवल नाम का सहारा बनकर रह गया है। आधी रात को अगर किसी मरीज को दिल का दौरा पड़े या न्यूरो-कैंसर जैसी गंभीर स्थिति हो, तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति में 108 एम्बुलेंस से सीधे एम्स ऋषिकेश भागना पड़ता है। कई बार गरीब मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
कनेक्टिविटी और सड़कों का पेच
गढ़वाल और कुमाऊं मंडल को सीधे जोड़ने वाले राज्य मार्ग की मांग सालों से अधर में लटकी है। हालिया सरकारी पत्राचार से यह संकेत मिलता है कि वन कानूनों की जटिलताओं के कारण कनेक्टिविटी के कई बड़े प्रोजेक्ट्स अब भी लालफीताशाही और कानूनी अड़चनों में फंसे हुए हैं।
"जो जनप्रतिनिधि 5 साल में एक कॉलेज या बेहतर अस्पताल नहीं दे सकता, वह चुनाव में बड़े-बड़े वादे कैसे पूरे करेगा? अब वादों का नहीं, गारंटी का समय है।"
हल क्या है? जनता और पूर्व सैनिकों की पहल आवश्यक
कोटद्वार में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है—फौज के अफसरों से लेकर आईआईटी तक में यहां के युवाओं ने अपना नाम रोशन किया है। विशेषज्ञ और पूर्व सैनिकों का मानना है कि अब जाति-धर्म और खोखले दावों से ऊपर उठकर स्वास्थ्य, शिक्षा और स्थानीय रोजगार को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाना होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: कोटद्वार को 'गेटवे ऑफ गढ़वाल' क्यों कहा जाता है?
यह उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र का मुख्य प्रवेश द्वार है, जो मैदानी इलाकों को पहाड़ों से जोड़ता है।
Q2: कोटद्वार में पलायन का मुख्य कारण क्या है?
उच्च शिक्षा संस्थानों (इंजीनियरिंग/मेडिकल कॉलेज), विशेषज्ञ अस्पतालों और रोजगार के अवसरों की कमी इसका सबसे मुख्य कारण है।
Q3: स्थानीय स्तर पर पलायन रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
आईटी पार्क की स्थापना, स्थानीय पर्यटन का विकास, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ और वोकेशनल एजुकेशन हब बनाकर पलायन पर रोक लगाई जा सकती है।